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यूपी में 48 घंटे की भारी बारिश: 63 जिले प्रभावित, 117 मकान क्षतिग्रस्त; नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट

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यूपी में 48 घंटे की भारी बारिश: 63 जिले प्रभावित, 117 मकान क्षतिग्रस्त; नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट

सारांश

उत्तर प्रदेश के 63 जनपदों में 48 घंटे की भारी बारिश ने तबाही मचाई — फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना बारिश, 117 मकान तबाह। नेपाल में बारिश के चलते पूर्वी यूपी की नदियाँ उफान पर; IMD का अनुमान है कि 36 घंटे बाद मौसम सुधरेगा।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के 63 जनपदों में पिछले 24 घंटों में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई।
फर्रुखाबाद में 200 गुना , कानपुर नगर में 160 गुना और कन्नौज , कानपुर देहात , हरदोई में 130 गुना अधिक बारिश।
अतिवृष्टि और आंधी-तूफान से प्रदेश में 117 मकान क्षतिग्रस्त हुए।
नेपाल में भारी बारिश के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट जारी।
IMD के अनुसार अगले 36 घंटों के बाद मौसम सामान्य होने की संभावना।
आपात सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन 1070 सक्रिय।

उत्तर प्रदेश में पिछले 48 घंटों से जारी अतिवृष्टि और प्रतिकूल मौसम के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने राहत एवं बचाव तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। 26 सितंबर 2026 को राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों को फील्ड में उतरकर राहत कार्य की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए। प्रदेश के 63 जनपदों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है और अतिवृष्टि व आंधी-तूफान से 117 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

वर्षा के चौंकाने वाले आँकड़े

राहत आयुक्त के अनुसार पिछले 24 घंटों में पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई। सर्वाधिक प्रभावित जनपदों में फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना तथा कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में 130 गुना अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

दूसरी ओर भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य वर्षा हुई, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में कोई वर्षा नहीं हुई।

नेपाल सीमा पर विशेष सतर्कता

राहत आयुक्त डॉ. यशोद ने नेपाल में हो रही भारी बारिश के मद्देनजर सीमावर्ती जिलों, विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है। संबंधित जिलाधिकारियों को नदियों के जलस्तर की निरंतर निगरानी और बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब पहाड़ी राज्यों और नेपाल में मानसून की तीव्रता बढ़ने पर पूर्वी उत्तर प्रदेश में घाघरा, राप्ती और शारदा जैसी नदियाँ उफान पर आ जाती हैं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र हर वर्ष मानसून के अंतिम चरण में सबसे अधिक बाढ़-संभावित रहता है।

राहत एवं बचाव की तैयारियाँ

जिलाधिकारियों को फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएँ आवश्यकतानुसार उपयोग में लाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर भ्रमण और निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों को कच्चे मकानों के आस-पास जलभराव की स्थिति का तत्काल संज्ञान लेने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर जोखिम में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

किसानों और प्रभावित परिवारों को राहत

राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि भारी बारिश से प्रभावित परिवारों को पूरी संवेदनशीलता के साथ अनुमन्य सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए। क्षति का त्वरित सर्वेक्षण एवं आकलन कराने के साथ ही फसलों को हुए नुकसान का भी शीघ्र आकलन कराने को कहा गया है, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता दी जा सके।

मौसम पूर्वानुमान और नागरिकों से अपील

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 36 घंटों के बाद प्रदेश में मौसम के सामान्य होने की संभावना है। राहत आयुक्त ने आमजन से अपील की है कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्षति-सर्वेक्षण और किसान-मुआवजे की प्रक्रिया कितने दिनों में पूरी होती है — जो ऐतिहासिक रूप से महीनों खिंचती रही है। नेपाल में वर्षा के कारण सीमावर्ती नदियों पर दबाव बढ़ना कोई नई परिघटना नहीं है, फिर भी हर साल तैयारी प्रतिक्रियात्मक ही रहती है। IMD के 36 घंटे वाले राहत-संकेत के बाद असली परीक्षा यही होगी कि 117 क्षतिग्रस्त परिवारों तक सहायता राशि समय पर पहुँचती है या नहीं।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से कितने जिले प्रभावित हुए हैं?
राहत आयुक्त के अनुसार प्रदेश के 63 जनपदों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटों में पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक बारिश हुई, जिसमें फर्रुखाबाद सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा।
नेपाल सीमा से सटे जिलों में हाई अलर्ट क्यों जारी किया गया है?
नेपाल में हो रही भारी बारिश के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश की सीमावर्ती नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए राहत आयुक्त ने संबंधित जिलाधिकारियों को नदियों की निरंतर निगरानी और बाढ़ राहत दलों को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं।
यूपी में बाढ़ राहत के लिए हेल्पलाइन नंबर क्या है?
किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है। यह नंबर 26 सितंबर 2026 को राहत आयुक्त द्वारा सार्वजनिक किया गया है।
उत्तर प्रदेश में बारिश कब थमेगी?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 36 घंटों के बाद प्रदेश में मौसम सामान्य होने की संभावना है। तब तक नागरिकों से अपील की गई है कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें।
भारी बारिश से प्रभावित किसानों और परिवारों को राहत कैसे मिलेगी?
राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवारों को अनुमन्य सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए। फसल नुकसान का त्वरित सर्वेक्षण कराकर प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता देने के भी आदेश जारी किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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