विदिशा में 76 हज़ार हेक्टेयर धान संकट में, जीतू पटवारी ने CM यादव को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 12 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर विदिशा जिले में 76 हज़ार हेक्टेयर धान की फसल पर मंडरा रहे जल-संकट में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। पटवारी के अनुसार, सामान्य से कहीं कम हुई वर्षा के कारण यह पूरी फसल बर्बाद होने की कगार पर है, जबकि किसान हलाली बांध से नहरों के ज़रिए पानी छोड़े जाने की गुहार लगा रहे हैं।
कितनी कम हुई बारिश
पटवारी ने पत्र में तहसीलवार वर्षा के आँकड़े पेश किए। उनके अनुसार विदिशा तहसील में सामान्य से 29 प्रतिशत, गुलाबगंज में 42 प्रतिशत, कुरवाई में 31 प्रतिशत और शमशाबाद में 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि जिले की लगभग हर तहसील में नमी का गंभीर अभाव है, जो धान जैसी जल-निर्भर फसल के लिए घातक साबित हो सकता है।
हलाली बांध में पानी है, फिर भी किसान प्यासे
पटवारी ने तर्क दिया कि हलाली बांध में इस समय 231.87 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध है। बांध का वर्तमान जलस्तर 459.29 मीटर है, जबकि पूर्ण जलभराव स्तर 459.61 मीटर है — अर्थात जलाशय लगभग भरा हुआ है। बावजूद इसके, नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाने का निर्णय समय पर नहीं लिया गया, जो उनके अनुसार सिंचाई विभाग और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शिवराज चौहान के क्षेत्र में किसानों की पुकार
कांग्रेस नेता ने इस मामले में एक राजनीतिक कोण भी उठाया। उन्होंने कहा कि विदिशा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र है। पटवारी का कहना है कि जब केंद्रीय कृषि मंत्री के अपने संसदीय क्षेत्र में किसानों को सिंचाई के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो राज्य के अन्य हिस्सों की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने पत्र की प्रति सोशल मीडिया पर साझा करते हुए भाजपा सरकार के 'कृषि कल्याण वर्ष' के दावों पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस की माँग और आगे का रास्ता
पटवारी ने मुख्यमंत्री यादव से माँग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार खरीफ़ सीज़न में कृषि उत्पादन के नए रिकॉर्ड के दावे कर रही है। यदि राज्य सरकार शीघ्र कदम नहीं उठाती, तो विदिशा के किसानों का असंतोष व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।