PERM सस्पेंशन का भारतीय IT पर दूरगामी असर, कर्नाटक मंत्री प्रियांक खड़गे की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के आईटी एवं गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 9 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कहा कि बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के संदर्भ में अमेरिकी सरकार द्वारा 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' (PERM) को निलंबित किए जाने से भारत पर जटिल और दूरगामी असर पड़ सकते हैं। उनके अनुसार यह कदम एक साथ पारंपरिक आईटी आउटसोर्सिंग के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी करता है और भारत में उच्च-मूल्य प्रौद्योगिकी कार्य के विस्तार के अवसर भी उत्पन्न करता है।
PERM निलंबन से क्या बदलेगा
PERM वह प्रक्रिया है जिसके ज़रिए H-1B वीज़ा धारकों सहित विदेशी कर्मचारी रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की दिशा में बढ़ते हैं। खड़गे ने कहा कि इसके निलंबन से अमेरिका में काम कर रही भारतीय आईटी कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है, कुशल कर्मचारियों को बनाए रखना कठिन हो सकता है और भारतीय पेशेवरों को ऑनसाइट तैनात करने में लचीलापन कम हो सकता है।
उन्होंने कहा, 'अगर भारतीय इंजीनियरों का अमेरिका जाना मुश्किल और महंगा हो जाता है तो ज़्यादातर हाई-वैल्यू काम उन जगहों पर जा सकता है जहाँ टैलेंट पहले से मौजूद है।' यह टिप्पणी भारतीय आईटी उद्योग के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत है।
भारत के लिए अवसर का पहलू
खड़गे ने यह भी रेखांकित किया कि इस बदलाव से भारत में 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCC) के विस्तार में तेज़ी आ सकती है। वैश्विक कंपनियाँ अधिक अनुसंधान एवं विकास (R&D), इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का काम भारतीय शहरों में लाने के लिए प्रोत्साहित हो सकती हैं।
उनके अनुसार इससे वरिष्ठ प्रौद्योगिकी पेशेवरों की घरेलू माँग भी बढ़ सकती है और वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भारत की स्थिति और मज़बूत हो सकती है। गौरतलब है कि भारत पहले से ही दुनिया के शीर्ष आईटी सेवा-प्रदाता देशों में से एक है।
वैश्विक टेक केंद्र बनने का मौका
खड़गे के अनुसार भारत के पास केवल आईटी सेवा-प्रदाता की भूमिका से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने का यह एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी फैसले का असर भारतीय आईटी कंपनियों की तत्काल चुनौतियों से कहीं अधिक गहरा होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में पहले से ही बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और नई दिल्ली जैसे शहरों में GCC की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। अनुमानों के अनुसार, भारत में इस समय 1,700 से अधिक GCC सक्रिय हैं।
आम जनता और IT क्षेत्र पर असर
मंत्री की टिप्पणियों से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की आवाजाही पर पाबंदियाँ बढ़ने से कंपनियाँ भारत में अपने तकनीकी परिचालन का विस्तार कर सकती हैं — जो घरेलू रोज़गार बाज़ार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। हालाँकि, अल्पावधि में उन भारतीय पेशेवरों पर दबाव बढ़ेगा जो अमेरिका में ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा में हैं।
अमेरिका में बड़े पैमाने पर कार्यरत भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के लिए यह निलंबन निकट भविष्य में परिचालन जटिलताएँ बढ़ा सकता है, लेकिन दीर्घावधि में यह भारत को उच्च-मूल्य प्रौद्योगिकी कार्य के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक उत्प्रेरक साबित हो सकता है।