4 जुलाई 2026
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उत्तराखंड का अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण मॉडल बना राष्ट्रीय मिसाल, छत्तीसगढ़ ने माँगा ड्राफ्ट

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उत्तराखंड का अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण मॉडल बना राष्ट्रीय मिसाल, छत्तीसगढ़ ने माँगा ड्राफ्ट

सारांश

उत्तराखंड का अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण मॉडल अब राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसका ड्राफ्ट माँगकर संकेत दिया है कि यह मॉडल दूसरे राज्यों में भी अपनाया जा सकता है — मदरसा बोर्ड की जगह एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की अनिवार्यता के साथ।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ सरकार ने उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का ड्राफ्ट माँगा, जिसे मॉडल अपनाने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया; सभी विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने इसे मोदी-धामी सरकार की शिक्षा सुधार की बड़ी उपलब्धि बताया।
उत्तराखंड पहले यूसीसी लागू कर चुका है; गुजरात, असम, महाराष्ट्र भी इसी राह पर हैं।
शादाब शम्स के अनुसार यह पहल 'वन नेशन, वन एजुकेशन' की अवधारणा को मजबूत करती है।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 3 जुलाई 2026 को देहरादून में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का ड्राफ्ट माँगा जाना राज्य की शिक्षा सुधार नीति की बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार, उत्तराखंड की यह पहल अब देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बनती जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

शादाब शम्स ने बताया कि मोदी-धामी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल के तहत उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया। इस व्यवस्था के अंतर्गत सभी विद्यार्थियों के लिए उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित तथा एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस ड्राफ्ट की माँग यह संकेत देती है कि वह भी इस मॉडल का अध्ययन कर उसे अपने राज्य में लागू करने पर विचार कर रही है।

उत्तराखंड की नीतिगत अग्रणी भूमिका

शादाब शम्स ने रेखांकित किया कि उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर 'वन नेशन, वन लॉ' की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया था। उनके अनुसार, उत्तराखंड के बाद गुजरात, असम और महाराष्ट्र सहित कई राज्य भी यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'वन नेशन, वन एजुकेशन' की अवधारणा को राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाने की दिशा में सक्रिय है।

शिक्षा में समानता और गुणवत्ता का लक्ष्य

शादाब शम्स ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का यह कदम 'वन नेशन, वन एजुकेशन' की अवधारणा को मजबूत करने वाला है। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की अनिवार्यता से शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। गौरतलब है कि देश में मदरसा शिक्षा प्रणाली को मुख्यधारा से जोड़ने पर बहस लंबे समय से जारी है।

मुख्यमंत्री धामी की सराहना

शादाब शम्स ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तराखंड ने शिक्षा सुधार के क्षेत्र में ऐसी मजबूत पहल की है, जिसका अनुसरण अन्य राज्य भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'डबल इंजन सरकार' की नीतियों का असर अब विभिन्न राज्यों में दिखाई देने लगा है।

आगे की राह

शादाब शम्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'वन नेशन, वन लॉ' के साथ-साथ 'वन नेशन, वन एजुकेशन' की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने 'पढ़ेगा भारत तो बढ़ेगा भारत' की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल विकसित भारत के निर्माण में दूरगामी भूमिका निभाएगी। छत्तीसगढ़ की दिलचस्पी इस मॉडल के राष्ट्रीय विस्तार की संभावना को और पुख्ता करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली सवाल यह है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की संख्या में वास्तविक सुधार के स्वतंत्र आँकड़े क्या कहते हैं। मदरसा बोर्ड को समाप्त करना एक नीतिगत निर्णय है, लेकिन इसके क्रियान्वयन और अल्पसंख्यक समुदाय की स्वीकार्यता पर अभी तक व्यापक सार्वजनिक डेटा सामने नहीं आया है। छत्तीसगढ़ की दिलचस्पी इस मॉडल की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है, लेकिन परिणाम-आधारित मूल्यांकन के बिना इसे 'राष्ट्रीय मिसाल' कहना अभी जल्दबाजी होगी।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड का अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण क्या है?
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर गठित किया गया यह प्राधिकरण सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं में एनसीईआरटी आधारित और उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम अनिवार्य करता है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
छत्तीसगढ़ ने उत्तराखंड से ड्राफ्ट क्यों माँगा?
छत्तीसगढ़ सरकार उत्तराखंड के अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण मॉडल का अध्ययन कर उसे अपने राज्य में लागू करने पर विचार कर रही है। वक्फ बोर्ड चेयरमैन शादाब शम्स के अनुसार, यह माँग इस बात का संकेत है कि यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक हो रहा है।
शादाब शम्स कौन हैं और इस मामले में उनकी भूमिका क्या है?
शादाब शम्स उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन हैं। उन्होंने देहरादून में 3 जुलाई 2026 को इस विषय पर बयान देते हुए उत्तराखंड की शिक्षा सुधार पहल को राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
'वन नेशन, वन एजुकेशन' की अवधारणा क्या है?
इस अवधारणा के तहत देशभर के सभी शिक्षण संस्थानों में एकसमान, एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करने का लक्ष्य है। उत्तराखंड का अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
उत्तराखंड ने इससे पहले कौन-सी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नीतिगत पहल की है?
उत्तराखंड देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला पहला राज्य बना। शादाब शम्स के अनुसार, इसके बाद गुजरात, असम और महाराष्ट्र सहित कई राज्य भी यूसीसी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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