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यूपी के 1.28 लाख शिक्षामित्रों को ₹460.23 करोड़ जारी, मानदेय ₹10,000 से बढ़कर ₹18,000

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यूपी के 1.28 लाख शिक्षामित्रों को ₹460.23 करोड़ जारी, मानदेय ₹10,000 से बढ़कर ₹18,000

सारांश

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के 1.28 लाख शिक्षामित्रों के मानदेय में 80% की वृद्धि की है — ₹10,000 से ₹18,000 प्रतिमाह। सितंबर-अक्टूबर 2026 के भुगतान के लिए ₹460.23 करोड़ जारी किए गए हैं, लेकिन नियमितीकरण का सवाल अभी भी बाकी है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने 1,27,841 शिक्षामित्रों के सितंबर व अक्टूबर 2026 के मानदेय के लिए ₹460.23 करोड़ जारी किए।
मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह किया गया — 80% की वृद्धि।
प्रत्येक माह के लिए ₹230.11 करोड़ का जनपदवार आवंटन निर्धारित।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भुगतान की पुष्टि की।
आलोचकों के अनुसार शिक्षामित्रों के नियमितीकरण का मुद्दा अभी अनसुलझा है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 अक्टूबर 2026 को शैक्षिक सत्र 2026-27 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों के सितंबर और अक्टूबर माह के मानदेय भुगतान के लिए ₹460.23 करोड़ की धनराशि की सीमा (लिमिट) जारी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू इस निर्णय के तहत शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है — यानी 80 प्रतिशत की वृद्धि।

मानदेय आवंटन का ब्यौरा

सितंबर 2026 के मानदेय के लिए ₹230.11 करोड़ तथा अक्टूबर 2026 के लिए समान रूप से ₹230.11 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई है। राज्य सरकार ने जनपदवार आवंटन तय करते हुए संबंधित जिलों को निर्धारित राशि के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश के लगभग 1.28 लाख शिक्षामित्रों को इस फैसले का सीधा लाभ मिलेगा।

योगी सरकार की प्रतिबद्धता

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि कर उनके आर्थिक हितों को मजबूती दी है। उन्होंने कहा, 'बढ़े मानदेय के साथ सितंबर और अक्टूबर के लिए ₹460.23 करोड़ की धनराशि जारी होना शिक्षामित्रों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।' गौरतलब है कि प्रदेश में शिक्षामित्र बरसों से बेहतर मानदेय और नियमितीकरण की माँग करते आए हैं।

शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि मानदेय में वृद्धि से शिक्षामित्रों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिलेगा, जिससे वे अधिक उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ विद्यालयों में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे। उनका मानना है कि इससे विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया भी सशक्त होगी। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बहस जारी है।

आगे क्या होगा

जनपदवार आवंटन के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। राज्य शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई दर पर मानदेय का वितरण सत्र 2026-27 में कार्यरत सभी पात्र शिक्षामित्रों को किया जाएगा। आलोचकों का कहना है कि मानदेय वृद्धि सकारात्मक कदम है, लेकिन शिक्षामित्रों के नियमितीकरण का सवाल अभी भी अनुत्तरित बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े प्रश्न का उत्तर नहीं देती जो वर्षों से लंबित है — नियमितीकरण। उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्र आंदोलन का इतिहास न्यायालयों तक पहुँचा है और सर्वोच्च न्यायालय भी इस मामले में हस्तक्षेप कर चुका है। केवल मानदेय बढ़ाना एक राजनीतिक संतुलन का काम करता है, जो आर्थिक असंतोष को कम करे और नियमितीकरण की माँग को टाले। असली कसौटी यह है कि क्या यह वृद्धि सातत्यपूर्ण है और क्या सरकार शिक्षामित्रों की सेवा-शर्तों को दीर्घकालिक ढाँचे में समेटने की दिशा में कोई ठोस रोडमैप पेश करेगी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में शिक्षामित्रों का नया मानदेय कितना है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया है। यह 80% की वृद्धि है जो शैक्षिक सत्र 2026-27 से लागू है।
₹460.23 करोड़ की राशि किसके लिए जारी की गई है?
यह राशि प्रदेश के 1,27,841 शिक्षामित्रों के सितंबर और अक्टूबर 2026 के मानदेय भुगतान के लिए जारी की गई है। प्रत्येक माह के लिए ₹230.11 करोड़ का जनपदवार आवंटन किया गया है।
इस फैसले से कितने शिक्षामित्रों को फायदा होगा?
उत्तर प्रदेश के लगभग 1.28 लाख (1,27,841) शिक्षामित्रों को इस मानदेय वृद्धि का सीधा लाभ मिलेगा। ये सभी शैक्षिक सत्र 2026-27 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत हैं।
शिक्षामित्रों के मानदेय का भुगतान कब होगा?
सरकार ने जनपदवार धनराशि निर्धारित कर संबंधित जिलों को तत्काल भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सितंबर और अक्टूबर दोनों माह के लिए लिमिट एक साथ जारी की गई है।
क्या शिक्षामित्रों के नियमितीकरण पर भी कोई फैसला हुआ है?
इस घोषणा में केवल मानदेय वृद्धि का उल्लेख है; नियमितीकरण को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई है। आलोचकों का कहना है कि शिक्षामित्रों का नियमितीकरण का मुद्दा अभी भी अनसुलझा बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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