13 जुलाई 2026
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SMA टाइप-1 से पीड़ित 22 माह की मानस्री के लिए त्रिपुरा सरकार ने एम्स में इलाज की व्यवस्था की

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SMA टाइप-1 से पीड़ित 22 माह की मानस्री के लिए त्रिपुरा सरकार ने एम्स में इलाज की व्यवस्था की

सारांश

22 माह की मानस्री चौधरी SMA टाइप-1 जैसी जानलेवा दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा के निर्देश पर त्रिपुरा भवन ने एम्स में इलाज की व्यवस्था की। पूरे राज्य में राजनीतिक और सामाजिक एकजुटता की लहर है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 13 जुलाई 2026 को अधिकारियों को 22 माह की मानस्री चौधरी के इलाज के लिए हरसंभव मदद के निर्देश दिए।
बच्ची को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 है — यह दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का सबसे गंभीर रूप है।
त्रिपुरा भवन, नई दिल्ली ने एम्स के साथ समन्वय कर विशेषज्ञ चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की।
पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने प्रो.
शेफाली गुलाटी (चाइल्ड न्यूरोलॉजी डिवीजन, एम्स) की देखरेख में इलाज की पहल की।
नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी सहित विभिन्न दलों के नेता, NGO और आम नागरिक परिवार की आर्थिक मदद के लिए आगे आए।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 13 जुलाई 2026 को अधिकारियों को निर्देश दिया कि दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 से पीड़ित 22 माह की बच्ची मानस्री चौधरी के इलाज के लिए हरसंभव सहायता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश के तुरंत बाद नई दिल्ली स्थित त्रिपुरा भवन ने बच्ची को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में भर्ती कराने और विशेषज्ञ चिकित्सा व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाए।

मानस्री की स्थिति और बीमारी की गंभीरता

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मानस्री चौधरी अपने पिता ध्रुव चौधरी की इकलौती बेटी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, SMA टाइप-1 इस दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का सबसे गंभीर रूप है, जो शरीर की मांसपेशियों की शक्ति और गतिशीलता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इस स्थिति में तत्काल और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार अनिवार्य होता है।

यह बीमारी न केवल चिकित्सकीय दृष्टि से जटिल है, बल्कि इसका इलाज अत्यंत महंगा भी है — यही कारण है कि परिवार को व्यापक सामाजिक और राजनीतिक समर्थन मिल रहा है।

सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया

CMO के अनुसार, त्रिपुरा भवन की टीम ने एम्स, नई दिल्ली के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि मानस्री को बिना किसी प्रशासनिक बाधा के विशेषज्ञ चिकित्सकों से जाँच और आवश्यक उपचार मिल सके। त्रिपुरा भवन के रेजिडेंट कमिश्नर और अन्य अधिकारी लगातार स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और एम्स के डॉक्टरों तथा बच्ची के परिवार से निरंतर संपर्क में हैं।

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने एक बयान में कहा, 'हमारी प्राथमिकता है कि त्रिपुरा का कोई भी नागरिक गंभीर स्वास्थ्य संकट के समय खुद को असहाय महसूस न करे। राज्य सरकार नन्ही मानस्री के परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और एम्स में इलाज के दौरान हर तरह की प्रशासनिक और जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगी।'

राजनीतिक एकजुटता और सामाजिक समर्थन

इस मामले ने पूरे त्रिपुरा में व्यापक सहानुभूति और एकजुटता की लहर पैदा की है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठन, गैर-सरकारी संगठन (NGO) और आम नागरिक — सभी परिवार की आर्थिक सहायता के लिए आगे आए हैं।

नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री एवं लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देब सहित कई राजनीतिक नेताओं ने बच्ची और उसके परिवार की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया है। बिप्लब कुमार देब ने विशेष पहल करते हुए एम्स के बाल रोग विभाग के चाइल्ड न्यूरोलॉजी डिवीजन की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी की देखरेख में बच्ची का इलाज सुनिश्चित कराने की कोशिश की है।

SMA टाइप-1: क्या है यह बीमारी

विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है जिसमें रीढ़ की हड्डी की तंत्रिका कोशिकाएँ धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, जिससे मांसपेशियाँ कमज़ोर पड़ जाती हैं। यह बीमारी का सबसे गंभीर रूप है और शैशवावस्था में ही लक्षण प्रकट होते हैं।

गौरतलब है कि भारत में SMA जैसी दुर्लभ बीमारियों के इलाज की लागत करोड़ों रुपये तक पहुँच सकती है, जो अधिकांश परिवारों की पहुँच से बाहर होती है। यह मामला उन तमाम परिवारों की व्यथा को सामने लाता है जो दुर्लभ बीमारियों के लिए सरकारी सहायता और नीतिगत ढाँचे की माँग करते रहे हैं।

आगे की राह

त्रिपुरा भवन के अधिकारी मानस्री के परिवार के नई दिल्ली प्रवास के दौरान प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहायता जारी रखेंगे। एम्स में विशेषज्ञ टीम की देखरेख में इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है, और राज्य सरकार की सक्रिय भागीदारी इस मामले में एक मिसाल बन सकती है कि दुर्लभ बीमारियों के मामलों में राज्य तंत्र किस तरह त्वरित हस्तक्षेप कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह प्रतिक्रिया तब आई जब मामला सार्वजनिक हो गया — सवाल यह है कि बिना मीडिया दबाव के कितने ऐसे परिवार चुपचाप संघर्ष करते रहते हैं। भारत की दुर्लभ रोग नीति 2021 अभी भी वित्त पोषण और क्रियान्वयन के स्तर पर कमज़ोर है। इस एक बच्ची के लिए जुटी एकजुटता को नीतिगत सुधार की माँग में बदलना ज़रूरी है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानस्री चौधरी को कौन सी बीमारी है और यह कितनी गंभीर है?
मानस्री चौधरी को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 है, जो इस दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का सबसे गंभीर रूप है। यह बीमारी मांसपेशियों की शक्ति और गतिशीलता को प्रभावित करती है और शैशवावस्था में ही लक्षण प्रकट करती है, जिसके लिए तत्काल विशेषज्ञ उपचार आवश्यक है।
त्रिपुरा सरकार ने मानस्री के इलाज के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री माणिक साहा के निर्देश पर नई दिल्ली स्थित त्रिपुरा भवन ने एम्स के साथ समन्वय कर बच्ची को विशेषज्ञ चिकित्सकों से जाँच और इलाज दिलाने की व्यवस्था की है। त्रिपुरा भवन के रेजिडेंट कमिश्नर परिवार के पूरे प्रवास के दौरान सहायता सुनिश्चित कर रहे हैं।
एम्स में मानस्री का इलाज कौन से विशेषज्ञ करेंगे?
पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब की पहल पर एम्स, नई दिल्ली के बाल रोग विभाग के चाइल्ड न्यूरोलॉजी डिवीजन की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी की देखरेख में बच्ची का इलाज कराने की व्यवस्था की गई है।
मानस्री के इलाज के लिए किन-किन लोगों ने मदद की है?
नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देब सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठन, NGO और आम नागरिक परिवार की आर्थिक सहायता के लिए सामने आए हैं। SMA जैसी दुर्लभ बीमारी का इलाज अत्यंत महंगा होने के कारण यह सामूहिक समर्थन महत्वपूर्ण है।
SMA टाइप-1 का इलाज भारत में इतना कठिन क्यों है?
SMA टाइप-1 एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है जिसके उपचार की लागत भारत में करोड़ों रुपये तक हो सकती है, जो अधिकांश परिवारों की आर्थिक पहुँच से बाहर है। भारत की दुर्लभ रोग नीति 2021 के बावजूद वित्त पोषण और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सीमित बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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