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क्या तेलुगु राज्यों में मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया?

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क्या तेलुगु राज्यों में मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया?

सारांश

तेलुगु राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मकर संक्रांति का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। रंग-बिरंगे पतंगों, मुर्गे की लड़ाई और पारंपरिक व्यंजनों ने इस उत्सव को और भी खास बना दिया। जानिए कैसे गांवों में रौनक लौट आई और लोग अपने प्रियजनों के साथ इस पर्व का आनंद ले रहे हैं।

मुख्य बातें

मकर संक्रांति का पर्व तेलुगु राज्यों में बड़े धूमधाम से मनाया गया।
गांवों में रंग-बिरंगे पतंगों की भरमार रही।
महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजन बनाए।
किसानों ने अपने बैलों को सजाया और उनकी पूजा की।
सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद मुर्गे की लड़ाई का आयोजन हुआ।

विजयवाड़ा, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के तेलुगु राज्यों में गुरुवार को रंग-बिरंगे फसल उत्सव मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया।

तीन दिवसीय उत्सव के दूसरे दिन, गुरुवार को दोनों राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सव का माहौल था। सजाए गए घर, पतंगबाजी, मुर्गे की लड़ाई, बैल की लड़ाई और अन्य खेलों का आयोजन किया गया।

दोनों राज्यों के गांवों में संक्रांति के दिन रौनक लौट आई।

घरों को गेंदे के फूलों और आम के पत्तों से सजाया गया था। महिलाओं ने अपने घरों के आंगन को रंगोली से सजाया। उन्होंने गोबर के गोले बनाकर रंगोली की आकृतियों के बीच रखे और चावल, हल्दी और गन्ने की ताजा फसल के टुकड़े भी सजाए।

घर की महिलाओं ने 'चक्कारा पोंगल' या चावल की खीर तैयार की, जो नए चावल, गुड़ और दूध से बनी एक विशेष डिश है।

किसानों ने अपने बैलों को सजाया और फसल में उनके योगदान के लिए उनकी पूजा की।

देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से भी लोग इस त्योहार में अपने प्रियजनों के साथ शामिल हुए।

हैदराबाद से लाखों लोग उत्सव मनाने के लिए आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अपने घरों की ओर रवाना हुए, जिससे शहर की सड़कें लगभग सुनसान हो गईं।

त्योहार की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने पिछले कुछ दिनों में हैदराबाद से दोनों राज्यों के विभिन्न गंतव्यों के लिए सैकड़ों विशेष बसें और ट्रेनें चलाईं।

हैदराबाद और दोनों राज्यों के अन्य शहरों में, आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भरा था। लोकप्रिय हिंदी और तेलुगु गानों की धुनें लाउडस्पीकरों पर गूंज रही थीं और युवा छतों से पतंग उड़ा रहे थे।

सरकारी प्रतिबंध के बावजूद कई स्थानों पर मुर्गे की लड़ाई का आयोजन किया गया।

तटीय आंध्र प्रदेश में कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर मुर्गे की लड़ाई आयोजित की गई, जहां सट्टेबाजों ने करोड़ों रुपये मुर्गों पर दांव लगाए।

विधायकों सहित राजनेताओं ने कुछ स्थानों पर मुर्गे की लड़ाई का उद्घाटन किया। उन्होंने दावा किया कि यह तेलुगु संस्कृति का हिस्सा है और मुर्गे की लड़ाई के बिना संक्रांति अधूरी है।

पुलिस ने कहा कि वे मुर्गे को चाकू बांधकर लड़ाई कराने वालों और सट्टेबाजी या अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना गलत नहीं होगा कि मकर संक्रांति का पर्व तेलुगु संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है। यह उत्सव न केवल कृषि पर निर्भरता का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रांति कब मनाई जाती है?
मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती है।
इस पर्व का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह पर्व फसल की कटाई और नए साल की शुरुआत का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है।
तेलुगु राज्यों में इस पर्व को कैसे मनाया जाता है?
तेलुगु राज्यों में इसे पतंगबाजी, मुर्गे की लड़ाई और पारंपरिक व्यंजनों के साथ मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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