टाटा संस लिस्टिंग विवाद: नोएल टाटा समेत 4 वरिष्ठ ट्रस्टियों ने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर लगाए गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
टाटा संस की संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के वरिष्ठ ट्रस्टियों ने साथी ट्रस्टियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर बोर्ड के प्रस्तावों को कमज़ोर करने और अपने न्यासी दायित्वों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से जुड़े नियामकीय मुद्दों के समाधान की राह तलाश रही है।
आरोपों का स्वरूप और पत्र की पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, यह आरोप एक औपचारिक पत्र के माध्यम से उठाए गए हैं, जिस पर नोएल एन. टाटा, डेरियस जे. खंबाटा, नेविल एन. टाटा और भास्कर भट्ट के हस्ताक्षर बताए गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखना लंबे समय से टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी दोनों की स्थापित एवं सहमति-आधारित नीति रही है।
गौरतलब है कि मार्च 2024 में टाटा संस के बोर्ड ने सर्वसम्मति से कंपनी को अनलिस्टेड बनाए रखने का निर्णय लिया था। इसके बाद जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने भी इसी रुख को दोहराया था और RBI के साथ इस मुद्दे पर संवाद जारी रखने पर सहमति जताई थी।
वरिष्ठ ट्रस्टियों के मुख्य आरोप
पत्र में कहा गया है कि जुलाई 2025 के प्रस्तावों को कभी वापस नहीं लिया गया, फिर भी कथित तौर पर वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने सामूहिक चर्चा या पूर्व निर्णयों की पुनर्समीक्षा की माँग किए बिना सार्वजनिक रूप से लिस्टिंग का समर्थन किया। वरिष्ठ ट्रस्टियों का कहना है कि ऐसे सार्वजनिक बयान न केवल ट्रस्ट्स के आधिकारिक निर्णयों को कमज़ोर करते हैं, बल्कि RBI के समक्ष टाटा संस की लंबित प्रक्रियाओं और आवेदनों को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब टाटा संस को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) संबंधी RBI मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करना है, और इस दिशा में कंपनी की रणनीति को लेकर ट्रस्टियों के बीच स्पष्ट मतभेद उभर आए हैं।
विलय प्रस्ताव — लिस्टिंग का विकल्प
वरिष्ठ ट्रस्टियों ने 28 सितंबर को दिए गए एक प्रस्ताव का भी उल्लेख किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रस्ताव में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय सुझाया गया था। इसे उन संभावित विकल्पों में से एक माना गया जो कंपनी को RBI के NBFC मानदंडों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं — बिना सार्वजनिक लिस्टिंग का रास्ता अपनाए।
पत्र में ट्रस्टियों ने यह भी स्पष्ट किया कि टाटा संस के बोर्ड ने उनसे केवल लिस्टिंग विकल्प पर विचार करने के बजाय उपलब्ध सभी विकल्पों की जाँच करने को कहा था, और उन्होंने उसी अपेक्षा के अनुरूप कार्य किया।
नियामकीय पेचीदगी और व्यापक संदर्भ
टाटा संस अपर लेयर NBFC के रूप में RBI की निगरानी में आती है, जिसके चलते कंपनी को सूचीबद्ध होने की अनिवार्यता का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, ट्रस्ट्स और कंपनी के बोर्ड ने अनलिस्टेड रहने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने को प्राथमिकता दी है।
यह विवाद टाटा समूह के कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिए एक संवेदनशील मोड़ पर आया है। समूह के चैरिटेबल ट्रस्टों के भीतर इस तरह के खुले मतभेद इसकी ऐतिहासिक आंतरिक एकजुटता की छवि के विपरीत हैं। आगे की दिशा काफी हद तक RBI के रुख और टाटा संस के बोर्ड की अगली बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगी।