होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप का बड़ा फैसला: ईरान समझौता होने तक अमेरिकी नियंत्रण जारी रहेगा
सारांश
Key Takeaways
- डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता होने तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण बना रहेगा।
- होर्मुज खुलने पर ईरान प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर कमा सकता है जिसे ट्रंप रोकना चाहते हैं।
- ट्रंप ने माना कि इस कदम से ईंधन कीमतों पर थोड़े समय के लिए असर पड़ सकता है।
- अमेरिका अभी अपने इतिहास में सर्वाधिक तेल और गैस उत्पादन कर रहा है जिससे वैश्विक बाजार अपेक्षाकृत स्थिर है।
- ट्रंप ने ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को भी इस दबाव का प्रमुख कारण बताया।
- 2018 में JCPOA से बाहर निकलने के बाद यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ईरान पर सबसे बड़ा रणनीतिक दबाव माना जा रहा है।
वाशिंगटन, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान परमाणु और सुरक्षा मुद्दों पर कोई ठोस समझौता नहीं करता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण बना रहेगा। यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। ट्रंप ने साफ कहा कि यह अहम समुद्री तेल मार्ग तब तक नहीं खुलेगा जब तक तेहरान सकारात्मक रुख नहीं अपनाता।
ट्रंप का सीधा संदेश
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस जलमार्ग पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और यह रास्ता तभी खुलेगा जब ईरान कोई समझौता करेगा या कोई सकारात्मक स्थिति बनेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यदि यह मार्ग खोल दिया जाए तो ईरान प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर की कमाई कर सकता है।
ट्रंप ने दो टूक कहा कि जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, वे नहीं चाहते कि ईरान इतना पैसा कमाए। यह बयान सीधे तौर पर आर्थिक दबाव की नीति को रेखांकित करता है जिसे अमेरिका वर्षों से ईरान के खिलाफ अपनाता आया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग है। यह संकरा जलमार्ग ओमान और ईरान के बीच स्थित है और खाड़ी के तेल उत्पादक देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।
वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इस रास्ते पर किसी भी तरह की रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें तेजी से उछल सकती हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
ईंधन कीमतों और आम जनता पर असर
ट्रंप ने स्वीकार किया कि इस कदम का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। ईंधन कीमतों को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि थोड़े समय के लिए असर होगा। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ा कि अमेरिकी बाजार फिलहाल स्थिर हैं।
ट्रंप ने बताया कि शेयर बाजार अपने उच्चतम स्तर पर है और उन्हें आशंका थी कि तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने इसका श्रेय अमेरिका के रिकॉर्ड तेल उत्पादन को दिया।
अमेरिका का रिकॉर्ड तेल उत्पादन
ट्रंप प्रशासन के अनुसार, अमेरिका इस समय अपने इतिहास में सर्वाधिक तेल और गैस उत्पादन कर रहा है। इसी कारण होर्मुज पर नियंत्रण के बावजूद वैश्विक बाजारों में उतनी उथल-पुथल नहीं आई जितनी आशंका थी।
ट्रंप ने बताया कि जब तक यह रास्ता बंद है, दुनिया भर से जहाज टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का आ रहे हैं ताकि अमेरिका से तेल ले सकें। यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका इस संकट को अपने ऊर्जा निर्यात के लिए एक अवसर के रूप में भी देख रहा है।
परमाणु हथियार और सुरक्षा चिंता
ट्रंप ने इस पूरे दबाव को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा से भी जोड़ा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकता। यह बयान संकेत देता है कि होर्मुज पर नियंत्रण केवल तेल व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
गौरतलब है कि 2018 में ट्रंप ने ही JCPOA यानी ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था और कड़े प्रतिबंध लगाए थे। अब उनके दूसरे कार्यकाल में यह दबाव और अधिक तीव्र हो गया है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि उन्हें इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं है और उनके पास काफी समय है, जिससे स्पष्ट है कि ईरान पर दबाव लंबे समय तक जारी रह सकता है।