महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन: ज्येष्ठ शुक्ल नवमी पर भक्तों का सैलाब, भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक से गूंजा परिसर
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार, 25 मई 2026 को ज्येष्ठ माह की शुक्ल नवमी तिथि पर देश-विदेश से आए हज़ारों शिवभक्तों की अपार भीड़ उमड़ी। तड़के से ही मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।
रात से ही कतारों में खड़े रहे श्रद्धालु
सोमवार को भगवान शिव का विशेष दिन माना जाता है, जिसके चलते रविवार देर रात से ही श्रद्धालुओं ने कतारों में लगना शुरू कर दिया। रातभर प्रतीक्षा करने के बाद भी भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। हर श्रद्धालु बाबा महाकाल की एक झलक पाने को आतुर था। यह ऐसे समय में आया है जब ज्येष्ठ माह के सोमवार को मंदिर में विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है।
वीरभद्र की आज्ञा के बाद खुले कपाट
मंदिर की परंपरा के अनुसार वीरभद्र से आज्ञा लेने के पश्चात मंदिर के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही पूरा परिसर घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से भर उठा। भक्तों का उत्साह और श्रद्धा दर्शनीय थी।
पंचामृत अभिषेक और भव्य शृंगार
इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया और तत्पश्चात पंचामृत स्नान कराया गया। पंचामृत स्नान के उपरांत बाबा महाकाल का अत्यंत मनमोहक और अलौकिक शृंगार किया गया। सोमवार को विशेष रूप से बाबा का भांग, चंदन और सूखे मेवों से शृंगार किया गया।
भस्म आरती — धार्मिक महत्व और पौराणिक परंपरा
शृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा बाबा को भस्म अर्पित की गई और भव्य आरती उतारी गई। मान्यता है कि इस भस्म आरती के समय भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल जैसे पवित्र वृक्षों की लकड़ियों की राख का उपयोग किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, दूषण नामक राक्षस का संहार करने के बाद भगवान शिव ने उसकी राख से अपना शृंगार किया था — तभी से यह परंपरा अनवरत चली आ रही है। गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश के सबसे दुर्लभ और विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठानों में गिनी जाती है।
आस्था का केंद्र बना महाकाल का दरबार
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे दक्षिणमुखी शिवलिंग के रूप में विशेष दर्जा प्राप्त है। ज्येष्ठ माह के प्रत्येक सोमवार को यहाँ विशेष पूजन का आयोजन होता है, जो देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। आने वाले दिनों में ज्येष्ठ माह के शेष सोमवारों पर भी इसी प्रकार की भव्य पूजन परंपरा जारी रहने की संभावना है।