वलसाड में ₹1.46 करोड़ की साइबर ठगी: फर्जी ट्रेडिंग कंपनी और व्हाट्सऐप ग्रुप से जाल, दो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के वलसाड में शेयर बाज़ार में मोटे मुनाफे का प्रलोभन देकर ₹1,46,75,000 की साइबर ठगी करने के मामले में वलसाड साइबर क्राइम पुलिस ने 12 सितंबर 2026 को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान भार्गव सोलंकी और मेहुल कछुआ के रूप में हुई है, जो बनासकांठा जिले के डीसा के मालगढ़ से जुड़े हैं। पुलिस के अनुसार, ठगी गई रकम में से ₹18.70 लाख कछुआ के बैंक खाते में जमा पाए गए।
ठगी का तरीका: फर्जी कंपनी और व्हाट्सऐप ग्रुप का जाल
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने 'बी125-वेलदी विजन वीआईपी सर्कल' और '460-वेलदी विजन वीआईपी सर्कल' नाम से दो व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए थे। इन ग्रुपों के ज़रिए शिकायतकर्ता खुशरू डाली पेटीगारा को संस्थागत ट्रेडिंग के माध्यम से शेयरों की बल्क खरीद-बिक्री से असाधारण मुनाफे का झाँसा दिया गया।
आरोपियों ने 'वेलदी इन ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक फर्जी कंपनी की पहचान बनाई और पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों में ₹1,46,75,000 ट्रांसफर करने के लिए उकसाया। एक नकली ट्रेडिंग ऐप में निवेश पर काल्पनिक मुनाफा दिखाया जाता रहा। जब पीड़ित ने रकम निकालने की कोशिश की, तो उनसे 15 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन की माँग की गई — यह कहते हुए कि यह उनके बैलेंस से काट लिया जाएगा। इसी क्षण पेटीगारा को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया।
जाँच का घटनाक्रम और पहली गिरफ्तारी
जाँच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले नरेंद्र माली को गिरफ्तार किया था, जिसके बैंक खाते में ठगी की रकम का एक हिस्सा आया था। पूछताछ में माली ने खुलासा किया कि उसने अपने खाते से पैसा निकालकर सोलंकी, टिंकेश पढियार और कछुआ को दे दिया था।
पुलिस ने तीनों की तलाश में डीसा और राजस्थान में कई बार छापेमारी की, लेकिन शुरू में वे हाथ नहीं आए। इसके बाद जाँचकर्ताओं ने आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड, रिश्तेदारों के फोन डेटा, सोशल मीडिया गतिविधि और मुखबिरों से मिली सूचनाओं का गहन विश्लेषण किया।
गिरफ्तारी की रणनीति: त्योहार की सूचना से मिला सुराग
स्थानीय सूत्रों को सक्रिय करने के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि सोलंकी और कछुआ भादरवा बीज का पर्व मनाने के लिए 12 सितंबर को मालगढ़ स्थित अपने घर लौटेंगे। इसी सूचना पर साइबर क्राइम टीम ने दोनों को दबोच लिया। गौरतलब है कि यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और नकली ट्रेडिंग ऐप का इस्तेमाल कर निवेशकों को निशाना बनाते हैं।
कानूनी कार्रवाई और रकम वापसी
वलसाड साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 336(2), 336(3), 338, 340(2), 316(2), 319(2), 318(4) और 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने 1930 साइबर हेल्पलाइन से संपर्क कर रकम वापसी की प्रक्रिया शुरू की और अब तक पीड़ित को ₹53,97,797 वापस दिलाए जा चुके हैं।
पुलिस की जनता से अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आने वाले निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहें। 'रोज़ाना मुनाफा', 'गारंटीड रिटर्न', 'पैसा डबल' और 'वीआईपी ट्रेडिंग ग्रुप' जैसे प्रलोभनों में न फँसें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड न करें और ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या बैंक विवरण किसी से साझा न करें। निवेश से पहले कंपनी, ब्रोकर और सलाहकार का भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) पंजीकरण अवश्य जाँच लें। फिलहाल टिंकेश पढियार की तलाश अभी जारी है और पुलिस आगे की जाँच कर रही है।