17 अगस्त 2026
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नाग पंचमी पर उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुले, देशभर से उमड़े श्रद्धालु

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नाग पंचमी पर उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुले, देशभर से उमड़े श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ एक बार — नाग पंचमी पर — 24 घंटे के लिए खुलता है। इस वर्ष सावन सोमवार और नाग पंचमी के दुर्लभ संयोग ने श्रद्धालुओं की भीड़ को दोगुना कर दिया। 11वीं सदी की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन के लिए देशभर से भक्त उज्जैन पहुँचे हैं।

मुख्य बातें

नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन के कपाट 17 अगस्त 2025 को नाग पंचमी पर 24 घंटे के लिए खोले गए।
मंदिर वर्षभर में केवल एक बार खुलता है — शेष 364 दिन कपाट बंद रहते हैं।
रविवार रात 12 बजे महंत विनीत गिरि महाराज ने विधि-विधान से कपाट खोले और त्रिकाल पूजा आरंभ हुई।
मंदिर में स्थापित प्रतिमा लगभग 1050 ईस्वी (11वीं शताब्दी) की मानी जाती है, जिसमें सात फनों वाले नाग के नीचे शिव-पार्वती विराजमान हैं।
इस वर्ष सावन सोमवार और नाग पंचमी के संयोग से श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि; प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए।

उज्जैन के प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट 17 अगस्त 2025 को नाग पंचमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। यह मंदिर वर्षभर में केवल एक बार — नाग पंचमी के दिन — 24 घंटे के लिए खुलता है, जिससे देशभर के लाखों भक्त यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। सावन के सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग इस वर्ष उत्सव को और अधिक विशेष बना रहा है।

मध्यरात्रि में खुले मंदिर के कपाट

परंपरा के अनुसार रविवार की रात 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज ने विधि-विधान के साथ मंदिर के द्वार खोले। इसके पश्चात् नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजन-अर्चन कर त्रिकाल पूजा का शुभारंभ किया गया। महाकाल मंदिर के तीसरे खंड पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपरा और दुर्लभ मूर्तिकला के लिए जाना जाता है।

मंदिर की दुर्लभ प्रतिमा और धार्मिक महत्व

नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित प्रतिमा को लगभग 11वीं शताब्दी अर्थात् 1050 ईस्वी का माना जाता है। इस अद्वितीय प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले नाग के छत्र के नीचे विराजमान हैं। शिवजी के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हुए हैं, तथा साथ में भगवान गणेश, नंदी और सिंह की आकृतियाँ भी उकेरी गई हैं। यह शिल्पकला इसे देश की विरलतम प्रतिमाओं में से एक बनाती है।

मान्यता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव से एकांत और निर्बाध साधना की इच्छा प्रकट की थी। इसी पौराणिक आस्था के कारण मंदिर के कपाट 364 दिन बंद रखने की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था

कपाट खुलते ही हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े और मंदिर परिसर के बाहर लंबी कतारें लग गईं। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा देशभर से भक्त उज्जैन पहुँचे हैं। प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं ताकि दर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

गौरतलब है कि इस वर्ष सावन का सोमवार और नाग पंचमी एक साथ पड़ने से भक्तों में उत्साह दोगुना है — एक ही दिन शिवजी और नाग देवता दोनों की आराधना का अवसर मिल रहा है।

मध्य प्रदेश में नाग पंचमी का उत्सव

मध्य प्रदेश के तमाम देवालयों में सुबह से ही अनुष्ठानों का दौर जारी है। श्रद्धालु 'बम भोले' के जयघोष के साथ पूजा-अर्चना में जुटे हैं। भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजन का आयोजन किया गया है। नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट सोमवार रात को पुनः बंद कर दिए जाएँगे और अगले वर्ष नाग पंचमी तक यह मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

24 घंटे की खिड़की में लाखों भक्तों का प्रबंधन प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मंदिर की पवित्र परंपरा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के बीच दीर्घकालिक संतुलन के लिए कोई ठोस योजना है। 11वीं सदी की इस अमूल्य प्रतिमा का संरक्षण भी उतना ही ज़रूरी है जितना उसके दर्शन।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन साल में कितनी बार खुलता है?
नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्ष में केवल एक बार — नाग पंचमी के दिन — 24 घंटे के लिए खुलता है। शेष 364 दिन इसके कपाट बंद रहते हैं।
नागचंद्रेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के तीसरे खंड पर स्थित है। यह मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट बंद रखने की परंपरा क्यों है?
मान्यता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव से एकांत और निर्बाध साधना की इच्छा जताई थी। इसी पौराणिक आस्था के आधार पर मंदिर के कपाट वर्षभर बंद रखने की परंपरा चली आ रही है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर की प्रतिमा कितनी पुरानी है और इसमें क्या खास है?
मंदिर की प्रतिमा लगभग 11वीं शताब्दी अर्थात् 1050 ईस्वी की मानी जाती है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले नाग के छत्र के नीचे विराजमान हैं और शिवजी के गले व भुजाओं में नाग लिपटे हुए हैं — यह शिल्पकला इसे देश की विरलतम प्रतिमाओं में से एक बनाती है।
2025 में नाग पंचमी पर उज्जैन में दर्शन के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
17 अगस्त 2025 को नाग पंचमी पर मंदिर के कपाट रात 12 बजे से खोले गए हैं। प्रशासन ने हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं ताकि दर्शन में कोई असुविधा न हो।
राष्ट्र प्रेस
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