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योगी सरकार का दिवाली तोहफा: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से ₹12,000, सहायिकाओं को ₹6,000

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योगी सरकार का दिवाली तोहफा: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से ₹12,000, सहायिकाओं को ₹6,000

सारांश

दिवाली से ठीक पहले योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश की लगभग साढ़े तीन लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बड़ा तोहफा दिया — मानदेय में चार गुना तक की संचयी वृद्धि, ₹5 लाख कैशलेस स्वास्थ्य कवर और तकनीकी सशक्तीकरण। यह कदम उन महिलाओं के लिए राहत की खबर है जो वर्षों से कम वेतन पर बाल पोषण व्यवस्था की रीढ़ बनी हुई हैं।

मुख्य बातें

योगी सरकार ने 2 नवंबर 2026 को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से बढ़ाकर ₹12,000 और सहायिकाओं का ₹4,000 से ₹6,000 प्रतिमाह किया।
2017 की तुलना में दोनों श्रेणियों में चार गुना मानदेय वृद्धि हो चुकी है।
3.35 लाख कर्मियों और उनके परिवारों को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई है।
दो के स्थान पर तीन साड़ियाँ देने की व्यवस्था; इस पर सरकार ₹20 करोड़ खर्च करेगी।
पहले चरण में 1,23,398 और बाद में 69,803 स्मार्टफोन वितरित कर डिजिटल रिकॉर्डिंग को सुगम बनाया गया।
1,75,982 कार्यकर्ता और 1,70,656 सहायिकाएं इन सुविधाओं की लाभार्थी होंगी।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2 नवंबर 2026 को दिवाली से पहले राज्य की 1,75,982 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 1,70,656 सहायिकाओं के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया। कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय ₹8,000 से बढ़ाकर ₹12,000 और सहायिकाओं का ₹4,000 से बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया गया है। इसके साथ ही परिवार को ₹5 लाख तक कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं।

मानदेय में कितनी हुई वृद्धि

इस बढ़ोतरी के बाद कार्यकर्ताओं को हर माह ₹4,000 अतिरिक्त और सहायिकाओं को ₹2,000 अतिरिक्त मिलेंगे। गौरतलब है कि 2017 में जब योगी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब कार्यकर्ताओं को मात्र ₹3,000 और सहायिकाओं को ₹1,500 प्रतिमाह मानदेय मिलता था। नवीनतम संशोधन के बाद दोनों श्रेणियों में शुरुआती मानदेय की तुलना में चार गुना वृद्धि हो चुकी है।

स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य सुविधाएं

मानदेय के अलावा योगी सरकार ने करीब 3.35 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और उनके परिवार के सदस्यों को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज का प्रावधान दिया है। यह सुविधा सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध होगी। इससे बीमारी के समय परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम होगा।

वर्दी भत्ते में भी बदलाव किया गया है — पहले दी जाने वाली दो साड़ियों के स्थान पर अब तीन साड़ियां दी जाएंगी, जिसके लिए ₹500 अतिरिक्त की व्यवस्था की गई है। इस पर सरकार लगभग ₹20 करोड़ खर्च कर रही है।

तकनीकी सुविधाओं का विस्तार

आंगनबाड़ी व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार पहले चरण में 1,23,398 स्मार्टफोन उपलब्ध करा चुकी है। रिप्लेसमेंट पॉलिसी के तहत इसके बाद 69,803 और स्मार्टफोन दिए गए। इससे बच्चों के पोषण-संबंधी डेटा और सरकारी योजनाओं की जानकारी रियल टाइम में दर्ज करना संभव हो गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को अपना भवन उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी रखा है।

सरकार और कर्मियों की प्रतिक्रिया

अपर मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, लीना जौहरी ने कहा, 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी कर्मियों के आर्थिक सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। परिवार को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा उनके जीवन में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाएगी।'

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सावित्री ने कहा, 'हर महीने ₹4,000 रुपये अतिरिक्त मिलने से घर के खर्च और बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। दिवाली के समय सरकार की इस सौगात से हमारी खुशियाँ दोगुनी हो गई हैं।' वहीं, कार्यकर्ता सीमा ने कहा कि कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा से बीमारी के वक्त परिवार की आर्थिक चिंता दूर होगी।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय को लेकर आंदोलन की खबरें सामने आती रही हैं। उत्तर प्रदेश में कोरोना काल में इन महिलाओं ने गाँव-गाँव जाकर स्क्रीनिंग और संक्रमित लोगों की सेवा में अहम भूमिका निभाई थी, जिसे मुख्यमंत्री ने 'बच्चों के भविष्य की नींव' बताते हुए सराहा है। बढ़े मानदेय, स्वास्थ्य बीमा और तकनीकी सुविधाओं के संयोजन से इन कर्मियों के कार्य-निष्पादन और प्रेरणा पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि ₹12,000 प्रतिमाह अभी भी उत्तर प्रदेश की न्यूनतम मजदूरी से कम है और इन कर्मियों को 'नियमित कर्मचारी' का दर्जा नहीं मिला है। दिवाली से पहले की यह घोषणा राजनीतिक दृष्टि से समयबद्ध है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार इन कर्मियों को स्थायी रोजगार का दर्जा देने की दिशा में भी कोई ठोस कदम उठाएगी। देशभर में आंगनबाड़ी कर्मचारी वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रही हैं — मानदेय वृद्धि तात्कालिक राहत जरूर है, पर दीर्घकालिक समाधान नहीं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का नया मानदेय कितना है?
योगी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से बढ़ाकर ₹12,000 और सहायिकाओं का ₹4,000 से बढ़ाकर ₹6,000 प्रतिमाह कर दिया है। यह बढ़ोतरी नवंबर 2026 में दिवाली से पहले लागू की गई है।
आंगनबाड़ी कर्मियों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा कहाँ मिलेगी?
कर्मियों और उनके परिवार को सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा लगभग 3.35 लाख कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्राप्त होगी।
2017 से अब तक आंगनबाड़ी मानदेय में कुल कितनी वृद्धि हुई है?
2017 में योगी सरकार के सत्ता संभालने के समय कार्यकर्ताओं को ₹3,000 और सहायिकाओं को ₹1,500 प्रतिमाह मिलते थे। अब क्रमशः ₹12,000 और ₹6,000 मिलेंगे, यानी दोनों श्रेणियों में शुरुआती मानदेय की तुलना में चार गुना वृद्धि हुई है।
उत्तर प्रदेश में कितनी आंगनबाड़ी कर्मियों को इन सुविधाओं का लाभ मिलेगा?
राज्य में 1,75,982 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और 1,70,656 सहायिकाएं इन सुविधाओं की लाभार्थी होंगी। कुल मिलाकर लगभग 3.35 लाख कर्मियों और उनके परिवारों को मानदेय वृद्धि व स्वास्थ्य कवर का फायदा होगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों को स्मार्टफोन क्यों दिए गए हैं?
आंगनबाड़ी व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए पहले चरण में 1,23,398 और बाद में रिप्लेसमेंट पॉलिसी के तहत 69,803 स्मार्टफोन वितरित किए गए हैं। इससे बच्चों के पोषण संबंधी डेटा और सरकारी योजनाओं की जानकारी रियल टाइम में दर्ज करना आसान हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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