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गोमती नदी उद्गम स्थल पर ₹1.04 करोड़ खर्च करेगी यूपी सरकार, पीलीभीत में बनेगा विश्वस्तरीय तीर्थ केंद्र

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गोमती नदी उद्गम स्थल पर ₹1.04 करोड़ खर्च करेगी यूपी सरकार, पीलीभीत में बनेगा विश्वस्तरीय तीर्थ केंद्र

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने पीलीभीत के गोमती उद्गम स्थल को विश्वस्तरीय तीर्थ केंद्र बनाने के लिए ₹1.04 करोड़ की परियोजना को हरी झंडी दी है। बहुउद्देशीय हॉल, आधुनिक शौचालय और सोलर सुविधाओं सहित यह विकास कार्य यूपीएसटीडीसी को सौंपा गया है।

मुख्य बातें

यूपी पर्यटन विभाग ने पीलीभीत स्थित गोमती नदी उद्गम स्थल के विकास के लिए ₹1.04 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की।
प्रथम चरण में ₹78 लाख की धनराशि जारी; क्रियान्वयन की जिम्मेदारी यूपीएसटीडीसी को।
₹48.69 लाख से बहुउद्देशीय हॉल, ₹13.44 लाख से शौचालय ब्लॉक और ₹9.45 लाख से शेड का निर्माण होगा।
गोमती नदी अपने उद्गम गोमत ताल (फुलहर झील) से लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा कर गाजीपुर में गंगा में मिलती है।
परियोजना में इंटरलॉकिंग मार्ग, उद्यान, सौंदर्यीकरण और सोलर-आधारित सुविधाएँ भी शामिल।

उत्तर प्रदेश सरकार ने पीलीभीत जनपद के कलीनगर तहसील स्थित गोमती नदी के उद्गम स्थल को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ₹1.04 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी है। पर्यटन विभाग ने प्रथम चरण में ₹78 लाख की धनराशि जारी कर दी है, और परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को सौंपी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम के बाद अब गोमती उद्गम स्थल को भी आस्था पर्यटन के मानचित्र पर लाने का निर्णय किया है। यह स्थल पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील में स्थित है। गोमती नदी का उद्गम माधोटांडा ग्राम के समीप स्थित गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है।

यह परियोजना उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत राज्य सरकार प्रदेश की प्राकृतिक एवं धार्मिक विरासत को पर्यटन की दृष्टि से पुनर्जीवित करने में जुटी है।

परियोजना में क्या बनेगा

स्वीकृत परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक अवसंरचना तैयार की जाएगी। इसमें ₹48.69 लाख की लागत से एक बहुउद्देशीय हॉल, ₹13.44 लाख से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और ₹9.45 लाख से शेड का निर्माण शामिल है।

इसके अलावा इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान, सौंदर्यीकरण कार्य, सोलर-आधारित सुविधाएँ और अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।

गोमती नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सनातन परंपरा में गोमती नदी को विशेष सम्मान प्राप्त है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के पश्चात भगवान श्रीराम ने गोमती में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था। नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती के तट पर ही मानी जाती है।

गौरतलब है कि लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर सहित अनेक जनपदों को सिंचित करती है और अंततः गाजीपुर में गंगा नदी में मिल जाती है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'मां गोमती का उद्गम स्थल महज एक भौगोलिक बिंदु न होकर, हमारी सनातन आस्था और लोकजीवन का महत्वपूर्ण स्थल भी है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाना सरकार का लक्ष्य है।

आम जनता और पर्यटन पर असर

परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है, जिससे पीलीभीत क्षेत्र में स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बल मिलने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश पर्यटन राजस्व के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹1.04 करोड़ की यह राशि अपेक्षाकृत मामूली है — यह देखना होगा कि क्या यह पर्यटन अवसंरचना वास्तव में पीलीभीत जैसे अपेक्षाकृत कम चर्चित जनपद में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ा पाती है। गोमती नदी स्वयं प्रदूषण और घटते जलस्तर की चुनौतियों से जूझ रही है — उद्गम स्थल का सौंदर्यीकरण तब तक अधूरा रहेगा जब तक नदी की पारिस्थितिक सेहत पर समानांतर ध्यान नहीं दिया जाता। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है, पर दीर्घकालिक प्रभाव के लिए पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को साथ चलाना अनिवार्य होगा।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोमती नदी का उद्गम स्थल कहाँ है?
गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप स्थित गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। यह स्थल कलीनगर तहसील, पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र में है।
यूपी सरकार गोमती उद्गम स्थल पर कितना खर्च करेगी?
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने ₹1.04 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की है, जिसमें प्रथम चरण में ₹78 लाख जारी किए जा चुके हैं। परियोजना का क्रियान्वयन यूपीएसटीडीसी करेगा।
गोमती उद्गम स्थल विकास परियोजना में क्या-क्या बनेगा?
परियोजना में ₹48.69 लाख का बहुउद्देशीय हॉल, ₹13.44 लाख का आधुनिक शौचालय ब्लॉक और ₹9.45 लाख का शेड बनेगा। इसके अलावा इंटरलॉकिंग मार्ग, उद्यान, सौंदर्यीकरण और सोलर-आधारित सुविधाएँ भी विकसित की जाएंगी।
गोमती नदी का धार्मिक महत्व क्या है?
सनातन परंपरा में गोमती नदी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने इसमें स्नान किया था, और नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी इसी के तट पर मानी जाती है।
गोमती नदी कितने जनपदों से गुजरती है और कहाँ मिलती है?
गोमती नदी लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा में पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर सहित कई जनपदों से होकर गुजरती है। अंततः यह गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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