6 अगस्त 2026
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तेलंगाना विचारक के. जयशंकर की जयंती पर सर्वदलीय श्रद्धांजलि, CM रेवंत रेड्डी बोले — 'योगदान अमर है'

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तेलंगाना विचारक के. जयशंकर की जयंती पर सर्वदलीय श्रद्धांजलि, CM रेवंत रेड्डी बोले — 'योगदान अमर है'

सारांश

तेलंगाना आंदोलन के वैचारिक स्तंभ प्रो. के. जयशंकर की जयंती पर 6 अगस्त को पूरे राज्य में सर्वदलीय श्रद्धांजलि का सिलसिला रहा। CM रेवंत रेड्डी से लेकर बीआरएस के के. टी. रामा राव तक — सभी ने उनके छह दशकों के संघर्ष और वैचारिक योगदान को नमन किया।

मुख्य बातें

जयशंकर की जयंती पर 6 अगस्त को हैदराबाद समेत पूरे तेलंगाना में सर्वदलीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुए।
रेवंत रेड्डी ने जयशंकर को 'महान व्यक्तित्व' बताया जिन्होंने अंतिम सांस तक तेलंगाना के लिए संघर्ष किया।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.
रामा राव ने एक्स पर पोस्ट कर जयशंकर को 'महान आचार्य' कहा और उनके जीवन-समर्पण को याद किया।
जयशंकर काकतीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति थे; बीआरएस सरकार ने भूपालपल्ली ज़िले और एग्रीकल्चर कॉलेज का नाम उनके नाम पर रखा था।
कविता के नेतृत्व में तेलंगाना रक्षा सेना ने सरूरनगर, हैदराबाद में जनसभा कर सामाजिक न्याय की माँग उठाई।

तेलंगाना आंदोलन के प्रमुख विचारक प्रोफेसर के. जयशंकर की जयंती पर गुरुवार, 6 अगस्त को हैदराबाद समेत पूरे राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने तेलंगाना राज्य निर्माण में जयशंकर की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया।

मुख्यमंत्री की श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना के लोग तेलंगाना आंदोलन और अलग राज्य के गठन में प्रोफेसर जयशंकर के अमूल्य योगदान को कभी नहीं भुला सकते। उन्होंने जयशंकर को एक ऐसे महान व्यक्तित्व के रूप में याद किया जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक तेलंगाना के लिए संघर्ष जारी रखा।

मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जयशंकर ने इस क्षेत्र के साथ हुए अन्याय और भेदभाव को ठोस आँकड़ों के साथ देश के सामने रखकर छह दशकों तक अलग तेलंगाना की माँग को जीवित रखा। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार जयशंकर के आदर्शों को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

बीआरएस का सम्मान-समारोह

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने जयशंकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे तेलंगाना आंदोलन के वैचारिक मार्गदर्शक थे, जिन्होंने तेलंगाना राज्य का दर्जा हासिल करने के लक्ष्य को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि 'महान आचार्य कोथापल्ली जयशंकर ने अपना पूरा जीवन सिर्फ तेलंगाना राज्य हासिल करने के मकसद के लिए समर्पित कर दिया।'

के. टी. रामा राव ने कहा, 'आंदोलन के नेता केसीआर गारू के लिए जयशंकर सर एक गुरु की तरह थे। तेलंगाना की भावना को फैलाकर और लोगों में जागरूकता की लौ जलाकर, जयशंकर सर तेलंगाना के लिए एक मार्गदर्शक बन गए।' उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि बीआरएस सरकार ने जयशंकर की सेवाओं को सम्मान देते हुए भूपालपल्ली ज़िले और एग्रीकल्चर कॉलेज का नामकरण उनके नाम पर किया था। बीआरएस ने अपने मुख्यालय तेलंगाना भवन में एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम भी आयोजित किया।

तेलंगाना रक्षा सेना की जनसभा

के. कविता के नेतृत्व में तेलंगाना रक्षा सेना ने हैदराबाद के सरूरनगर में एक जनसभा का आयोजन किया, जहाँ जयशंकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ सामाजिक न्याय की माँग भी उठाई गई।

जयशंकर की विरासत

गौरतलब है कि प्रोफेसर के. जयशंकर काकतीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति थे और उन्हें तेलंगाना आंदोलन का वैचारिक स्तंभ माना जाता है। उन्होंने तेलंगाना क्षेत्र के साथ हुए आर्थिक और सामाजिक भेदभाव को दस्तावेज़ीकृत कर आंदोलन को एक मज़बूत वैचारिक आधार दिया। यह ऐसे समय में उनकी जयंती मनाई जा रही है जब राज्य के विभिन्न दल तेलंगाना की विकास-यात्रा और उसकी पहचान को लेकर अपनी-अपनी राजनीतिक भूमिका को परिभाषित करने में जुटे हैं।

राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में जन-प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दिवंगत विचारक को नमन किया। उनके विचार और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बीआरएस और BJP का एक मंच पर श्रद्धांजलि देना दर्शाता है कि तेलंगाना की राजनीति में उनकी विरासत अभी भी एक साझा भावनात्मक आधार है — भले ही इन दलों के बीच बाकी सब पर गहरे मतभेद हों। यह ऐसे समय में विशेष रूप से उल्लेखनीय है जब सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस तेलंगाना के विकास-एजेंडे पर तीखी नोकझोंक में हैं। असली सवाल यह है कि क्या जयशंकर के आँकड़ा-आधारित संघर्ष की विरासत — जिसने भेदभाव को दस्तावेज़ीकृत किया — आज की सरकारों की जवाबदेही के लिए भी उतनी ही मज़बूती से इस्तेमाल होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रोफेसर के. जयशंकर कौन थे?
प्रोफेसर के. जयशंकर तेलंगाना आंदोलन के प्रमुख वैचारिक स्तंभ और काकतीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति थे। उन्होंने तेलंगाना क्षेत्र के साथ हुए आर्थिक व सामाजिक भेदभाव को आँकड़ों के साथ देश के सामने रखकर छह दशकों तक अलग राज्य की माँग को जीवित रखा।
जयशंकर जयंती पर 6 अगस्त को किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव, के. कविता समेत कांग्रेस, बीआरएस और BJP के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रमों में जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी उन्हें नमन किया।
तेलंगाना आंदोलन में जयशंकर की भूमिका क्या थी?
जयशंकर ने तेलंगाना क्षेत्र के साथ हुए अन्याय और भेदभाव को ठोस आँकड़ों के ज़रिए देश के सामने रखा और छह दशकों तक अलग राज्य की माँग को वैचारिक आधार दिया। उन्हें बीआरएस नेता केसीआर का वैचारिक गुरु भी माना जाता है।
जयशंकर के नाम पर कौन-सी संस्थाएँ हैं?
बीआरएस सरकार के कार्यकाल में तेलंगाना के भूपालपल्ली ज़िले और एग्रीकल्चर कॉलेज का नाम प्रोफेसर जयशंकर के नाम पर रखा गया था। यह उनकी सेवाओं के प्रति सरकारी सम्मान का प्रतीक था।
तेलंगाना रक्षा सेना ने जयंती पर क्या किया?
के. कविता के नेतृत्व में तेलंगाना रक्षा सेना ने हैदराबाद के सरूरनगर में एक जनसभा आयोजित की, जिसमें जयशंकर को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ सामाजिक न्याय की माँग भी उठाई गई।
राष्ट्र प्रेस
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