20 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गिर पूर्व वन विभाग का सख्त अभियान: 4 महीनों में 75 अपराध दर्ज, ₹13.30 लाख से अधिक जुर्माना वसूला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गिर पूर्व वन विभाग का सख्त अभियान: 4 महीनों में 75 अपराध दर्ज, ₹13.30 लाख से अधिक जुर्माना वसूला

सारांश

गिर पूर्व वन विभाग ने 4 महीनों में 75 अपराध दर्ज कर ₹13.30 लाख से अधिक जुर्माना वसूला है। शिकार, अवैध प्रवेश, लकड़ी तस्करी और प्लास्टिक प्रदूषण — सभी पर शिकंजा कसा गया है। एशियाई सिंहों के एकमात्र प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए यह अब तक का सबसे व्यापक कानूनी अभियान है।

मुख्य बातें

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के निर्देश पर गिर पूर्व वन विभाग ने पिछले 4 महीनों में 75 अपराध दर्ज किए।
कुल ₹13.30 लाख से अधिक का दंड वसूला गया; अभयारण्य में अनधिकृत प्रवेश के 38 मामलों में ₹7,76,400 जुर्माना।
वन्यजीव शिकार के 8 मामले दर्ज — 4 में अदालती कार्यवाही जारी, 4 में ₹2,20,000 जुर्माना वसूला।
अवैध लकड़ी हेराफेरी के 16 मामलों में ₹3,03,000 और प्लास्टिक/अवैध पशु चराई के 17 मामलों में ₹32,500 दंड।
उप वन संरक्षक कार्यालय, गिर-पूर्व, अमरेली ने नागरिकों से सोशल मीडिया पर वन्यजीव उल्लंघन की सूचना देने की अपील की।

गिर पूर्व वन विभाग ने एशियाई सिंहों और वन संपदा की सुरक्षा के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघनकर्ताओं के विरुद्ध व्यापक कानूनी अभियान छेड़ा है। वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के निर्देश पर पिछले 4 महीनों में 75 अपराध दर्ज किए गए हैं और ₹13.30 लाख से अधिक का दंड वसूला गया है।

मुख्य घटनाक्रम

अभयारण्य क्षेत्र में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने वालों के विरुद्ध 38 अपराध दर्ज किए गए हैं और लगभग ₹7,76,400 का दंड लगाया गया है। इनमें वन्यजीवों के शिकार से जुड़े 8 अपराध भी शामिल हैं — जिनमें से 4 मामलों में अदालती कार्यवाही जारी है, जबकि शेष 4 मामलों में ₹2,20,000 का जुर्माना वसूला जा चुका है।

वैध अनुमति या ट्रांजिट पास के बिना लकड़ी की अवैध हेराफेरी करने वाले 16 अपराधियों से ₹3,03,000 का दंड वसूला गया है। इसके अतिरिक्त, अभयारण्य क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा फेंकने और आरक्षित चारागाह में अवैध पशु चराने के 17 मामलों में ₹32,500 का जुर्माना लगाया गया है।

विभाग की स्पष्ट चेतावनी

गिर पूर्व वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सिंह या किसी भी वन्यजीव को प्रताड़ित करना, अवैध शिकार, प्रतिबंधित क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश और वन संपदा की अवैध हेराफेरी — इनमें से किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि गिर अभयारण्य एशियाई सिंहों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है, और इसकी पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता को देखते हुए यह अभियान विशेष महत्त्व रखता है।

नागरिकों से अपील

विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि उन्हें वन्यजीवों की प्रताड़ना, अवैध शिकार, प्रतिबंधित वन क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश या लकड़ी की चोरी जैसी गतिविधियाँ दिखाई दें, तो वे तत्काल निकटस्थ वन विभाग कार्यालय या स्टाफ को सूचित करें।

उप वन संरक्षक कार्यालय, गिर-पूर्व, अमरेली ने विशेष रूप से अपील की है कि सोशल मीडिया पर सिंह या अन्य वन्यजीवों की प्रताड़ना, अवैध लायन शो/दर्शन, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश या शिकार से संबंधित कोई रील, फोटो या वीडियो दिखे, तो उसकी जानकारी भी तुरंत दें।

आम जनता पर असर

यह अभियान न केवल शिकारियों और तस्करों को निशाना बनाता है, बल्कि उन पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को भी सचेत करता है जो अनजाने में या जानबूझकर प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं। प्लास्टिक प्रदूषण और अवैध पशु चराई जैसी गतिविधियाँ भी अब दंडनीय कार्रवाई के दायरे में हैं।

क्या होगा आगे

विभाग के अनुसार, यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और शिकार से जुड़े जिन 4 मामलों में अदालती कार्यवाही चल रही है, उनमें जल्द फैसले की उम्मीद है। विभाग की यह सख्ती गिर के पारिस्थितिकी तंत्र की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह अभियान दीर्घकालिक निवारक प्रभाव डालेगा या केवल एक मौसमी कार्रवाई बनकर रह जाएगा। गिर अभयारण्य में बार-बार होने वाली अवैध घुसपैठ और शिकार की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि सिर्फ जुर्माने से समस्या का समाधान नहीं होगा — स्थानीय समुदायों की भागीदारी और निगरानी तंत्र को मजबूत करना उतना ही ज़रूरी है। सोशल मीडिया पर अवैध लायन शो की रीलों का वायरल होना यह दर्शाता है कि डिजिटल निगरानी अब वन्यजीव संरक्षण का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिर पूर्व वन विभाग के अभियान में क्या-क्या कार्रवाई की गई है?
पिछले 4 महीनों में गिर पूर्व वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन के 75 अपराध दर्ज किए और ₹13.30 लाख से अधिक का जुर्माना वसूला है। इसमें अवैध प्रवेश, शिकार, लकड़ी तस्करी और प्लास्टिक प्रदूषण के मामले शामिल हैं।
गिर अभयारण्य में अवैध प्रवेश पर कितना जुर्माना लगाया गया?
अभयारण्य क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश के 38 मामलों में लगभग ₹7,76,400 का दंड लगाया गया है। यह कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत की गई है।
एशियाई सिंहों के शिकार के कितने मामले दर्ज हुए हैं?
गिर पूर्व वन विभाग ने वन्यजीव शिकार के 8 मामले दर्ज किए हैं। इनमें से 4 मामलों में अदालती कार्यवाही जारी है और शेष 4 में ₹2,20,000 का जुर्माना वसूला जा चुका है।
वन्यजीव उल्लंघन की सूचना कहाँ दें?
नागरिक वन्यजीव उल्लंघन की सूचना निकटस्थ वन विभाग कार्यालय या स्टाफ को दे सकते हैं। सोशल मीडिया पर संबंधित रील, फोटो या वीडियो की जानकारी उप वन संरक्षक कार्यालय, गिर-पूर्व, अमरेली को दी जा सकती है।
क्या गिर अभयारण्य में प्लास्टिक फेंकना भी दंडनीय है?
हाँ, अभयारण्य क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा फेंकने और आरक्षित चारागाह में अवैध पशु चराने के 17 मामलों में ₹32,500 का दंड वसूला गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी गतिविधियाँ बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले