2 नवंबर 2026
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दूध मूल्य वृद्धि पर BJP महिला मोर्चा का बेंगलुरु में प्रदर्शन, करंदलाजे बोलीं — 'क्रांति से पहले सरकार सत्ता छोड़े'

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दूध मूल्य वृद्धि पर BJP महिला मोर्चा का बेंगलुरु में प्रदर्शन, करंदलाजे बोलीं — 'क्रांति से पहले सरकार सत्ता छोड़े'

सारांश

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में BJP महिला मोर्चा ने दूध मूल्य वृद्धि के खिलाफ आवाज़ उठाई। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कांग्रेस सरकार को 'क्रांति' की चेतावनी दी, ₹5,000 करोड़ के हिसाब पर सवाल उठाए, और किसानों को ₹2,500 प्रति एकड़ की 'भीख' बताकर सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

BJP राज्य महिला मोर्चा ने 2 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में दूध मूल्य वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को चेतावनी दी — कीमतें वापस लें, वरना 'क्रांति' आने से पहले सत्ता छोड़ें।
करंदलाजे ने गृह लक्ष्मी योजना के तहत ₹5,000 करोड़ के कथित गबन का आरोप लगाया।
सूखा-प्रभावित किसानों को दी जा रही ₹2,500 प्रति एकड़ की राशि को 'भीख' बताया; पूर्व भाजपा सरकार के ₹4,000 से तुलना की।
पूर्व विधान परिषद सदस्य भारती शेट्टी ने भी दूध मूल्य वृद्धि तत्काल वापस लेने की माँग की।
राज्य परिवहन निगमों में बस मरम्मत व डीजल के लिए धनराशि न होने का दावा भी किया गया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य महिला मोर्चा ने 2 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को चेतावनी दी कि यदि वह बढ़ी हुई कीमतें वापस नहीं लेती और किसानों को न्याय नहीं दिलाती, तो राज्य में 'क्रांति' आने से पहले उसे सत्ता छोड़ देनी चाहिए।

प्रदर्शन का मुख्य घटनाक्रम

फ्रीडम पार्क में उमड़ी महिला कार्यकर्ताओं की भीड़ को संबोधित करते हुए करंदलाजे ने कहा, 'राज्य में क्रांति होने से पहले कांग्रेस सरकार को सत्ता छोड़ देनी चाहिए। अन्यथा, आपने जो भी कीमतें बढ़ाई हैं, उन्हें वापस लें और हमारे किसानों को न्याय दिलाएं।' यह प्रदर्शन कर्नाटक में दूध की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के विरोध में आयोजित किया गया था।

पूर्व विधान परिषद सदस्य भारती शेट्टी ने भी मंच से बोलते हुए दूध मूल्य वृद्धि को तत्काल वापस लेने की माँग की।

सरकार पर गंभीर आरोप

करंदलाजे ने आरोप लगाया कि पिछले तीन-चार महीनों में कर्नाटक में राज्य सरकार का प्रशासन 'शून्य पर आ गया है' और यह अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति का आकलन अपनी जीवनशैली के आधार पर नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री जी, कन्नड़ राज्योत्सव पर जनता को आपका क्या उपहार है? आप भले ही इतने अमीर हों कि अपने घरों में बिसलेरी का पानी पीते हों, लेकिन हम बिसलेरी नहीं पीते। हम अपनी माता कावेरी का पानी पीते हैं।'

करंदलाजे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने बार-बार दूध की कीमतें बढ़ाई हैं, जबकि उसकी गारंटी योजनाएँ लाभार्थियों तक ठीक से नहीं पहुँच रही हैं। उन्होंने दावा किया कि गृह लक्ष्मी योजना के तहत ₹5,000 करोड़ के हिसाब का सरकार ने आज तक खुलासा नहीं किया।

आम जनता पर असर

करंदलाजे ने होटलों में कम वेतन पर काम करने वाले, टैक्सी और ऑटो रिक्शा चलाने वाले तथा सड़क किनारे छोटे-मोटे व्यवसाय करने वाले लोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये वर्ग मकान किराया, बिजली, पानी और कचरा संग्रहण शुल्क के साथ-साथ दूध व दही की बार-बार होने वाली मूल्य वृद्धि का बोझ उठाने में असमर्थ हैं।

उन्होंने कहा कि पर्याप्त बारिश न होने के कारण राज्य गंभीर सूखे का सामना कर रहा है, और ऐसे में सरकार ने किसानों को ₹2,500 प्रति एकड़ 'भीख की तरह' दिए हैं।

भाजपा की पूर्व सरकार से तुलना

करंदलाजे और भारती शेट्टी दोनों ने दावा किया कि बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली पिछली भाजपा सरकार केंद्र की पीएम-किसान सम्मान निधि के अतिरिक्त किसानों को ₹4,000 देती थी, जिसे कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद बंद कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने ₹2,500 की राशि के लिए भी 17-18 नियम और शर्तें लगा दी हैं।

परिवहन निगमों पर भी निशाना

करंदलाजे ने राज्य संचालित परिवहन निगमों की स्थिति पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना लागू होने के बावजूद, बसों की मरम्मत या डीजल खरीदने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विपक्ष सरकार की गारंटी योजनाओं के क्रियान्वयन पर लगातार सवाल उठा रहा है।

गौरतलब है कि भाजपा का यह प्रदर्शन कन्नड़ राज्योत्सव के आसपास के राजनीतिक माहौल में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। आने वाले दिनों में कर्नाटक सरकार की ओर से इस प्रदर्शन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु यह रोज़मर्रा की महँगाई — दूध, डीज़ल, बिजली — को राजनीतिक हथियार बनाने की सुविचारित रणनीति है। दिलचस्प यह है कि भाजपा खुद केंद्र में है और केंद्रीय मंत्री राज्य सरकार पर निशाना साध रही हैं, जबकि खाद्य मुद्रास्फीति एक राष्ट्रीय परिघटना है। गृह लक्ष्मी के ₹5,000 करोड़ के आरोप सत्यापन योग्य हैं — यदि विपक्ष इन दावों को ठोस दस्तावेजों के साथ न उठाए, तो ये केवल चुनावी बयानबाज़ी बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP महिला मोर्चा ने बेंगलुरु में प्रदर्शन क्यों किया?
BJP राज्य महिला मोर्चा ने कर्नाटक में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में 2 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कांग्रेस सरकार से बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने और किसानों को न्याय दिलाने की माँग की।
शोभा करंदलाजे ने 'क्रांति' की चेतावनी क्यों दी?
करंदलाजे ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस सरकार दूध की बढ़ी हुई कीमतें वापस नहीं लेती और किसानों को न्याय नहीं दिलाती, तो 'क्रांति' आने से पहले उसे सत्ता छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन-चार महीनों में राज्य का प्रशासन अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है।
गृह लक्ष्मी योजना के ₹5,000 करोड़ पर क्या आरोप लगाए गए?
करंदलाजे ने आरोप लगाया कि गृह लक्ष्मी योजना के तहत ₹5,000 करोड़ का हिसाब सरकार ने आज तक नहीं दिया है। यह दावा उन्होंने प्रदर्शन के दौरान किया, हालाँकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है।
किसानों को मुआवज़े के मामले में भाजपा सरकार और कांग्रेस सरकार में क्या अंतर बताया गया?
करंदलाजे और भारती शेट्टी ने दावा किया कि बीएस येदियुरप्पा की भाजपा सरकार किसानों को पीएम-किसान सम्मान निधि के अलावा ₹4,000 अतिरिक्त देती थी। वर्तमान कांग्रेस सरकार पर आरोप है कि उसने यह सहायता बंद कर दी और सूखा-प्रभावित किसानों को मात्र ₹2,500 प्रति एकड़ 17-18 शर्तों के साथ दे रही है।
कर्नाटक में दूध मूल्य वृद्धि से आम जनता कैसे प्रभावित हो रही है?
करंदलाजे के अनुसार, कम वेतन पर काम करने वाले, टैक्सी-ऑटो चालक और छोटे व्यवसायी पहले से ही मकान किराया, बिजली, पानी और कचरा शुल्क की मार झेल रहे हैं। दूध व दही की बार-बार होने वाली मूल्य वृद्धि इस वर्ग की आर्थिक कठिनाइयों को और गहरा कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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