17 अगस्त 2026
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उज्जैन नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर भगदड़, हरसिद्धि मंदिर के बैरिकेट्स टूटे; कई श्रद्धालु घायल

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उज्जैन नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर भगदड़, हरसिद्धि मंदिर के बैरिकेट्स टूटे; कई श्रद्धालु घायल

सारांश

नागपंचमी पर साल में एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर और सावन सोमवार के दुर्लभ संयोग ने उज्जैन में अभूतपूर्व भीड़ बुला ली — और हरसिद्धि मंदिर के बैरिकेट्स टूटने के बाद भगदड़ में कई श्रद्धालु घायल हो गए।

मुख्य बातें

17 अगस्त 2026 को उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर भगदड़ की स्थिति बनी।
हरसिद्धि मंदिर के बाहर लगे बैरिकेट्स भीड़ के दबाव में टूट गए, श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिरे।
कई घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया; घायलों की आधिकारिक संख्या अभी अपुष्ट।
नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट रविवार रात 12 बजे खुले और सोमवार रात 12 बजे तक खुले रहने थे।
इस वर्ष सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के संयोग से महाकालेश्वर मंदिर में भी असाधारण भीड़ उमड़ी।

उज्जैन के प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर वार्षिक कपाट खुलने और सावन के तीसरे सोमवार के संयोग से उमड़ी भारी भीड़ के बीच 17 अगस्त 2026 को भगदड़ की स्थिति बन गई, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हो गए। हरसिद्धि मंदिर के समीप लगे बैरिकेट्स पर भीड़ का दबाव बेकाबू होने के बाद श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिर पड़े और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार रात 12 बजे नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलते ही दर्शनार्थियों का तांता लग गया। यह मंदिर साल में केवल एक बार — नागपंचमी के अवसर पर — आम श्रद्धालुओं के लिए खुलता है, जिसके कारण हर वर्ष यहाँ असाधारण भीड़ जुटती है। इस बार सावन के तीसरे सोमवार का संयोग भी एक साथ होने से उज्जैन की हर प्रमुख सड़क पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।

दर्शन का यह क्रम सोमवार रात 12 बजे तक जारी रहना था। इसी दौरान हरसिद्धि मंदिर के बाहर बैरिकेट्स पर भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने से रोका गया, तो पीछे खड़ी भीड़ आगे की ओर धकेलती रही, जिससे बैरिकेट्स टूट गए।

भगदड़ में क्या हुआ

बैरिकेट्स टूटते ही श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिर पड़े। एक घायल के परिजन ने बताया कि वे रात 12 बजे से ही कतार में खड़े थे, लेकिन अचानक भीड़ को रोके जाने के बाद पीछे से धक्का-मुक्की शुरू हो गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए। इस भगदड़ में कई लोगों को चोटें आईं, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया।

गौरतलब है कि नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकालेश्वर मंदिर परिसर के भीतर ही स्थित है और नागपंचमी पर यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस बार सावन सोमवार के कारण महाकालेश्वर मंदिर में भी भारी भीड़ थी, जिससे पूरे शहर में यातायात और भीड़ प्रबंधन की चुनौती और बढ़ गई।

आम जनता पर असर

उज्जैन की प्रमुख सड़कों पर मेले जैसा माहौल होने से स्थानीय निवासियों को भी आवागमन में कठिनाई हुई। घायल श्रद्धालुओं के परिजनों में दहशत का माहौल रहा। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

क्या होगा आगे

दर्शन का क्रम निर्धारित समय सोमवार रात 12 बजे तक जारी रहने की संभावना है। प्रशासन को भीड़ नियंत्रण के उपाय और सख्त करने की आवश्यकता होगी ताकि शेष अवधि में कोई और अनहोनी न हो। घायलों की स्थिति और उनकी संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी प्रतीक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी बैरिकेट्स टूटने की नौबत आई। सावन सोमवार और नागपंचमी का एक साथ पड़ना प्रशासन के लिए पूर्वानुमेय था, फिर भी भीड़ प्रबंधन की तैयारी अपर्याप्त दिखी। भारत में बड़े धार्मिक आयोजनों में भगदड़ की यह लंबी कड़ी में एक और कड़ी है — सवाल यह है कि 'एकल-दिवस कपाट' वाले मंदिरों के लिए विशेष भीड़ प्रोटोकॉल कब बनेगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगदड़ कब और कैसे हुई?
17 अगस्त 2026 को नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलने और सावन के तीसरे सोमवार के संयोग से उमड़ी भारी भीड़ के बीच हरसिद्धि मंदिर के बाहर बैरिकेट्स टूट गए। श्रद्धालुओं को कुछ समय के लिए रोके जाने पर पीछे से धक्का-मुक्की हुई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े।
नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में कितनी बार खुलता है?
नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में केवल एक बार — नागपंचमी के अवसर पर — आम श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। कपाट नागपंचमी की रात 12 बजे खुलते हैं और अगली रात 12 बजे बंद होते हैं, जिससे हर वर्ष यहाँ अत्यधिक भीड़ उमड़ती है।
भगदड़ में कितने लोग घायल हुए?
रिपोर्टों के अनुसार कई श्रद्धालु घायल हुए और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घायलों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
इस बार उज्जैन में इतनी भीड़ क्यों थी?
इस वर्ष नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग एक साथ पड़ा, जिससे नागचंद्रेश्वर मंदिर के साथ-साथ महाकालेश्वर मंदिर में भी असाधारण भीड़ उमड़ी। उज्जैन की हर प्रमुख सड़क पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।
भगदड़ के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। दर्शन का क्रम सोमवार रात 12 बजे तक जारी रहने की संभावना है और प्रशासन को शेष अवधि में भीड़ नियंत्रण के उपाय सख्त करने की आवश्यकता होगी। आधिकारिक बयान अभी प्रतीक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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