31 जुलाई 2026
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तमिलनाडु CM जोसेफ विजय ने कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में की पूजा, चढ़ाई चांदी की तलवार

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तमिलनाडु CM जोसेफ विजय ने कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में की पूजा, चढ़ाई चांदी की तलवार

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 12 जून को कर्नाटक के कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में पूजा की और 1.6 किलोग्राम की चांदी की तलवार भेंट की। पारंपरिक लाल शल्य वस्त्र में पहुँचे विजय का पूर्णकुंभ से स्वागत हुआ; दर्शन करीब 20 मिनट चले।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 12 जून 2026 को कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर , उडुपी में पूजा-अर्चना की।
विजय ने मंदिर को 1.6 किलोग्राम वजन की चांदी की तलवार दान की।
मंदिर अध्यक्ष बाबू हेगड़े के अनुसार दर्शन लगभग 20 मिनट तक चला; कोई विशेष संकल्प नहीं था।
मुख्यमंत्री नई दिल्ली से विशेष विमान द्वारा मंगलुरु पहुँचे और सड़क मार्ग से कोल्लूर गए।
कर्नाटक और तमिलनाडु पुलिस दोनों को मंदिर परिसर और हवाई अड्डे पर तैनात किया गया था।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में देवी मूकाम्बिका के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। विजय ने मंदिर को 1.6 किलोग्राम वजन की एक चांदी की तलवार भेंट की और करीब 20 मिनट तक गर्भगृह में प्रार्थना की।

मंदिर पहुँचने का सफर

नई दिल्ली से एक विशेष विमान के जरिए मंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद मुख्यमंत्री विजय सड़क मार्ग से सीधे कोल्लूर स्थित मंदिर के गेस्ट हाउस पहुँचे। वहाँ पारंपरिक लाल शल्य वस्त्र धारण कर उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया। हल्की बूंदाबांदी के बावजूद विजय कुछ देर रुककर अपने समर्थकों का अभिवादन करते रहे, जो बड़ी संख्या में उनकी एक झलक पाने के लिए एकत्र हुए थे।

मंदिर में स्वागत और पूजा

मंदिर अधिकारियों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक पूर्णकुंभ से स्वागत किया और उनकी कलाई पर पवित्र धागा बाँधा। मंदिर अध्यक्ष बाबू हेगड़े ने बताया कि विजय ने गर्भगृह के सामने खड़े होकर प्रार्थना की और अन्य भक्तों की तरह ही देवी की पूजा-अर्चना की। हेगड़े के अनुसार, 'कोई विशेष संकल्प नहीं था — वे खड़े हुए, प्रार्थना की और चले गए।'

सुरक्षा व्यवस्था

विजय के आगमन को देखते हुए कर्नाटक पुलिस और तमिलनाडु पुलिस दोनों के कर्मियों को मंदिर परिसर तथा मंगलुरु हवाई अड्डे पर तैनात किया गया था। कर्नाटक में विजय के बड़ी संख्या में प्रशंसकों को देखते हुए अधिकारियों ने पहले से भारी भीड़ की आशंका जताई थी। विजय द्वारा पूजा पूरी होने तक अन्य श्रद्धालुओं के मंदिर में प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी।

आगे का कार्यक्रम

मंदिर दर्शन के बाद मुख्यमंत्री विजय के आगे के कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं थी। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब तमिलनाडु की नई सरकार के कई राज्यों के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पूर्णकुंभ स्वागत और चांदी की तलवार का दान, ये सब मिलकर एक सुनियोजित सार्वजनिक छवि निर्माण की ओर संकेत करते हैं। गौरतलब है कि कर्नाटक में उनके प्रशंसकों की बड़ी संख्या राजनीतिक विस्तार की संभावनाओं की ओर भी इशारा करती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि एक दक्षिण भारतीय मुख्यमंत्री का पड़ोसी राज्य के प्रमुख मंदिर में इस स्तर का स्वागत, दोनों राज्यों के सांस्कृतिक-राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु CM जोसेफ विजय ने कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में क्या किया?
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 12 जून 2026 को कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में देवी मूकाम्बिका की पूजा-अर्चना की और मंदिर को 1.6 किलोग्राम वजन की चांदी की तलवार भेंट की। दर्शन करीब 20 मिनट तक चला।
कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर कहाँ स्थित है?
कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है। यह दक्षिण भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
CM विजय के दर्शन के दौरान मंदिर में क्या विशेष व्यवस्था की गई थी?
विजय की यात्रा के दौरान कर्नाटक और तमिलनाडु पुलिस दोनों को मंदिर परिसर और मंगलुरु हवाई अड्डे पर तैनात किया गया था। विजय की पूजा पूरी होने तक अन्य श्रद्धालुओं के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।
जोसेफ विजय मंदिर कैसे पहुँचे?
मुख्यमंत्री विजय नई दिल्ली से विशेष विमान द्वारा मंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँचे और वहाँ से सड़क मार्ग से कोल्लूर गए। मंदिर के गेस्ट हाउस में पारंपरिक वस्त्र धारण कर उन्होंने दर्शन किए।
मंदिर अध्यक्ष ने विजय के दर्शन के बारे में क्या कहा?
मंदिर अध्यक्ष बाबू हेगड़े ने बताया कि विजय ने गर्भगृह के सामने खड़े होकर प्रार्थना की और अन्य भक्तों की तरह पूजा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई विशेष संकल्प नहीं था और दर्शन लगभग 20 मिनट तक चला।
राष्ट्र प्रेस
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