महाकाल भस्म आरती में बिहार मंत्री अशोक चौधरी और सांसद शांभवी चौधरी, सावन में उमड़ी भक्तों की भीड़
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में 2 अगस्त, रविवार को सावन माह की भस्म आरती में बिहार सरकार के मंत्री एवं जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय महासचिव अशोक कुमार चौधरी और उनकी पुत्री व सांसद शांभवी चौधरी ने भाग लिया। दोनों ने भगवान महाकाल का दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की।
मंत्री अशोक चौधरी की आस्था और 25 वर्षों की परंपरा
मीडिया से बातचीत में अशोक कुमार चौधरी ने कहा, 'मैं करीब पिछले 25 साल से नियमित रूप से महाकालेश्वर मंदिर आ रहा हूं। सावन के महीने में तो मैं जरूर आता हूं, लेकिन साल में तीन से चार बार अन्य समय पर भी दर्शन के लिए आता हूं। महाकाल के प्रति आस्था है, भक्ति है।' यह उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक है, जिसे वे दशकों से निभाते आ रहे हैं।
भस्म आरती का दिव्य आयोजन
रविवार तड़के सुबह 3 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलते ही 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ और इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।
अभिषेक के उपरांत भगवान महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू के साथ भांग अर्पित कर विशेष श्रृंगार किया गया। दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही भक्तों को बाबा के दर्शन हुए, वातावरण भक्तिमय हो उठा।
सावन में श्रद्धालुओं की असाधारण भीड़
सावन माह में महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन को विशेष पुण्यकारी माना जाता है, यही कारण है कि इस दिन श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रही। देशभर से भक्त उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने के लिए उमड़ पड़े। श्रावण मास के दौरान मंदिर के आसपास का समूचा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहता है।
महाकालेश्वर की धार्मिक महत्ता
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे दक्षिणमुखी शिवलिंग के रूप में विशेष दर्जा प्राप्त है। यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह में देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं, और सांसद व मंत्री-स्तरीय हस्तियों की उपस्थिति इस तीर्थस्थल की राष्ट्रीय महत्ता को रेखांकित करती है।