तमिलनाडु में DRI ने जब्त किया ₹100 करोड़ से अधिक का 137 किलो क्रिस्टल मेथ, श्रीलंका तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़; 4 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने 16-17 अक्टूबर 2026 को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के एक तटीय गाँव से 137 किलोग्राम उच्च शुद्धता वाला क्रिस्टल मेथामफेटामाइन (मेथ) जब्त किया है, जिसकी अवैध बाज़ार में कीमत ₹100 करोड़ से अधिक आँकी गई है। इस मामले में चार आरोपियों को स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार, तस्करी नेटवर्क इस खेप को समुद्री मार्ग से श्रीलंका भेजने की तैयारी में था।
अभियान और बरामदगी का विवरण
DRI को 16 और 17 अक्टूबर 2026 को विशिष्ट खुफिया इनपुट प्राप्त हुए, जिनके आधार पर एजेंसी ने नागपट्टिनम के तटीय इलाके में निगरानी और तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान छह डफेल बैग बरामद हुए जिनमें चाँदी की पन्नी में लिपटे 27 पैकेट थे। प्रत्येक पैकेट का वजन लगभग 5 किलोग्राम था और उसमें सफेद क्रिस्टलीय पदार्थ भरा था, जिसे उच्च शुद्धता वाला मेथामफेटामाइन होने का संदेह है।
कुल बरामद खेप का सकल वजन 137 किलोग्राम दर्ज किया गया। यह अब तक की बड़ी तटीय मादक पदार्थ ज़ब्ती में से एक मानी जा रही है।
संदिग्ध नेटवर्क और अतिरिक्त बरामदगी
कार्रवाई के दौरान संदिग्ध नेटवर्क के कथित संचालक के ठिकाने पर भी छापा मारा गया। वहाँ से ₹10 लाख नकद बरामद हुए, जिनके मादक पदार्थों की बिक्री से प्राप्त रकम होने का संदेह है। इसके अलावा, खेप की ढुलाई में कथित तौर पर उपयोग की गई दो चार-पहिया गाड़ियाँ और एक दोपहिया वाहन भी जब्त किए गए।
अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी इस खेप को समुद्र के बीच में किसी अन्य जहाज़ या नाव में स्थानांतरित करके श्रीलंका तक पहुँचाने की योजना बना रहे थे — एक ऐसी पद्धति जिसे 'मिड-सी ट्रांसशिपमेंट' कहा जाता है।
कानूनी कार्रवाई
DRI ने समस्त जब्त मादक पदार्थ NDPS अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत ज़ब्त किए हैं। गिरफ्तार चारों आरोपियों को इसी अधिनियम के अंतर्गत न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जाँच में इनकी परिवहन, भंडारण और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं में भूमिका सामने आई है।
भारत के तटीय मार्गों पर तस्करी का बढ़ता खतरा
गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच का संकरा पाक जलडमरूमध्य वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी का संवेदनशील मार्ग रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के दक्षिण-पूर्वी तटीय क्षेत्रों में 'गोल्डन ट्राएंगल' देशों — म्यांमार, लाओस और थाईलैंड — से उत्पादित सिंथेटिक ड्रग्स की आवक में वृद्धि की आशंका जताई जाती रही है। DRI के अनुसार, यह कार्रवाई भारतीय समुद्री तटों के ज़रिए संचालित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध जारी अभियान का हिस्सा है।
आगे की जाँच
DRI की जाँच टीम इस नेटवर्क के अन्य सूत्रों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, मादक पदार्थों की उत्पत्ति और वित्तपोषण के स्रोत का पता लगाने के लिए विस्तृत जाँच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।