23 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ट्रांसजेंडर पहचान पर डॉ. राजन सिंह का पलटवार: मांझी और राहुल गांधी दोनों को दिया जवाब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ट्रांसजेंडर पहचान पर डॉ. राजन सिंह का पलटवार: मांझी और राहुल गांधी दोनों को दिया जवाब

सारांश

डॉ. राजन सिंह ने स्पष्ट कर दिया — 'ट्रांसजेंडर' गाली नहीं, गर्व है। राहुल गांधी की कथित 'अंधभक्त' टिप्पणी और मंत्री मांझी की आपत्ति, दोनों का एक साथ जवाब देते हुए उन्होंने चुनावी फॉर्म-26 में लैंगिक पहचान दर्ज न होने की खामी उठाई और अदालत व चुनाव आयोग में संशोधन की अर्ज़ी देने की घोषणा की।

मुख्य बातें

राजन सिंह ने 23 सितंबर 2026 को कहा कि 'ट्रांसजेंडर' शब्द अपमानजनक नहीं, बल्कि एक सम्मानित पहचान है।
राहुल गांधी की कथित 'अंधभक्त' टिप्पणी पर पलटवार करते हुए पूछा — कांग्रेस सरकारों ने ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए क्या किया?
जीतन राम मांझी की आपत्ति के जवाब में कहा कि उन्होंने फॉर्म-26 में लैंगिक पहचान की अनुपस्थिति उजागर करने के लिए चिराग पासवान का नाम लिया था।
मुख्य न्यायाधीश की अदालत और निर्वाचन आयोग के समक्ष फॉर्म-26 में संशोधन के लिए आवेदन देने की तैयारी।
बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में भव्य मंदिर बनाए जाने की माँग दोहराई।

नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026 — ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता और बिहार सरकार के प्रतिनिधि डॉ. राजन सिंह ने मंगलवार को दो मोर्चों पर एक साथ जवाब दिया — पहला, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित टिप्पणी पर, और दूसरा, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की उस आपत्ति पर जो उन्होंने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को लेकर दिए गए डॉ. सिंह के बयान पर जताई थी। डॉ. सिंह ने स्पष्ट कहा कि 'ट्रांसजेंडर' शब्द कोई अभद्र या अपमानजनक शब्द नहीं, बल्कि एक सम्मानित और गर्व की पहचान है।

राहुल गांधी पर पलटवार

डॉ. राजन सिंह ने कहा कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने उनकी वीडियो चलाई और उन्हें कथित तौर पर 'अंधभक्त' कहा। इस पर पलटवार करते हुए डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी के दादा-दादी की सरकारों के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर क्या कदम उठाए गए थे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय को पर्याप्त अधिकार नहीं मिले। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं।

मांझी की आपत्ति पर स्पष्टीकरण

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान को लेकर दिए गए डॉ. सिंह के बयान पर आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में डॉ. सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं था, बल्कि वे चुनावी प्रक्रिया में लैंगिक पहचान की अनुपस्थिति की ओर ध्यान दिलाना चाहते थे।

उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के फॉर्म-26 में उम्मीदवारों की लैंगिक पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होती। इसी खामी को उजागर करने के लिए उन्होंने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी का नाम लिया था। उनका तर्क था कि जब दस्तावेज़ों में जेंडर की जानकारी ही अंकित नहीं होगी, तो मतदाताओं को उम्मीदवारों की पहचान कैसे ज्ञात होगी।

कानूनी कदम की तैयारी

डॉ. राजन सिंह ने जानकारी दी कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की अदालत में और निर्वाचन आयोग के समक्ष फॉर्म-26 में संशोधन के लिए आवेदन देने की तैयारी कर ली है। उनका कहना है कि यह सुधार ट्रांसजेंडर समुदाय की लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए अनिवार्य है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 में ही ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 'तीसरे लिंग' के रूप में मान्यता दी थी, फिर भी चुनावी दस्तावेज़ों में इसका समावेश अभी तक पूर्णतः नहीं हो पाया है।

जमुई घटना और जाति-लिंग की बहस

जमुई की एक घटना और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान पर भी डॉ. सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सरकार जहाँ जाति पहचान पर बात करती है, वहीं लैंगिक पहचान को भी उसी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

डॉ. सिंह का कहना है कि ट्रांसजेंडर समुदाय को लंबे समय से अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा है और सरकार को इस विषय पर संवाद करना चाहिए। उन्होंने बिहार में ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताते हुए उनके सम्मान में बिहार में एक भव्य मंदिर बनाए जाने की माँग भी दोहराई।

आगे की राह

डॉ. राजन सिंह का यह बयान ट्रांसजेंडर समुदाय की राजनीतिक दृश्यता और चुनावी प्रक्रिया में समावेश की माँग को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है। फॉर्म-26 संशोधन पर उनकी अदालती और आयोग-स्तरीय कार्रवाई इस मुद्दे को नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक ज़रूरी संस्थागत सवाल छिपा है — क्या भारत की चुनावी प्रक्रिया 2014 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी ट्रांसजेंडर नागरिकों को पूरी तरह समाहित कर पाई है? फॉर्म-26 की खामी कोई छोटी तकनीकी भूल नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व की एक बड़ी चूक है। मुख्यधारा की राजनीतिक बहस जहाँ जाति और धर्म पर केंद्रित रहती है, वहाँ ट्रांसजेंडर समुदाय की लोकतांत्रिक भागीदारी का सवाल अक्सर हाशिये पर चला जाता है। यह उचित समय है कि सभी दल इस मुद्दे को केवल प्रतिक्रिया में नहीं, बल्कि नीतिगत प्राथमिकता के रूप में देखें।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. राजन सिंह ने 'ट्रांसजेंडर' शब्द को लेकर क्या कहा?
डॉ. राजन सिंह ने कहा कि 'ट्रांसजेंडर' कोई गाली या अभद्र शब्द नहीं है, बल्कि यह एक सम्मानित पहचान है। उन्होंने कहा कि वे अपनी ट्रांसजेंडर पहचान पर गर्व करते हैं और इसे अपमान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
डॉ. राजन सिंह ने राहुल गांधी को क्यों जवाब दिया?
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कथित तौर पर डॉ. सिंह की वीडियो चलाई और उन्हें 'अंधभक्त' कहा। इसके जवाब में डॉ. सिंह ने सवाल किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए क्या कदम उठाए।
फॉर्म-26 में लैंगिक पहचान का मुद्दा क्या है?
चुनाव आयोग के फॉर्म-26 में उम्मीदवारों की लैंगिक पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होती। डॉ. राजन सिंह ने इसे लोकतांत्रिक खामी बताते हुए मुख्य न्यायाधीश की अदालत और निर्वाचन आयोग में संशोधन के लिए आवेदन देने की घोषणा की है।
जीतन राम मांझी को डॉ. राजन सिंह ने क्या जवाब दिया?
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान को लेकर डॉ. सिंह के बयान पर आपत्ति जताई थी। डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं था, बल्कि फॉर्म-26 में जेंडर की जानकारी न होने की व्यापक खामी उजागर करना था।
बिहार में ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर डॉ. राजन सिंह की क्या माँग है?
डॉ. राजन सिंह ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय को लंबे समय से अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा है और बिहार सरकार को इस मुद्दे पर संवाद करना चाहिए। उन्होंने बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में एक भव्य मंदिर बनाए जाने की भी माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले