वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 'निक्षय मित्र' पहल के तहत टीबी मरीजों को 270 पोषण बास्केट वितरित किए
सारांश
मुख्य बातें
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) ने 19 जून 2026 को 'निक्षय मित्र' पहल और 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के अंतर्गत जम्मू डिवीजन के कटरा ब्लॉक और रियासी जिले के टीबी मरीजों के लिए 270 पोषण युक्त खाद्य बास्केट वितरित किए। यह सहायता कटरा स्थित एसएमवीडीएसबी कार्यालय से जम्मू की टीबी रोग अधिकारी डॉ. ज्योति जॉली को सौंपी गई।
पहल का उद्देश्य और मार्गदर्शन
यह पोषण सहायता जम्मू की स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. पूनम सेठी के मार्गदर्शन में प्रदान की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पोषण संबंधी सहयोग के माध्यम से टीबी मरीजों की देखभाल को सुदृढ़ करना और उनके उपचार के परिणामों में सुधार लाना है। गौरतलब है कि टीबी उपचार के दौरान पर्याप्त पोषण मरीज की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और दवाओं की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
एनटीईपी और श्राइन बोर्ड की साझेदारी
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) जम्मू टीम ने इस योगदान के लिए एसएमवीडीएसबी प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। टीम ने कहा कि ये पोषण बास्केट मरीजों के ठीक होने की प्रक्रिया को गति देंगे, उनकी शारीरिक तकलीफ को कम करेंगे और उपचार के समग्र परिणामों को बेहतर बनाएँगे। स्टेट टीबी सेल जम्मू ने भी एसएमवीडीएसबी के इस कदम की सराहना की और 'टीबी मुक्त भारत' के लक्ष्य में साझेदारी को और मज़बूत करने का संकल्प दोहराया।
सामुदायिक भागीदारी का संदेश
यह पहल 'टीबी मुक्त जम्मू-कश्मीर' के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने में धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने के अपने संकल्प को लेकर विभिन्न स्तरों पर अभियान चला रही है। धार्मिक न्यासों जैसी गैर-सरकारी संस्थाओं की इस तरह की भागीदारी सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को ज़मीनी स्तर पर पूरक सहयोग प्रदान करती है।
एसएमवीडीएसबी के बारे में
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड एक वैधानिक स्वायत्त संस्था है, जो जम्मू-कश्मीर के कटरा में माता वैष्णो देवी के पवित्र गुफा मंदिर और उसके आसपास के संपूर्ण बुनियादी ढाँचे के प्रबंधन, संचालन और प्रशासन के लिए उत्तरदायी है। अगस्त 1986 में स्थापित इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल होते हैं। बोर्ड की जिम्मेदारियों में कटरा से भवन तक 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा करने वाले लाखों तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, सब्सिडी युक्त भोजन, आवास और यातायात सुविधाएँ उपलब्ध कराना शामिल है।
आगे की राह
एनटीईपी जम्मू और एसएमवीडीएसबी के बीच यह सहयोग भविष्य में भी जारी रहने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पोषण सहायता कार्यक्रमों का नियमित और निरंतर क्रियान्वयन टीबी उपचार की सफलता दर को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है। यह साझेदारी अन्य धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।