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अमेरिका-ईरान युद्धविराम में पाकिस्तान की बढ़ती अहमियत पर संजय राउत का तंज

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अमेरिका-ईरान युद्धविराम में पाकिस्तान की बढ़ती अहमियत पर संजय राउत का तंज

सारांश

संजय राउत ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि अमेरिका-ईरान युद्धविराम के दौरान पाकिस्तान को मिली वैश्विक प्रतिष्ठा के लिए सरकार जिम्मेदार है। उनका कहना है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि कमजोर हुई है।

मुख्य बातें

संजय राउत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया।
पाकिस्तान को मिली वैश्विक प्रतिष्ठा पर चिंता जताई।
ईरान की कूटनीतिक मजबूती की प्रशंसा की।

मुंबई, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने केंद्र की भाजपा सरकार पर कड़ा हमला करते हुए कहा है कि अमेरिका-ईरान युद्धविराम के दौरान पाकिस्तान को जो वैश्विक महत्व प्राप्त हुआ है, उसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। उनका आरोप है कि वर्तमान नेतृत्व में भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि कमजोर हुई है।

राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जहां पाकिस्तान और चीन को शांति स्थापित करने का श्रेय मिल रहा है, वहीं भारत इस प्रक्रिया में हाशिये पर रहा है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर दुनिया के नक्शे पर अपनी वापसी की है। यह भारत के लिए एक शर्म की बात है। हमारे प्रधानमंत्री खुद को ‘महाविश्वगुरु’ बताते हैं, लेकिन वे केवल सऊदी अरब, जॉर्डन और नेपाल के नेताओं से बातचीत करने तक सीमित हैं, जबकि वैश्विक कूटनीति में अन्य देश आगे बढ़ रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प, बेंजामिन नेतन्याहू और ईरानी नेतृत्व को बातचीत की मेज पर लाने का श्रेय भारत को मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार के "स्पष्ट रुख की कमी" के कारण यह कूटनीतिक विफलता साबित हुई।

संघर्ष के मुद्दे पर राउत ने ईरान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उसने अमेरिका और इज़रायल जैसी महाशक्तियों के सामने झुकने से इंकार किया और 35 दिनों तक चले संघर्ष में मजबूती से डटा रहा। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने दुनिया में अमेरिका और इज़रायल की सैन्य ताकत के बारे में बनी "बेबुनियाद डर" को तोड़ा है।

राउत ने डोनाल्ड ट्रंप को "भीड़ का नेता" बताते हुए कहा कि ईरान ने उन्हें एक सबक सिखाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब दुनिया युद्ध के कगार पर थी, तब प्रधानमंत्री देश के भीतर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने में व्यस्त थे।

उन्होंने कहा, "महाविश्वगुरु के दावे करने वाले प्रधानमंत्री केरल, पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में ‘शब्द बम’ गिराने में लगे थे। वे चुनाव आयोग और उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदों का इस्तेमाल कर लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं, जबकि चीन और पाकिस्तान वैश्विक शांति का श्रेय ले रहे हैं।"

विदेश मंत्री एस जयशंकर पर निशाना साधते हुए राउत ने कहा कि उन्होंने पहले पाकिस्तान को "ब्रोकर" देश बताया था, लेकिन अब वही देश अमेरिकी राष्ट्रपति से धन्यवाद प्राप्त कर रहा है। उन्होंने जयशंकर के इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग करते हुए कहा कि उनका कैबिनेट में बने रहना "राष्ट्रीय अपमान" का कारण बन रहा है।

राउत ने भाजपा के पुराने बयानों पर कटाक्ष करते हुए कहा, "आप इस्लामाबाद में तिरंगा फहराने की बात करते थे, लेकिन आज डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू वहीं बैठकर विश्व शांति की बात कर रहे हैं। यह मोदी सरकार के लिए करारा तमाचा है।"

उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि पाकिस्तान को जो वैश्विक प्रतिष्ठा मिली है, उसके लिए पीएम मोदी और उनकी सरकार पूरी तरह जिम्मेदार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि संजय राउत का बयान भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से भारत की छवि पर प्रभाव पड़ता है, यह एक गंभीर विषय है जिसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका-ईरान युद्धविराम में पाकिस्तान को मिली अहमियत के लिए केंद्र की भाजपा सरकार जिम्मेदार है।
क्या राउत ने ईरान की सराहना की?
हाँ, राउत ने ईरान की अमेरिका और इज़रायल जैसी महाशक्तियों के सामने मजबूती से खड़े रहने की प्रशंसा की।
राउत ने विदेश मंत्री पर क्या कहा?
उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस्तीफे की मांग की है और कहा कि उनका बने रहना राष्ट्रीय अपमान है।
राष्ट्र प्रेस
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