17 अगस्त 2026
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नाग पंचमी पर नागचंद्रेश्वर के कपाट खुले, उज्जैन में रात 2:30 बजे से महाकाल दर्शन; उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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नाग पंचमी पर नागचंद्रेश्वर के कपाट खुले, उज्जैन में रात 2:30 बजे से महाकाल दर्शन; उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

सारांश

साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के कपाट नाग पंचमी पर आधी रात को खुले। सावन के तीसरे सोमवार के संगम ने उज्जैन को भक्तिमय बना दिया — 24 घंटे अनवरत चलेंगे दुर्लभ दर्शन।

मुख्य बातें

17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट भोर में 2:30 बजे खोले गए; 3 बजे विशेष भस्म आरती हुई।
भगवान नागचंद्रेश्वर के कपाट आधी रात को खुले — यह दर्शन वर्ष में केवल एक बार, 24 घंटे के लिए उपलब्ध होते हैं।
महानिर्वाणी अखाड़े ने बाबा को भस्म अर्पित की; बाबा महाकाल को चाँदी का मुकुट पहनाया गया।
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने श्रद्धालुओं से प्रशासनिक व्यवस्थाओं का पालन करने की अपील की।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के पावन संगम पर भक्तों की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के कपाट भोर में 2:30 बजे खोले गए और ठीक 3 बजे बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती संपन्न हुई। भव्य पंचामृत अभिषेक के पश्चात बाबा का दिव्य शृंगार किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों के उद्घोष के बीच महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म अर्पित की गई और बाबा महाकाल को चाँदी का मुकुट भी पहनाया गया।

नागचंद्रेश्वर के दुर्लभ दर्शन

श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य शिखर पर विराजमान भगवान नागचंद्रेश्वर महादेव के दिव्य कपाट परंपरा के अनुसार आधी रात को खोले गए। यह वर्ष में केवल एक बार — नाग पंचमी के अवसर पर — होने वाले दुर्लभ दर्शन हैं। यह दर्शन-क्रम 24 घंटे तक अनवरत जारी रहेगा, जिससे देशभर से आए श्रद्धालु प्रभु के इस विरल स्वरूप के दर्शन कर सकें। गौरतलब है कि इस अवसर की प्रतीक्षा भक्त पूरे वर्ष करते हैं।

प्रशासन की व्यवस्था और कलेक्टर की अपील

उज्जैन के कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा, 'आज नाग पंचमी का पर्व है। भक्त साल भर में केवल 24 घंटे ही भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकते हैं। रीति-रिवाजों के अनुसार मंदिर के कपाट खोले गए हैं और भक्तों ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी है।' उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं का अनुशासनपूर्वक पालन करें।

आम जनता पर असर

सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के एक साथ पड़ने से इस वर्ष का संगम विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के विभिन्न कोनों से उज्जैन पहुँचे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह में महाकालेश्वर मंदिर में वैसे भी दर्शनार्थियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। आने वाले घंटों में भीड़ और बढ़ने की संभावना है, और प्रशासन ने सुचारु दर्शन व्यवस्था के लिए पर्याप्त बंदोबस्त किए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो प्रशासन के लिए सुरक्षा और सुचारु दर्शन-व्यवस्था की दृष्टि से एक बड़ी परीक्षा भी है। कलेक्टर की अपील सही दिशा में है, लेकिन असली जवाबदेही इस बात में है कि भीड़ प्रबंधन के ठोस इंतज़ाम ज़मीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन साल में कब होते हैं?
भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन वर्ष में केवल एक बार नाग पंचमी के अवसर पर होते हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य शिखर पर स्थित इनके कपाट आधी रात को खुलते हैं और 24 घंटे तक दर्शन का क्रम जारी रहता है।
17 अगस्त 2026 को महाकालेश्वर मंदिर के कपाट कितने बजे खुले?
17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट भोर में 2:30 बजे खोले गए। इसके बाद सुबह 3 बजे बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती संपन्न हुई।
नाग पंचमी पर उज्जैन में क्या विशेष आयोजन हुए?
नाग पंचमी पर महाकालेश्वर मंदिर में भव्य पंचामृत अभिषेक, भस्म आरती और बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े ने भस्म अर्पित की और बाबा को चाँदी का मुकुट पहनाया गया।
उज्जैन प्रशासन ने श्रद्धालुओं से क्या अपील की?
उज्जैन के कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया कि वे प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं का अनुशासनपूर्वक पालन करें, ताकि सभी भक्त सुरक्षित और सुचारु रूप से दर्शन कर सकें।
इस वर्ष नाग पंचमी का संगम विशेष क्यों माना जा रहा है?
इस वर्ष नाग पंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन पड़े हैं, जिससे यह अवसर धार्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हो गया है। इस संगम के कारण देशभर से श्रद्धालुओं की असाधारण भीड़ उज्जैन पहुँची।
राष्ट्र प्रेस
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