टाटा संस नेतृत्व विवाद: नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
टाटा संस में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नोएल टाटा ने कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की 21 फरवरी 2027 से अगले पाँच वर्षों के लिए होने वाली पुनर्नियुक्ति को औपचारिक रूप से चुनौती दी है। उनका आरोप है कि इस फैसले में गंभीर प्रक्रियागत खामियाँ हैं और संभावित हितों के टकराव से जुड़े सवालों को दरकिनार किया गया।
नोएल टाटा की आपत्तियाँ
नोएल टाटा ने कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को एक पत्र भेजकर सात दिनों के भीतर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ उपलब्ध कराने की माँग की है। पत्र में उन्होंने दावा किया है कि 17 सितंबर की बोर्ड बैठक के मूल एजेंडे और संशोधित एजेंडे — दोनों में — कार्यकारी चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति से संबंधित किसी प्रस्ताव का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। एजेंडे के आइटम-7 को केवल नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (एनआरसी) की रिपोर्ट या चर्चा के रूप में दर्शाया गया था, लेकिन इसी बिंदु के तहत पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव पेश कर दिया गया।
नोएल टाटा ने यह भी कहा है कि समिति की बैठक का एजेंडा और कार्यवृत्त निदेशकों के बीच पहले से साझा नहीं किए गए, जिससे निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
चयन समिति और नियमों का उल्लंघन
टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का हवाला देते हुए नोएल टाटा ने सवाल किया है कि चेयरमैन के चयन के लिए आवश्यक चयन समिति का गठन क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार कंपनी के नियमों के तहत कुछ विशेष निदेशकों की सहमति अनिवार्य थी, परंतु वह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
उन्होंने कंपनी सचिव द्वारा बोर्ड बैठक के अंतिम मिनट्स तैयार होने से पहले ही प्रस्ताव को प्रमाणित करने और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल करने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है।
हितों के टकराव का आरोप
विवाद का एक अहम पहलू हैनो वन वेयरहाउसिंग नामक कंपनी से जुड़ा है। नोएल टाटा ने सवाल उठाया है कि इस कंपनी में एन. चंद्रशेखरन की पत्नी और पुत्र निदेशक हैं, और पूछा है कि क्या इन व्यावसायिक संबंधों की जानकारी पुनर्नियुक्ति पर विचार किए जाने से पहले टाटा संस बोर्ड को दी गई थी।
इसके अतिरिक्त, टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस और एनआरसी सदस्य वेणु श्रीनिवासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। नोएल टाटा का कहना है कि श्रीनिवासन ने 3 सितंबर को हुई चर्चाओं में भाग लिया और मतदान किया, जबकि कथित व्यावसायिक संबंधों की जानकारी सार्वजनिक करने और निर्णय प्रक्रिया से स्वयं को अलग करने पर विचार किया जाना चाहिए था।
माँगे गए दस्तावेज़
अपने पत्र में नोएल टाटा ने 17 सितंबर की बोर्ड बैठक की मूल ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, उसकी ट्रांसक्रिप्ट, अंतिम कार्यवृत्त, प्रत्येक निदेशक के मतदान का रिकॉर्ड और बोर्ड दस्तावेज़ों में हुए बदलावों का पूरा ऑडिट ट्रेल उपलब्ध कराने की माँग की है। फिलहाल टाटा संस की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर व्यापक सवाल
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टाटा समूह के भीतर प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि टाटा समूह देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट समूहों में से एक है, और इस स्तर पर नेतृत्व को लेकर खुली चुनौती भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में दुर्लभ मानी जाती है। यह विवाद भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और बोर्ड-स्तरीय जवाबदेही को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है।