हिंद-प्रशांत में चीन की ग्रे-जोन रणनीति रोकने के लिए अमेरिकी सीनेट में द्विदलीय बिल पेश
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सीनेट में 30 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण द्विदलीय विधेयक पेश किया गया, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन (पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) की 'ग्रे-जोन' रणनीति से निपटने की अमेरिका की क्षमता को सुदृढ़ करना है। यह विधेयक इलिनोइस से डेमोक्रेट सीनेटर टैमी डकवर्थ और टेनेसी से रिपब्लिकन सीनेटर मार्शा ब्लैकबर्न ने संयुक्त रूप से पेश किया। प्रायोजकों का तर्क है कि बीजिंग की दबाव-आधारित गतिविधियाँ क्षेत्रीय स्थिरता, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके सहयोगी देशों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
बिल में क्या है
प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री को हिंद-प्रशांत में चीन की गतिविधियों पर निगरानी बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही उन सरकारी विभागों, कार्यक्रमों और संस्थाओं की पहचान करनी होगी जो इस निगरानी को और प्रभावी बना सकते हैं। विधेयक में एक विशेष टास्क फोर्स के गठन का भी प्रावधान है, जो चीन की ग्रे-जोन रणनीतियों पर नज़र रखेगी, उनसे निपटने के उपाय तैयार करेगी और प्रदर्शन संकेतकों के माध्यम से अपनी प्रगति का मूल्यांकन कर कांग्रेस को रिपोर्ट सौंपेगी।
ग्रे-जोन रणनीति क्या है
सीनेटरों के अनुसार, 'ग्रे-जोन रणनीति' वह तरीका है जिसमें कोई देश खुले सैन्य संघर्ष और पूर्ण शांति के बीच की स्थिति में रहकर अपने भू-राजनीतिक लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करता है। इसमें साइबर हमले, आर्थिक दबाव, सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर), वास्तविक नियंत्रण रेखा या समुद्री क्षेत्रों में सैन्य उपस्थिति बढ़ाना और व्यापार-निवेश के माध्यम से प्रभाव डालना शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं।
सीनेटरों के बयान
सीनेटर डकवर्थ ने कहा, 'हिंद-प्रशांत में पीआरसी का बढ़ता हमला सिर्फ इस इलाके में हमारे साझेदारों पर ही प्रभाव नहीं डालता, बल्कि इससे अमेरिका की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा है।' उन्होंने आगे कहा, 'हम एक पैसिफिक देश हैं और हम एक आज़ाद और खुले हिंद-प्रशांत पर निर्भर हैं।' सीनेटर ब्लैकबर्न ने कहा, 'कम्युनिस्ट चीन लगातार नए तरीके ईजाद कर रहा है ताकि पकड़े न जाए और साइबर हमलों, आर्थिक दबाव, सूचना युद्ध और अन्य ग्रे-जोन हथकंडों के ज़रिए हमारे सहयोगियों को नुकसान पहुँचाए।'
भारत और क्वाड की भूमिका
क्वाड जैसे बहुपक्षीय ढाँचे के ज़रिए भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति में तेज़ी से अहम भूमिका निभा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में नई दिल्ली और वाशिंगटन ने रक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री समन्वय को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। दोनों सरकारें लगातार इस बात पर ज़ोर देती रही हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र मुक्त, खुला और नियम-आधारित होना चाहिए।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि सीनेटर डकवर्थ पहले भी 'स्ट्रैटेजी फॉर क्राइसिस मैनेजमेंट एक्ट' और 'साउथ चाइना सी स्ट्रैटेजी एक्ट' जैसे विधेयक प्रायोजित कर चुकी हैं, जो समिति से पारित होकर पूरे सीनेट में विचार के लिए लंबित हैं। इस वर्ष के नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट में भी डकवर्थ समर्थित प्रावधान शामिल हैं, जिनका मकसद क्षेत्र में संकट प्रबंधन, एसिमेट्रिक ऑपरेशन्स और चिकित्सा तैयारियों को बेहतर बनाना है। नया विधेयक अब सीनेट की संबंधित समिति के समक्ष विचाराधीन है।