10 अगस्त 2026
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वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 'निक्षय मित्र' पहल के तहत टीबी मरीजों को 270 पोषण बास्केट वितरित किए

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वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 'निक्षय मित्र' पहल के तहत टीबी मरीजों को 270 पोषण बास्केट वितरित किए

सारांश

धार्मिक संस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र का एक असामान्य मेल — वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 'निक्षय मित्र' पहल के तहत कटरा और रियासी के टीबी मरीजों को 270 पोषण बास्केट सौंपे, जो 'टीबी मुक्त जम्मू-कश्मीर' के लक्ष्य में सामुदायिक भागीदारी की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

मुख्य बातें

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) ने 19 जून 2026 को 270 पोषण युक्त खाद्य बास्केट टीबी मरीजों को वितरित किए।
यह सहायता कटरा ब्लॉक और रियासी जिले के टीबी मरीजों के लिए 'निक्षय मित्र' पहल और 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत दी गई।
बास्केट जम्मू की टीबी रोग अधिकारी डॉ.
ज्योति जॉली को सौंपे गए, स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ.
पूनम सेठी के मार्गदर्शन में।
एनटीईपी जम्मू टीम और स्टेट टीबी सेल जम्मू ने श्राइन बोर्ड के योगदान की सराहना की।
यह पहल 'टीबी मुक्त जम्मू-कश्मीर' लक्ष्य में धार्मिक संस्थाओं की सामुदायिक भागीदारी का उदाहरण है।

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) ने 19 जून 2026 को 'निक्षय मित्र' पहल और 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के अंतर्गत जम्मू डिवीजन के कटरा ब्लॉक और रियासी जिले के टीबी मरीजों के लिए 270 पोषण युक्त खाद्य बास्केट वितरित किए। यह सहायता कटरा स्थित एसएमवीडीएसबी कार्यालय से जम्मू की टीबी रोग अधिकारी डॉ. ज्योति जॉली को सौंपी गई।

पहल का उद्देश्य और मार्गदर्शन

यह पोषण सहायता जम्मू की स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. पूनम सेठी के मार्गदर्शन में प्रदान की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पोषण संबंधी सहयोग के माध्यम से टीबी मरीजों की देखभाल को सुदृढ़ करना और उनके उपचार के परिणामों में सुधार लाना है। गौरतलब है कि टीबी उपचार के दौरान पर्याप्त पोषण मरीज की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और दवाओं की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

एनटीईपी और श्राइन बोर्ड की साझेदारी

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) जम्मू टीम ने इस योगदान के लिए एसएमवीडीएसबी प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। टीम ने कहा कि ये पोषण बास्केट मरीजों के ठीक होने की प्रक्रिया को गति देंगे, उनकी शारीरिक तकलीफ को कम करेंगे और उपचार के समग्र परिणामों को बेहतर बनाएँगे। स्टेट टीबी सेल जम्मू ने भी एसएमवीडीएसबी के इस कदम की सराहना की और 'टीबी मुक्त भारत' के लक्ष्य में साझेदारी को और मज़बूत करने का संकल्प दोहराया।

सामुदायिक भागीदारी का संदेश

यह पहल 'टीबी मुक्त जम्मू-कश्मीर' के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने में धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने के अपने संकल्प को लेकर विभिन्न स्तरों पर अभियान चला रही है। धार्मिक न्यासों जैसी गैर-सरकारी संस्थाओं की इस तरह की भागीदारी सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को ज़मीनी स्तर पर पूरक सहयोग प्रदान करती है।

एसएमवीडीएसबी के बारे में

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड एक वैधानिक स्वायत्त संस्था है, जो जम्मू-कश्मीर के कटरा में माता वैष्णो देवी के पवित्र गुफा मंदिर और उसके आसपास के संपूर्ण बुनियादी ढाँचे के प्रबंधन, संचालन और प्रशासन के लिए उत्तरदायी है। अगस्त 1986 में स्थापित इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल होते हैं। बोर्ड की जिम्मेदारियों में कटरा से भवन तक 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा करने वाले लाखों तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, सब्सिडी युक्त भोजन, आवास और यातायात सुविधाएँ उपलब्ध कराना शामिल है।

आगे की राह

एनटीईपी जम्मू और एसएमवीडीएसबी के बीच यह सहयोग भविष्य में भी जारी रहने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पोषण सहायता कार्यक्रमों का नियमित और निरंतर क्रियान्वयन टीबी उपचार की सफलता दर को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है। यह साझेदारी अन्य धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 270 बास्केट का यह एकमुश्त वितरण किस हद तक टिकाऊ और नियमित सहयोग में बदलेगा। टीबी उपचार महीनों तक चलता है और पोषण की ज़रूरत निरंतर होती है — एकबारगी वितरण प्रतीकात्मक तो है, पर पर्याप्त नहीं। यदि एसएमवीडीएसबी जैसी समृद्ध संस्थाएँ इस सहयोग को मासिक या त्रैमासिक चक्र में संस्थागत रूप दें, तो यह जम्मू-कश्मीर के टीबी उन्मूलन लक्ष्य को वास्तविक गति दे सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'निक्षय मित्र' पहल क्या है?
'निक्षय मित्र' केंद्र सरकार के 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत एक पहल है, जिसमें सरकारी, गैर-सरकारी और धार्मिक संस्थाएँ टीबी मरीजों को पोषण, आजीविका और भावनात्मक सहयोग प्रदान करती हैं। इसका उद्देश्य उपचार के दौरान मरीजों को समग्र सहायता देकर इलाज की सफलता दर बढ़ाना है।
वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने कितने मरीजों की मदद की?
एसएमवीडीएसबी ने कटरा ब्लॉक और रियासी जिले के टीबी मरीजों के लिए कुल 270 पोषण युक्त खाद्य बास्केट वितरित किए। ये बास्केट 19 जून 2026 को जम्मू की टीबी रोग अधिकारी डॉ. ज्योति जॉली को सौंपे गए।
टीबी मरीजों के लिए पोषण सहायता क्यों ज़रूरी है?
टीबी उपचार के दौरान पर्याप्त पोषण मरीज की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने और दवाओं की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है। कुपोषण टीबी के उपचार को जटिल बना सकता है और दवा-प्रतिरोध (drug resistance) का जोखिम बढ़ा सकता है।
एसएमवीडीएसबी क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड अगस्त 1986 में स्थापित एक वैधानिक स्वायत्त संस्था है, जो जम्मू-कश्मीर के कटरा में माता वैष्णो देवी मंदिर के प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं की देखरेख करती है। इसके पदेन अध्यक्ष जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल होते हैं।
'टीबी मुक्त जम्मू-कश्मीर' लक्ष्य में यह पहल कैसे सहायक है?
यह पहल सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से पूरक बनाती है, जो 'टीबी मुक्त जम्मू-कश्मीर' के व्यापक लक्ष्य की दिशा में सामुदायिक भागीदारी को मज़बूत करती है। एनटीईपी जम्मू और स्टेट टीबी सेल ने इस साझेदारी को आगे जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है।
राष्ट्र प्रेस
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