MP में कम बारिश से फसल संकट: जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से माँगा किसानों के लिए राहत पैकेज
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 6 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश के कम वर्षा वाले क्षेत्रों — विशेषकर इंदौर और उज्जैन संभाग — के किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज घोषित करने की माँग की है। पटवारी के अनुसार इस वर्ष असमान वर्षा के कारण खरीफ फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है और आगामी रबी सीजन पर भी खतरा मँडरा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि इस वर्ष बारिश बेहद असमान रही है। इंदौर-उज्जैन सहित प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा प्रभाव खेती की नमी, खरीफ फसल, जलस्रोतों और आगामी रबी फसल पर पड़ने की आशंका है।
पटवारी ने माँग की है कि सरकार वर्षा के साथ-साथ फसल, मिट्टी की नमी, जलस्रोत और भूजल की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कराए और प्रभावित क्षेत्रों को औपचारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करे।
किसानों के लिए माँगी गई राहत
पटवारी ने राज्य सरकार के सामने कई ठोस माँगें रखी हैं। उनके अनुसार तहसीलवार वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर फसल नुकसान के अनुपात में प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा प्रभावित किसानों के फसल बीमा दावों का तत्काल निपटारा और भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी माँग की कि किसानों के अल्पकालीन कृषि ऋण की वसूली स्थगित की जाए और ब्याज में राहत दी जाए। अंतिम सर्वेक्षण पूरा होने तक प्रभावित किसानों को अंतरिम राहत राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
रबी सीजन और पेयजल की चिंता
पटवारी ने आगामी रबी सीजन के लिए भी तैयारी की माँग की है। उनके अनुसार प्रभावित किसानों को बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि आदानों पर विशेष सहायता दी जाए। साथ ही प्रभावित गाँवों में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, क्योंकि कम वर्षा से जलस्रोत भी प्रभावित हुए हैं।
पटवारी का सरकार को सीधा संदेश
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 'यह केवल बारिश के आँकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों की आजीविका और आने वाले कृषि मौसम का सवाल है।' पटवारी ने सरकार को आगाह किया कि वह 'कागजी औसत के पीछे छिपने के बजाय जमीन पर किसान की वास्तविक स्थिति को आधार बनाए और समयबद्ध राहत सुनिश्चित करे।'
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कृषि आबादी की बड़ी हिस्सेदारी है और खरीफ-रबी दोनों सीजन राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक होते हैं। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।