उत्तराखंड का अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण मॉडल बना राष्ट्रीय मिसाल, छत्तीसगढ़ ने माँगा ड्राफ्ट
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 3 जुलाई 2026 को देहरादून में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का ड्राफ्ट माँगा जाना राज्य की शिक्षा सुधार नीति की बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार, उत्तराखंड की यह पहल अब देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बनती जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
शादाब शम्स ने बताया कि मोदी-धामी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल के तहत उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया। इस व्यवस्था के अंतर्गत सभी विद्यार्थियों के लिए उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित तथा एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस ड्राफ्ट की माँग यह संकेत देती है कि वह भी इस मॉडल का अध्ययन कर उसे अपने राज्य में लागू करने पर विचार कर रही है।
उत्तराखंड की नीतिगत अग्रणी भूमिका
शादाब शम्स ने रेखांकित किया कि उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर 'वन नेशन, वन लॉ' की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया था। उनके अनुसार, उत्तराखंड के बाद गुजरात, असम और महाराष्ट्र सहित कई राज्य भी यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'वन नेशन, वन एजुकेशन' की अवधारणा को राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाने की दिशा में सक्रिय है।
शिक्षा में समानता और गुणवत्ता का लक्ष्य
शादाब शम्स ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का यह कदम 'वन नेशन, वन एजुकेशन' की अवधारणा को मजबूत करने वाला है। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की अनिवार्यता से शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। गौरतलब है कि देश में मदरसा शिक्षा प्रणाली को मुख्यधारा से जोड़ने पर बहस लंबे समय से जारी है।
मुख्यमंत्री धामी की सराहना
शादाब शम्स ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तराखंड ने शिक्षा सुधार के क्षेत्र में ऐसी मजबूत पहल की है, जिसका अनुसरण अन्य राज्य भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'डबल इंजन सरकार' की नीतियों का असर अब विभिन्न राज्यों में दिखाई देने लगा है।
आगे की राह
शादाब शम्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'वन नेशन, वन लॉ' के साथ-साथ 'वन नेशन, वन एजुकेशन' की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने 'पढ़ेगा भारत तो बढ़ेगा भारत' की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल विकसित भारत के निर्माण में दूरगामी भूमिका निभाएगी। छत्तीसगढ़ की दिलचस्पी इस मॉडल के राष्ट्रीय विस्तार की संभावना को और पुख्ता करती है।