नाग पंचमी पर उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुले, देशभर से उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट 17 अगस्त 2025 को नाग पंचमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। यह मंदिर वर्षभर में केवल एक बार — नाग पंचमी के दिन — 24 घंटे के लिए खुलता है, जिससे देशभर के लाखों भक्त यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। सावन के सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग इस वर्ष उत्सव को और अधिक विशेष बना रहा है।
मध्यरात्रि में खुले मंदिर के कपाट
परंपरा के अनुसार रविवार की रात 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज ने विधि-विधान के साथ मंदिर के द्वार खोले। इसके पश्चात् नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजन-अर्चन कर त्रिकाल पूजा का शुभारंभ किया गया। महाकाल मंदिर के तीसरे खंड पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपरा और दुर्लभ मूर्तिकला के लिए जाना जाता है।
मंदिर की दुर्लभ प्रतिमा और धार्मिक महत्व
नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित प्रतिमा को लगभग 11वीं शताब्दी अर्थात् 1050 ईस्वी का माना जाता है। इस अद्वितीय प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले नाग के छत्र के नीचे विराजमान हैं। शिवजी के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हुए हैं, तथा साथ में भगवान गणेश, नंदी और सिंह की आकृतियाँ भी उकेरी गई हैं। यह शिल्पकला इसे देश की विरलतम प्रतिमाओं में से एक बनाती है।
मान्यता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव से एकांत और निर्बाध साधना की इच्छा प्रकट की थी। इसी पौराणिक आस्था के कारण मंदिर के कपाट 364 दिन बंद रखने की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था
कपाट खुलते ही हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े और मंदिर परिसर के बाहर लंबी कतारें लग गईं। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा देशभर से भक्त उज्जैन पहुँचे हैं। प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं ताकि दर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
गौरतलब है कि इस वर्ष सावन का सोमवार और नाग पंचमी एक साथ पड़ने से भक्तों में उत्साह दोगुना है — एक ही दिन शिवजी और नाग देवता दोनों की आराधना का अवसर मिल रहा है।
मध्य प्रदेश में नाग पंचमी का उत्सव
मध्य प्रदेश के तमाम देवालयों में सुबह से ही अनुष्ठानों का दौर जारी है। श्रद्धालु 'बम भोले' के जयघोष के साथ पूजा-अर्चना में जुटे हैं। भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजन का आयोजन किया गया है। नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट सोमवार रात को पुनः बंद कर दिए जाएँगे और अगले वर्ष नाग पंचमी तक यह मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा।