आईआईटी रोपड़ में एआई के लिए 'विवेक' मापने का श्वेत पत्र जारी, HEED फ्रेमवर्क प्रस्तावित
सारांश
मुख्य बातें
आईआईटी रोपड़ में 2 नवंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया गया, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रणालियों में 'विवेक' (Wisdom) को परिभाषित करने, मापने और मूल्यांकन करने के लिए एक नई रूपरेखा का प्रस्ताव किया गया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के निदेशक (अनुसंधान) और 'ग्लोबल मेंटल हेल्थ अलायंस—कंपैशन यूनाइट्स' के संस्थापक डॉ. ईशान शिवानंद ने इसे संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा की उपस्थिति में लॉन्च किया। यह पहल भारतीय प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक एआई अनुसंधान के अनूठे संगम का प्रतिनिधित्व करती है।
श्वेत पत्र में क्या है
'बियॉन्ड इंटेलिजेंस: डिफाइनिंग एंड मेजरिंग विजडम फॉर एआई' शीर्षक वाला यह दस्तावेज बताता है कि एआई प्रणालियों में केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि नैतिक और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता भी होनी चाहिए। दस्तावेज़ में डॉ. शिवानंद द्वारा 'शिव सूत्रों' और मानव मन पर आधारित भारत के प्राचीन ग्रंथों की व्याख्या का उपयोग इस फ्रेमवर्क की नींव रखने के लिए किया गया है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में एआई की जवाबदेही और नैतिकता को लेकर बहस तेज़ हो रही है, और एआई नियमन के लिए नई नीतियाँ बनाई जा रही हैं।
एआई में 'विवेक' की कमी — क्या कहते हैं शोध
श्वेत पत्र में 'साइंस' जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार जब प्रमुख एआई प्रणालियों से रोज़मर्रा की सलाह माँगी गई, तो उन्होंने इंसानों की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत अधिक बार यूज़र्स का ही पक्ष लिया — अर्थात वे उपयोगकर्ताओं को वह बताते हैं जो वे सुनना चाहते हैं, न कि वह जो वास्तव में उनके लिए लाभकारी हो।
मीडिया से बात करते हुए डॉ. शिवानंद ने कहा, 'यह पहल इस बात पर जोर देती है कि एआई सिस्टम का मूल्यांकन केवल उनकी बुद्धिमत्ता और तकनीकी क्षमताओं के आधार पर ही नहीं बल्कि सही निर्णय लेने और जिम्मेदारीपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करने की उनकी क्षमता के आधार पर भी किया जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा, 'हालांकि एआई सिस्टम अब पेशेवर परीक्षाएं पास कर सकते हैं और भावनात्मक बुद्धिमत्ता के परीक्षणों में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन अक्सर वे यूज़र्स को वही बताते हैं जो वे सुनना चाहते हैं।'
HEED फ्रेमवर्क — नई रूपरेखा का प्रस्ताव
इस कमी को दूर करने के लिए श्वेत पत्र के लेखकों ने एआई प्रणालियों में विवेक को मापने के लिए 'एचईईडी' (HEED) नामक एक फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया है। इस पहल के तहत डॉ. शिवानंद एक 'ओपन कॉल' के ज़रिए स्वतंत्र शोधकर्ताओं को इस प्रस्तावित फ्रेमवर्क का परीक्षण करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं और प्रारंभिक 'सीड फंडिंग' भी उपलब्ध करा रहे हैं।
स्वतंत्र सदस्यों वाली एक समिति उन शोध टीमों का चयन करेगी जो इस मॉडल का मूल्यांकन करेंगी और 'एचईईडी बेंच' विकसित करेंगी — यह एआई में विवेक मापने के लिए एक 'ओपन बेंचमार्क' होगा, जिसे दुनिया भर के एआई डेवलपर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
आगे की राह
इस श्वेत पत्र का दीर्घकालिक उद्देश्य एक ऐसा वैश्विक मानक स्थापित करना है जिसके ज़रिए एआई प्रणालियों की विवेकशीलता को मापा जा सके। यदि 'एचईईडी बेंच' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत होता है, तो यह एआई मूल्यांकन के ढाँचे को मौलिक रूप से बदल सकता है और भारतीय शोध संस्थानों को वैश्विक एआई नीति-निर्माण में केंद्रीय भूमिका दिला सकता है।