उत्तराखंड के नए राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने बदरीनाथ धाम में किए बद्री विशाल के दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को बदरीनाथ धाम, चमोली पहुँचकर भगवान बद्री विशाल के दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की। राज्यपाल के पद की शपथ लेने के बाद यह उनका पहला बदरीनाथ धाम दर्शन था।
शपथ ग्रहण से बदरीनाथ तक का सफर
गौरतलब है कि डॉ. बिसेन ने 19 अक्टूबर 2026 को देहरादून स्थित लोकभवन में उत्तराखंड के 9वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की थी। शपथ के मात्र पाँच दिन बाद उनका बदरीनाथ धाम पहुँचना इस यात्रा को विशेष महत्त्व देता है। इससे पहले उन्होंने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से शिष्टाचार भेंट की और इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की।
हेलीपैड पर औपचारिक स्वागत
बदरीनाथ धाम पहुँचने पर हेलीपैड पर जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने राज्यपाल को स्मृति चिह्न एवं हरित पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया। पुलिस के जवानों ने सेरेमोनियल यूनिफॉर्म में राज्यपाल को सलामी दी। डॉ. बिसेन ने जवानों के उत्कृष्ट टर्नआउट और सटीक शस्त्र कवायद की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
बदरीनाथ मास्टर प्लान की जानकारी
मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राज्यपाल ने परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने उन्हें बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत चल रहे विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति से अवगत कराया।
राज्यपाल का राजनीतिक परिचय
डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हैं। वे पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व सांसद भी रह चुके हैं। सार्वजनिक जीवन में उनके दशकों लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें उत्तराखंड जैसे महत्त्वपूर्ण राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाले उत्तराखंड में नए राज्यपाल के कार्यकाल को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं।
आगे की राह
नए राज्यपाल की बदरीनाथ यात्रा उनके पदभार ग्रहण के तुरंत बाद की प्रमुख सार्वजनिक गतिविधियों में से एक है, जो उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाती है। आने वाले हफ्तों में राज्यपाल के विभिन्न जिलों के दौरे और प्रशासनिक बैठकों की उम्मीद है।