मध्य प्रदेश में 537 बीज नमूने अमानक: जीतू पटवारी ने शिवराज को लिखा पत्र, किसानों को मुआवजे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 13 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर प्रदेश में 537 बीज नमूने अमानक पाए जाने पर गहरी चिंता जताई और प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा देने की माँग की। पटवारी का कहना है कि अमानक बीजों के कारण किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों संकट में पड़ गई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पटवारी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2026-27 में 15 सितंबर तक देशभर में जाँचे गए 93,867 बीज नमूनों में से 4,006 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। राज्यवार आँकड़ों के अनुसार, इनमें महाराष्ट्र के 2,360, मध्य प्रदेश के 537, उत्तर प्रदेश के 303 और छत्तीसगढ़ के 234 नमूने शामिल हैं। इसी अवधि में देशभर में बीज बिक्री रोकने के 2,362 आदेश जारी हुए और 1,116 मामले दर्ज किए गए।
किसानों पर असर
पटवारी ने कहा कि देश का किसान पहले ही महँगी खाद, कीटनाशक, बढ़ती कृषि लागत और फसलों के उचित दाम न मिलने की समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में यदि बाज़ार से खरीदा गया बीज ही गुणवत्तापूर्ण नहीं निकला, तो उसकी पूरी मेहनत, निवेश और आजीविका दांव पर लग जाती है। उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय में आया है जब बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था पहले से मौजूद होने के बावजूद अमानक मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
सरकार से माँगें
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने माँग की कि खराब बीजों के कारण फसल बर्बाद होने पर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही दोषी बीज निर्माता कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और की गई कार्रवाई को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर तत्काल समीक्षा की भी माँग रखी।
शिवराज पर विशेष जिम्मेदारी
पटवारी ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अब देश के केंद्रीय कृषि मंत्री हैं। ऐसे में किसानों को घटिया बीजों से होने वाले नुकसान से बचाना और उन्हें न्याय दिलाना केंद्र सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। गौरतलब है कि केवल अच्छी फसल उगाने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है — सरकार को गुणवत्तापूर्ण बीज की गारंटी और नुकसान की भरपाई की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
आगे क्या होगा
पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री से आग्रह किया है कि इस विषय पर तत्काल राष्ट्रीय समीक्षा कराई जाए और किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान सुनिश्चित किए जाएँ। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है और प्रभावित किसानों के लिए राहत के क्या उपाय किए जाते हैं।