9 अक्टूबर 2026
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यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 3,80,290 आंगनबाड़ी कर्मियों को अब मिलेंगी सालाना तीन साड़ियाँ

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यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 3,80,290 आंगनबाड़ी कर्मियों को अब मिलेंगी सालाना तीन साड़ियाँ

सारांश

योगी सरकार ने प्रदेश की 3,80,290 आंगनबाड़ी कर्मियों को सालाना एक अतिरिक्त साड़ी देने का फैसला किया है — तीसरी साड़ी का पूरा खर्च ₹19.02 करोड़ राज्य उठाएगा। छोटा कदम, लेकिन उन लाखों महिला कर्मियों के लिए व्यावहारिक राहत जो हर रोज़ बच्चों और माताओं की सेवा में जुटी हैं।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 9 अक्टूबर 2026 की कैबिनेट बैठक में आंगनबाड़ी कर्मियों को तीसरी साड़ी देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
प्रदेश की 3,80,290 कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अब हर साल तीन साड़ियाँ मिलेंगी — पहले दो मिलती थीं।
तीसरी साड़ी पर ₹500 प्रति साड़ी की दर से कुल ₹19.02 करोड़ का खर्च पूरी तरह राज्य सरकार वहन करेगी।
पहले दो साड़ियाँ केंद्र-राज्य की 60:40 वित्तीय भागीदारी से दी जाती थीं।
प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं, प्रत्येक में एक कार्यकर्ता और एक सहायिका।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 अक्टूबर 2026 को प्रदेश की 3,80,290 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हर साल एक अतिरिक्त साड़ी देने का निर्णय लिया, जिससे अब उन्हें वार्षिक रूप से तीन साड़ियाँ मिलेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस निर्णय पर राज्य सरकार लगभग ₹19.02 करोड़ खर्च करेगी।

मुख्य घटनाक्रम

कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। प्रत्येक केंद्र के लिए एक कार्यकर्ता और एक सहायिका का पद स्वीकृत है, जिससे कुल स्वीकृत पदों की संख्या 3,80,290 है। इन सभी को एक-एक अतिरिक्त साड़ी दिए जाने का निर्णय लिया गया है।

वित्तीय व्यवस्था

वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 की वित्तीय भागीदारी के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिवर्ष दो साड़ियाँ उपलब्ध कराई जाती हैं। तीसरी साड़ी का खर्च पूरी तरह राज्य सरकार वहन करेगी। प्रति साड़ी ₹500 निर्धारित किए गए हैं और कुल अनुमानित व्यय ₹19,01,45,000 रहेगा।

फैसले की वजह

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा में काम करना अनिवार्य है। नियमित उपयोग, धुलाई, प्रतिकूल मौसम और साड़ी के अचानक खराब होने की परिस्थितियों को देखते हुए एक अतिरिक्त साड़ी देने का यह फैसला किया गया है। गौरतलब है कि ये कर्मी ज़मीनी स्तर पर बच्चों और महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रीढ़ हैं।

आम जनता पर असर

प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। इन सेवाओं के सुचारु संचालन में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की केंद्रीय भूमिका है। यह निर्णय उनके कार्य की गरिमा और व्यावहारिक आवश्यकताओं को मान्यता देता है।

क्या होगा आगे

यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है और अगले वित्त वर्ष के बजट प्रावधान में इसे शामिल किए जाने की उम्मीद है। आंगनबाड़ी कर्मियों के संगठनों ने इस कदम का स्वागत करते हुए मानदेय वृद्धि जैसी अन्य माँगों को भी पूरा करने की अपील की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उन 3,80,290 महिला कर्मियों की व्यावहारिक वास्तविकता को स्वीकार करने का संकेत है जो भारत की सबसे बड़ी बाल पोषण प्रणाली को ज़मीन पर चलाती हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ₹500 प्रति साड़ी की दर मौजूदा बाज़ार भाव से कम है और मानदेय वृद्धि जैसी बुनियादी माँगें अभी भी अधूरी हैं। यह कदम कल्याणकारी राजनीति की उस परंपरा का हिस्सा है जो चुनावी नज़रिए से प्रतीकात्मक लाभ देती है — असली सवाल यह है कि क्या इन कर्मियों की सेवा शर्तों में ढाँचागत सुधार की दिशा में भी सोचा जाएगा।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी सरकार का आंगनबाड़ी कर्मियों को तीन साड़ियाँ देने का फैसला क्या है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 अक्टूबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हर साल एक अतिरिक्त साड़ी देने का निर्णय लिया है, जिससे वार्षिक साड़ियों की संख्या दो से बढ़कर तीन हो जाएगी। इस पर राज्य सरकार ₹19.02 करोड़ खर्च करेगी।
इस फैसले से कितनी आंगनबाड़ी कर्मियों को फायदा होगा?
प्रदेश की कुल 3,80,290 कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को इस निर्णय का लाभ मिलेगा। यह संख्या 1,90,145 स्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक-एक कार्यकर्ता और एक-एक सहायिका के पद पर आधारित है।
तीसरी साड़ी का खर्च कौन उठाएगा?
तीसरी साड़ी का पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार अपने स्तर पर वहन करेगी। पहले दी जाने वाली दो साड़ियाँ केंद्र और राज्य की 60:40 की साझा वित्तीय व्यवस्था के तहत दी जाती थीं। प्रति साड़ी ₹500 निर्धारित किए गए हैं।
आंगनबाड़ी कर्मियों को वर्दी में काम करना क्यों जरूरी है?
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को कार्यस्थल पर निर्धारित वेशभूषा में उपस्थित रहना अनिवार्य है। नियमित उपयोग, धुलाई, प्रतिकूल मौसम और अप्रत्याशित परिस्थितियों में साड़ी खराब होने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त साड़ी देने का यह फैसला उचित माना गया।
आंगनबाड़ी केंद्रों से किन लाभार्थियों को सेवाएँ मिलती हैं?
प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को अनुपूरक पुष्टाहार एवं पोषण सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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