केरल CM वी.डी. सतीशन को क्लीन चिट: VACB ने 2018 बाढ़ फंडिंग का 8 साल पुराना मामला बंद किया
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के खिलाफ 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद यूके में धन संग्रह से जुड़े आरोपों की जांच को विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) ने औपचारिक रूप से बंद कर दिया है। 30 जुलाई को राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने घोषणा की कि VACB की अंतिम रिपोर्ट में सतीशन के विरुद्ध किसी भी प्रकार के गलत आचरण का कोई प्रमाण नहीं मिला। इस प्रकार लगभग आठ वर्षों से सतीशन के सार्वजनिक जीवन पर मंडराता यह विवाद अब समाप्त हो गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
2018 में केरल में आई भीषण बाढ़ के बाद सतीशन ने यूके में रहने वाले मलयाली समुदाय से बाढ़ पीड़ितों के घरों के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता जुटाने का प्रयास किया था। शिकायत के अनुसार, मनप्पट्टू फाउंडेशन के माध्यम से लगभग ₹20 लाख (करीब 22,500 जीबीपी) इकट्ठा किए गए और यह राशि यूके स्थित मिडलैंड इंटरनेशनल एड ट्रस्ट के जरिए फाउंडेशन के FCRA खाते में भेजी गई।
विजिलेंस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि यह ट्रांसफर फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) की धारा 3 का उल्लंघन है, जो राजनेताओं को विदेशी चंदा लेने से प्रतिबंधित करती है। यह विवाद तब सामने आया जब सीपीआई(एम) के पूर्व विधायक जेम्स मैथ्यू ने यह मुद्दा उठाया और तत्कालीन वामपंथी सरकार ने विजिलेंस जांच शुरू करवाई।
जांच का निष्कर्ष
गृह मंत्री चेन्निथला ने पत्रकारों से कहा, 'इस मामले में विजिलेंस का कोई पहलू नहीं है और केस बंद कर दिया गया है। अब यह साफ हो गया है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था।' उन्होंने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से फाइल की विस्तार से समीक्षा की और सतीशन का किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से कोई संबंध नहीं पाया।
गौरतलब है कि पिछली पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल में हुई दो अलग-अलग जांचों में भी कोई दोषसिद्ध करने वाला साक्ष्य नहीं मिला था। VACB की अंतिम रिपोर्ट ने भी इन्हीं निष्कर्षों की पुष्टि की है।
सतीशन का पक्ष
जांच के दौरान सतीशन ने विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर लगातार यही कहा कि उन्होंने 2018 की बाढ़ से तबाह हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए मानवीय सहायता जुटाने का काम किया था और इसमें कोई अनुचित आचरण नहीं था। वर्षों की जांच के बाद जांचकर्ताओं को उनके विरुद्ध कोई आपराधिक या विजिलेंस संबंधी अपराध साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं मिला।
राजनीतिक निहितार्थ
यह मामला केरल की राजनीति में लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ था। VACB की क्लीन चिट से सतीशन को 2018 की बाढ़ के बाद के पुनर्वास कार्यों से जुड़े सबसे लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक विवादों में से एक में बेदाग साबित होने का अवसर मिला है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चरम पर है।
आगे क्या
VACB की अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के साथ यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। हालांकि, विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और इस निष्कर्ष के राजनीतिक असर पर आने वाले दिनों में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।