ट्रांसजेंडर पहचान पर डॉ. राजन सिंह का पलटवार: मांझी और राहुल गांधी दोनों को दिया जवाब
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026 — ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता और बिहार सरकार के प्रतिनिधि डॉ. राजन सिंह ने मंगलवार को दो मोर्चों पर एक साथ जवाब दिया — पहला, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित टिप्पणी पर, और दूसरा, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की उस आपत्ति पर जो उन्होंने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को लेकर दिए गए डॉ. सिंह के बयान पर जताई थी। डॉ. सिंह ने स्पष्ट कहा कि 'ट्रांसजेंडर' शब्द कोई अभद्र या अपमानजनक शब्द नहीं, बल्कि एक सम्मानित और गर्व की पहचान है।
राहुल गांधी पर पलटवार
डॉ. राजन सिंह ने कहा कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने उनकी वीडियो चलाई और उन्हें कथित तौर पर 'अंधभक्त' कहा। इस पर पलटवार करते हुए डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी के दादा-दादी की सरकारों के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर क्या कदम उठाए गए थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय को पर्याप्त अधिकार नहीं मिले। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं।
मांझी की आपत्ति पर स्पष्टीकरण
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान को लेकर दिए गए डॉ. सिंह के बयान पर आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में डॉ. सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं था, बल्कि वे चुनावी प्रक्रिया में लैंगिक पहचान की अनुपस्थिति की ओर ध्यान दिलाना चाहते थे।
उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के फॉर्म-26 में उम्मीदवारों की लैंगिक पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होती। इसी खामी को उजागर करने के लिए उन्होंने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी का नाम लिया था। उनका तर्क था कि जब दस्तावेज़ों में जेंडर की जानकारी ही अंकित नहीं होगी, तो मतदाताओं को उम्मीदवारों की पहचान कैसे ज्ञात होगी।
कानूनी कदम की तैयारी
डॉ. राजन सिंह ने जानकारी दी कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की अदालत में और निर्वाचन आयोग के समक्ष फॉर्म-26 में संशोधन के लिए आवेदन देने की तैयारी कर ली है। उनका कहना है कि यह सुधार ट्रांसजेंडर समुदाय की लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए अनिवार्य है।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 में ही ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 'तीसरे लिंग' के रूप में मान्यता दी थी, फिर भी चुनावी दस्तावेज़ों में इसका समावेश अभी तक पूर्णतः नहीं हो पाया है।
जमुई घटना और जाति-लिंग की बहस
जमुई की एक घटना और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान पर भी डॉ. सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सरकार जहाँ जाति पहचान पर बात करती है, वहीं लैंगिक पहचान को भी उसी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
डॉ. सिंह का कहना है कि ट्रांसजेंडर समुदाय को लंबे समय से अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा है और सरकार को इस विषय पर संवाद करना चाहिए। उन्होंने बिहार में ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताते हुए उनके सम्मान में बिहार में एक भव्य मंदिर बनाए जाने की माँग भी दोहराई।
आगे की राह
डॉ. राजन सिंह का यह बयान ट्रांसजेंडर समुदाय की राजनीतिक दृश्यता और चुनावी प्रक्रिया में समावेश की माँग को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है। फॉर्म-26 संशोधन पर उनकी अदालती और आयोग-स्तरीय कार्रवाई इस मुद्दे को नई दिशा दे सकती है।