यूपी के 75 जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को समावेशी शिक्षा प्रशिक्षण, ₹2.98 करोड़ आवंटित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 12 अगस्त 2025 को प्रदेश के 75 जिलों में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्त्रियों और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को समावेशी शिक्षा का विशेष प्रशिक्षण देने की योजना की घोषणा की। इस पहल के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शीघ्र पहचान, शुरुआती हस्तक्षेप और दिव्यांगता समावेशन पर केंद्रित प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके लिए समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय ने ₹2.98 करोड़ की राशि आवंटित की है।
प्रशिक्षण की संरचना और समयसीमा
प्रशिक्षण कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण में 3 अगस्त से 30 अगस्त के बीच जिला स्तर पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए ₹17.70 लाख निर्धारित किए गए हैं। दूसरे चरण में 1 सितंबर से 30 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण होगा, जिसके लिए ₹2.80 करोड़ आवंटित हैं।
प्रशिक्षण में गतिविधि आधारित और व्यावहारिक तरीकों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि मास्टर ट्रेनर्स आगे प्रतिभागियों को विषयों को सरल और प्रभावी ढंग से समझा सकें।
प्रशिक्षण की विषयवस्तु
प्रशिक्षण सामग्री महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार तथा यूनिसेफ के सहयोग से तैयार की गई है। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप, समावेशी आंगनबाड़ी केंद्र और दिव्यांगता समावेशन जैसे विषय शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को समावेशी बनाने पर ज़ोर देती है।
गौरतलब है कि को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग दोनों की भूमिका होती है। इस संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों विभागों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा।
अधिकारियों के निर्देश
महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, शत-प्रतिशत प्रतिभागिता और निर्धारित समयसीमा में कार्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। जनपद स्तर पर नियमित निगरानी की जाएगी और प्रशिक्षण के बाद प्रगति रिपोर्ट राज्य परियोजना कार्यालय को सौंपी जाएगी।
सरकार का लक्ष्य
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर बच्चे को उसकी क्षमता और जरूरत के अनुरूप सीखने का अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा, 'विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर पहचान और शुरुआती सहयोग उनकी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण है।'
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ केवल दिव्यांग बच्चों तक सीमित नहीं रहेगा — एक समावेशी और अनुकूल शिक्षण वातावरण से सभी बच्चों की सीखने की क्षमता को बल मिलेगा। आगामी महीनों में इस पहल के क्रियान्वयन की प्रगति पर नज़र रखी जाएगी।