टाटा संस लीडरशिप विवाद पर शरद पवार की चेतावनी: ट्रस्ट कमजोर हुए तो संस्थान खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने 22 सितंबर 2026 को टाटा संस के लीडरशिप ढाँचे में हालिया बदलावों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि चैरिटेबल ट्रस्टों की भूमिका कमज़ोर की गई, तो इसका सीधा असर राष्ट्रीय महत्व के कई अहम संस्थानों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप की परोपकारी पहचान, संस्थागत मूल्य और भरोसे पर आधारित स्वामित्व मॉडल देश के सामाजिक और विकासात्मक हितों के लिए अनिवार्य है।
विवादित 4-1 वोट और संवैधानिक प्रश्न
17 सितंबर 2026 को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में दो प्रस्ताव पारित किए गए — एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पाँच वर्ष और बढ़ाना तथा टाटा संस को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की दिशा में कदम उठाना। ये दोनों प्रस्ताव 4-1 के विवादित मत से पारित हुए।
टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने दोनों प्रस्तावों के विरुद्ध मतदान किया, जबकि नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने इनके पक्ष में वोट दिया। पवार ने तर्क दिया कि कंपनी के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के अनुसार, लीडरशिप से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए बहुमत हिस्सेदारी वाले ट्रस्टों का प्रतिनिधित्व करने वाले दोनों नॉमिनी डायरेक्टरों की सहमति आवश्यक है। इस आधार पर उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से वैध नहीं है।
टाटा ट्रस्ट की स्वामित्व भूमिका और सार्वजनिक हित
पवार ने याद दिलाया कि जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित और सर दोराबजी टाटा एवं सर रतन टाटा द्वारा आगे बढ़ाई गई ग्रुप की मूल भावना यह थी कि व्यावसायिक आय को समाज कल्याण में लगाया जाए। इसी दृष्टि से सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट जैसी चैरिटेबल संस्थाओं के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत इक्विटी है।
इन ट्रस्टों को मिलने वाला डिविडेंड सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, शोध और ग्रामीण आजीविका जैसे क्षेत्रों को वित्त पोषित करता है। पवार ने रेखांकित किया कि महाराष्ट्र इस विरासत का केंद्र है — टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) और नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA) इसी ट्रस्ट-व्यवस्था की देन हैं।
एक्स पर पवार का संदेश
पवार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'जमशेदजी टाटा और टाटा परिवार ने इंडस्ट्री को समाज सेवा के मूल्यों पर आधारित दिशा दी। इसलिए, टाटा ट्रस्ट की सामाजिक प्रतिबद्धता और संस्थागत भूमिका को बनाए रखा जाना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि 'टाटा ग्रुप' की वह विरासत बचाए रखना जरूरी है, जो महाराष्ट्र और देश की तरक्की से जुड़ी हुई है।
पवार की मुख्य अपील और आगे की राह
पवार ने जोर दिया कि ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टरों को प्राप्त वीटो एवं अनुमोदन अधिकारों का सम्मान होना चाहिए और उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही ट्रस्ट के नॉमिनी के विशेष अनुमोदन अधिकारों को मान्यता दे चुका है।
उन्होंने सभी पक्षों से अनुरोध किया कि लीडरशिप से जुड़े विवादों को टकराव के बजाय रचनात्मक संवाद और कानूनी कॉर्पोरेट प्रक्रियाओं के जरिए सुलझाया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब टाटा समूह की संस्थागत संरचना को लेकर कॉर्पोरेट जगत में व्यापक चर्चा छिड़ी हुई है, और टाटा संस की संभावित लिस्टिंग पर निवेशकों की नज़रें टिकी हैं।