तुर्की में लोकतंत्र 'बिना वापसी के मोड़' पर: अमेरिकी सांसदों की कड़ी चेतावनी, नाटो शिखर सम्मेलन से पहले बढ़ी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सांसदों और शीर्ष नीति विशेषज्ञों ने 6 जून 2026 को वॉशिंगटन में आयोजित एक महत्वपूर्ण संसदीय सुनवाई में चेतावनी दी कि तुर्की लोकतांत्रिक शासन से इतनी दूर जा चुका है कि वापसी की राह अत्यंत कठिन हो गई है। जुलाई में अंकारा में प्रस्तावित नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले यह सुनवाई राजनीतिक दमन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्रित रही।
सुनवाई में उठे मुख्य सवाल
टॉम लैंटोस मानवाधिकार आयोग की इस सुनवाई में दोनों प्रमुख अमेरिकी दलों के सांसदों ने सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सरकार सार्थक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की अनुमति देगी। आयोग के सह-अध्यक्ष प्रतिनिधि क्रिस्टोफर स्मिथ ने कहा, "आज की सुनवाई का शीर्षक एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। क्या तुर्की आजादी की राह खोज सकता है?"
स्मिथ ने तर्क दिया कि तुर्की में लोकतांत्रिक संस्थाएँ इतनी कमज़ोर हो चुकी हैं कि "नागरिक और राजनीतिक आज़ादी के सबसे बुनियादी पहलुओं — कानून का शासन, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकारों का सम्मान — को बहाल करना बहुत मुश्किल होगा।"
इमामोग्लू की गिरफ्तारी: एक निर्णायक मोड़
स्मिथ ने इस्तांबुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू की मार्च 2025 में हुई गिरफ्तारी को एक अहम मोड़ बताया। इमामोग्लू को एर्दोगन का सबसे मज़बूत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। स्मिथ ने कहा, "मार्च 2025 में उनकी गिरफ्तारी ठीक उसी दिन हुई जब उनकी पार्टी उन्हें अगले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित करने वाली थी।"
आयोग के दूसरे सह-अध्यक्ष प्रतिनिधि जेम्स मैकगवर्न ने कहा कि पिछली कांग्रेसी समीक्षाओं के बाद से स्थिति और बिगड़ी है। उन्होंने मानवाधिकार संगठनों की उन रिपोर्टों का हवाला दिया जिनमें विपक्षी समूहों और पत्रकारों पर बढ़ते दबाव का उल्लेख है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के स्कॉलर एंड्रयू ओ'डोनोह्यू ने सांसदों को बताया कि तुर्की 'प्रतिस्पर्धी अधिनायकवाद' — एक ऐसी व्यवस्था जिसमें चुनाव निष्पक्ष नहीं होते लेकिन विपक्ष फिर भी जीत सकता है — से आगे बढ़कर 'पूर्ण अधिनायकवाद' की ओर जा रहा है, जहाँ विपक्ष मतपेटी के ज़रिए सत्ता हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, "तुर्की आज एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है।"
काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एडजंक्ट सीनियर फेलो हेनरी बार्की ने कहा, "पिछले दशक में जो स्थिति सामने आई है, वह सिर्फ सैद्धांतिक तौर पर लोकतंत्र के कमज़ोर होने की बात नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्ति के शासन की व्यवस्था है — एक ऐसा शासन जो तेज़ी से एक ही व्यक्ति के राजनीतिक अस्तित्व, संस्थागत अधिकारों और व्यक्तिगत पसंद के इर्द-गिर्द केंद्रित होता जा रहा है।"
पूर्व राजनीतिक कैदी की भावुक गवाही
पूर्व राजनीतिक कैदी और अमेरिकी नागरिक सेरकान गोल्गे ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत आरोप लगने के बाद तुर्की की जेलों में बिताए लगभग तीन साल के अपने अनुभव के बारे में भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा, "मैं जेल से तो बच निकला, लेकिन जिंदा बच जाना ही न्याय नहीं है।"
गोल्गे ने जेल से रिहाई के बाद सीमा जाँच के दौरान अपने बेटे की गुहार को याद किया — "नहीं डैड, फिर से नहीं, फिर से नहीं।" उन्होंने वॉशिंगटन से अपील की कि वह अंकारा पर यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स के फैसलों का पालन करने के लिए दबाव डाले।
नाटो शिखर सम्मेलन और आगे की राह
सुनवाई में गवाहों ने ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया कि वे जुलाई में अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को सीधे एर्दोगन के सामने उठाएँ। ओ'डोनोह्यू ने कहा, "तुर्की सरकार अमेरिका के साथ सहयोग करना चाहती है। एक लोकतंत्र के तौर पर हमारे पास यह क्षमता है कि हम इस द्विपक्षीय सहयोग को इस शर्त से जोड़ें कि तुर्की सरकार मानवाधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में ज़्यादा कदम उठाए।" यह सुनवाई उस समय हुई है जब नाटो के भीतर तुर्की की भूमिका और उसकी आंतरिक राजनीतिक दिशा को लेकर पश्चिमी देशों में चिंताएँ लगातार गहरी होती जा रही हैं।