अमेरिकी सीनेट प्रस्ताव: चीन को सबसे बड़ा खतरा घोषित, भारत-क्वाड से गहरे जुड़ाव की माँग
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सीनेट के एक द्विदलीय समूह ने 8 मई को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया, जिसमें चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी और खतरा करार दिया गया है। साथ ही बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत के साथ गहरे जुड़ाव और मज़बूत हिंद-प्रशांत गठबंधन की माँग की गई है।
प्रस्ताव में क्या कहा गया
सीनेटर क्रिस कून्स सहित रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के सीनेटरों द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि चीन के पास अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और रणनीतिक हितों को कमज़ोर करने का इरादा और क्षमता दोनों हैं। प्रस्ताव में चीन पर न्यूक्लियर, साइबर, समुद्री और अंतरिक्ष क्षमताओं सहित अपनी सैन्य शक्ति को तेज़ी से बढ़ाने का आरोप लगाया गया है। सांसदों ने यह भी चेतावनी दी कि बीजिंग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जबरदस्ती, आक्रामक और धोखेबाज़ गतिविधियों का सहारा ले रहा है।
ताइवान और वैश्विक स्थिरता पर चिंता
प्रस्ताव में ताइवान स्ट्रेट में यथास्थिति को बलपूर्वक बदलने की चीन की कोशिशों को लेकर गहरी चिंता जताई गई है। सीनेट ने ताइवान स्ट्रेट और साउथ चाइना सी में नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने की माँग की। इसके साथ ही प्रस्ताव में कहा गया कि चीन सैन्य तकनीक और सामग्री साझा करके ईरान, उत्तर कोरिया और रूस सहित अमेरिका के दुश्मनों का समर्थन कर रहा है।
भारत और क्वाड की भूमिका
नई दिल्ली में विशेष रुचि के साथ देखे जा रहे एक अनुभाग में, सीनेट ने चतुर्भुजीय सुरक्षा संवाद (क्वाड) के ज़रिए भारत के साथ अमेरिका के जुड़ाव को और गहरा करने की माँग की। क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। हिंद-प्रशांत में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह समूह रणनीतिक महत्व का केंद्र बन गया है। प्रस्ताव में जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस जैसे सहयोगियों के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता को भी दोहराया गया और मज़बूत त्रिपक्षीय सहयोग का समर्थन किया गया।
आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा
सांसदों ने आरोप लगाया कि बीजिंग अमेरिकी प्रतिस्पर्धात्मकता को कमज़ोर करने के लिए सरकार समर्थित आर्थिक और औद्योगिक नीतियों का दुरुपयोग कर रहा है। प्रस्ताव में बौद्धिक संपदा की चोरी, जबरन तकनीक हस्तांतरण, निर्यात नियंत्रण और बाज़ार पहुँच में बाधाओं का उल्लेख किया गया। सीनेटरों ने यह भी चेतावनी दी कि चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों में अमेरिका से आगे निकलने की कोशिश कर रहा है, जो उनके अनुसार 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता को परिभाषित करेंगी। इसके अलावा, प्रस्ताव में चीन को अमेरिका में अवैध फेंटानिल और नाइटाजीन बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स की आपूर्ति से भी जोड़ा गया।
प्रस्ताव का महत्व और सीमाएँ
गौरतलब है कि यह प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी (नॉन-बाइंडिंग) है, अर्थात इसे कानूनी बल प्राप्त नहीं है। फिर भी यह चीन की सैन्य बढ़त, आर्थिक तरीकों और वैश्विक संस्थाओं में प्रभाव को लेकर वाशिंगटन में दोनों दलों के बीच बढ़ती साझा चिंता को उजागर करता है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंध व्यापार, तकनीक और सुरक्षा — तीनों मोर्चों पर तनावपूर्ण बने हुए हैं। आने वाले महीनों में देखना होगा कि यह द्विदलीय सहमति नीतिगत कदमों में कितनी तेज़ी से तब्दील होती है।