18 सितंबर 2026
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टाटा संस लिस्टिंग को शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने बताया 'सामाजिक और नैतिक जरूरत', टाटा ट्रस्ट्स से विवाद गहराया

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टाटा संस लिस्टिंग को शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने बताया 'सामाजिक और नैतिक जरूरत', टाटा ट्रस्ट्स से विवाद गहराया

सारांश

टाटा संस की लिस्टिंग पर बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच टकराव के बीच एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने इसे 'सामाजिक और नैतिक जरूरत' बताया। 66% हिस्सेदारी वाले टाटा ट्रस्ट्स लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि बोर्ड ने मंजूरी दे दी है — भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट युद्धों में से एक का नया अध्याय।

मुख्य बातें

एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने 18 सितंबर 2026 को टाटा संस की लिस्टिंग को 'सामाजिक और नैतिक जरूरत' बताया।
टाटा ट्रस्ट्स — जिनकी टाटा संस में 66% हिस्सेदारी है — लिस्टिंग के पक्ष में नहीं; बोर्ड ने गुरुवार की बैठक में लिस्टिंग को मंजूरी दी।
नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि RBI के आदेश में 'लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं' और न ही किसी नियम उल्लंघन का उल्लेख।
मिस्त्री ने RBI के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लिस्टिंग से पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।
एसपी ग्रुप ने टाटा संस के साथ सकारात्मक बातचीत की इच्छा जताई।

एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को टाटा संस की शेयर बाज़ार में लिस्टिंग को 'सामाजिक और नैतिक जरूरत' करार दिया, जो टाटा ट्रस्ट्स के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आया जिसमें ट्रस्ट्स ने लिस्टिंग पर अपनी असहमति दर्ज कराई थी। मिस्त्री ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पूर्ण स्पष्टता आ गई है और लिस्टिंग से पारदर्शिता व जवाबदेही और मज़बूत होगी।

विवाद की जड़: टाटा ट्रस्ट्स बनाम बोर्ड

टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है। इसके विपरीत, गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में टाटा संस के बोर्ड सदस्यों ने लिस्टिंग को अपनी मंजूरी दे दी। इस तरह भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों में से एक के भीतर एक असाधारण आंतरिक टकराव सामने आया है।

यह ऐसे समय में आया है जब RBI के एक आदेश ने टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालाँकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि RBI के आदेश में 'लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है' और न ही किसी 'खास कदम' का उल्लेख किया गया है।

नोएल टाटा का रुख: सावधानी और प्रक्रिया पर जोर

नोएल टाटा ने टाटा संस बोर्ड को दिए अपने बयान में ट्रस्ट की स्थिति एक बार फिर दोहराते हुए कहा, 'इस तरह के मामले के लिए कागजात, स्पष्टीकरण, सलाह और समय की जरूरत होती है और मुझे इसमें कोई शक नहीं कि ये सब तैयार किए जा रहे हैं।' उन्होंने आश्वस्त किया कि 'बोर्ड को पूरी जानकारी दी जाएगी।'

नोएल टाटा ने यह भी कहा कि बोर्ड ने अभी तक RBI के कम्युनिकेशन के कानूनी प्रभाव पर कोई राय नहीं बनाई है — इसमें यह भी शामिल है कि टाटा संस को क्या करना है और किस समय-सीमा में करना है। ट्रस्ट्स ने संकेत दिया है कि 'सिर्फ लिस्टिंग पर ही नहीं, बल्कि सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।'

मिस्त्री का रुख: बातचीत के लिए तैयार

शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने कहा कि उनका ग्रुप टाटा संस के साथ सकारात्मक बातचीत करने के लिए तैयार है। एसपी ग्रुप की टाटा संस में अल्पांश हिस्सेदारी है और वह लंबे समय से लिस्टिंग की माँग करता आया है, यह तर्क देते हुए कि पब्लिक लिस्टिंग से कंपनी के वास्तविक मूल्य का निर्धारण होगा और छोटे शेयरधारकों के हितों की रक्षा होगी।

गौरतलब है कि टाटा संस बनाम मिस्त्री परिवार का यह विवाद नया नहीं है — साइरस मिस्त्री को 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद से दोनों पक्षों के बीच कानूनी और कॉर्पोरेट टकराव जारी रहा है।

RBI आदेश का संदर्भ

भारतीय रिज़र्व बैंक के हालिया आदेश को लिस्टिंग की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है, हालाँकि नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि आदेश में न तो टाटा संस के नियम उल्लंघन का उल्लेख है और न ही किसी विशिष्ट कदम की बाध्यता। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, RBI के आदेश की व्याख्या ही अब इस पूरे विवाद की धुरी बन सकती है।

आगे की राह

अब सभी की नज़रें टाटा संस बोर्ड की अगली बैठक और RBI के आदेश की कानूनी व्याख्या पर हैं। एसपी ग्रुप की सकारात्मक बातचीत की पेशकश और टाटा ट्रस्ट्स की आपत्तियों के बीच यह देखना होगा कि क्या कोई सर्वमान्य रास्ता निकलता है। यह मामला भारत के कॉर्पोरेट गवर्नेंस के इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन RBI का हस्तक्षेप और बोर्ड की मंजूरी यह सवाल उठाती है कि क्या परोपकारी ट्रस्टों को अनिश्चित काल तक एक सार्वजनिक महत्व की कंपनी को बाज़ार की जवाबदेही से दूर रखने का अधिकार है। मुख्यधारा की कवरेज इसे केवल मिस्त्री-टाटा विवाद के रूप में देखती है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नियम बड़े परिवार-नियंत्रित समूहों पर कितने प्रभावी हैं। RBI के आदेश की व्याख्या इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने टाटा संस लिस्टिंग को 'सामाजिक और नैतिक जरूरत' क्यों बताया?
मिस्त्री का तर्क है कि टाटा संस की शेयर बाज़ार में लिस्टिंग से कंपनी में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जो जनहित में है। एसपी ग्रुप की टाटा संस में अल्पांश हिस्सेदारी है और वह लंबे समय से लिस्टिंग की वकालत करता रहा है।
टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस की लिस्टिंग के खिलाफ क्यों हैं?
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वे टाटा संस को पब्लिक करने के लिए सहमत नहीं हैं और 'सिर्फ लिस्टिंग पर ही नहीं, बल्कि सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।' टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में 66% हिस्सेदारी है, जो उन्हें इस फैसले में निर्णायक भूमिका देती है।
RBI के आदेश का टाटा संस लिस्टिंग से क्या संबंध है?
RBI के हालिया आदेश को लिस्टिंग की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। हालाँकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि RBI के आदेश में 'लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है' और न ही यह कहा गया है कि टाटा संस ने कोई नियम उल्लंघन किया है।
टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद की मौजूदा स्थिति क्या है?
टाटा संस के बोर्ड सदस्यों ने गुरुवार की बैठक में लिस्टिंग को मंजूरी दी, जबकि 66% हिस्सेदारी वाले टाटा ट्रस्ट्स इसके विरुद्ध हैं। नोएल टाटा ने बताया कि बोर्ड ने अभी RBI के कम्युनिकेशन के कानूनी असर पर अपनी राय नहीं बनाई है।
एसपी ग्रुप और टाटा समूह के बीच विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
साइरस मिस्त्री को 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद से एसपी ग्रुप और टाटा समूह के बीच कानूनी व कॉर्पोरेट विवाद चलता आया है। एसपी ग्रुप की टाटा संस में अल्पांश हिस्सेदारी है और वह लिस्टिंग के ज़रिए अपने निवेश का उचित मूल्यांकन चाहता है।
राष्ट्र प्रेस
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