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विदिशा गणेश मंदिर रेलिंग चोरी विवाद: NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने पुलिस को घेरा

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विदिशा गणेश मंदिर रेलिंग चोरी विवाद: NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने पुलिस को घेरा

सारांश

विदिशा के बाढ़ वाले गणेश मंदिर की सरकारी रेलिंग चोरी के आरोप और पुलिस के खंडन के बीच NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने एक्स पर तस्वीर साझा कर पुलिस को जवाबदेही का आईना दिखाया — करदाताओं के पैसे और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा पर बड़े सवाल उठाते हुए।

मुख्य बातें

विदिशा के बाढ़ वाले गणेश मंदिर से मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की सरकारी रेलिंग चोरी होने का आरोप लगाया गया।
NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने 20 अगस्त को एक्स पर रेलिंग की तस्वीर साझा कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
विदिशा सीएसपी अतुल कुमार सिंह ने कहा कि 30 जुलाई को जाँच में रेलिंग मौके पर मौजूद पाई गई और रिपोर्ट सबमिट कर दी गई।
कानूनगो ने पर्यटन विभाग से संपर्क न करने और करदाताओं के पैसे की जवाबदेही न लेने पर पुलिस को आड़े हाथों लिया।
दोनों पक्षों के दावों के बीच विरोधाभास बना हुआ है; पर्यटन विभाग का आधिकारिक बयान अभी आना बाकी है।

विदिशा के प्रसिद्ध बाढ़ वाले गणेश मंदिर से मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा स्थापित सरकारी रेलिंग चोरी होने के आरोपों पर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने 20 अगस्त को पुलिस की जाँच प्रक्रिया पर तीखे सवाल उठाए, जबकि पुलिस का कहना है कि 30 जुलाई को की गई जाँच में रेलिंग मौके पर मौजूद पाई गई थी।

मामले का घटनाक्रम

शिकायत पुलिस अधीक्षक के माध्यम से दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पर्यटन विभाग की रेलिंग मंदिर परिसर से गायब हो गई है। विदिशा सीएसपी अतुल कुमार सिंह ने अपने वीडियो बयान में कहा कि जाँच दल ने मंदिर के पुजारी का बयान लिया और अन्य लोगों से पूछताछ की। उनके अनुसार रेलिंग अपनी जगह पर लगी हुई पाई गई और जाँच रिपोर्ट सबमिट कर दी गई है।

कानूनगो ने उठाए सवाल

कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सीएसपी सिंह के वीडियो को रिपोस्ट करते हुए उनसे सीधे पूछा कि क्या उन्होंने मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग से संपर्क किया है, जिसने जनता के पैसे से यह रेलिंग लगवाई थी। उन्होंने रेलिंग की एक तस्वीर भी साझा की।

कानूनगो ने कहा, 'कृपया अपने एयर-कंडीशंड दफ्तर से बाहर निकलें और कुछ वास्तविक काम करें। पता लगाएं कि वास्तव में इस संपत्ति का निर्माण किसने किया, किसके अधिकार क्षेत्र में किया गया और करदाताओं के खून-पसीने की कमाई का कितना हिस्सा इस पर खर्च हुआ।'

जवाबदेही पर ज़ोर

कानूनगो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता का पैसा आम नागरिकों के परिश्रम से अर्जित होता है और इसके लिए बहाने नहीं, जवाबदेही होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस का पक्ष

पुलिस के अनुसार 30 जुलाई को की गई जाँच में रेलिंग मौके पर मौजूद थी और जाँच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी गई है। हालाँकि, कानूनगो द्वारा साझा की गई तस्वीर ने इस दावे पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों पक्षों के बीच यह विरोधाभास अभी तक सुलझा नहीं है।

आगे की स्थिति

NHRC सदस्य के सार्वजनिक हस्तक्षेप के बाद यह मामला अब व्यापक ध्यान आकर्षित कर रहा है। पर्यटन विभाग की भूमिका और सरकारी संपत्ति की जवाबदेही पर स्पष्टता की माँग बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में विभाग का आधिकारिक बयान इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह सार्वजनिक संपत्ति की निगरानी और पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही का बड़ा सवाल है। पुलिस का 'रेलिंग मौजूद है' वाला बयान और NHRC सदस्य की तस्वीर — दोनों एक साथ सच नहीं हो सकते; इस विरोधाभास की स्वतंत्र जाँच ज़रूरी है। पर्यटन विभाग की चुप्पी भी उतनी ही संदिग्ध है — जिस विभाग ने करदाताओं के पैसे से रेलिंग लगवाई, उसे स्वयं आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। NHRC सदस्य का सोशल मीडिया पर हस्तक्षेप संस्थागत निगरानी की कमी को उजागर करता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदिशा गणेश मंदिर रेलिंग विवाद क्या है?
विदिशा के बाढ़ वाले गणेश मंदिर में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा लगाई गई सरकारी रेलिंग चोरी होने का आरोप लगाया गया। NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस मामले में पुलिस की जाँच पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस का दावा है कि रेलिंग मौके पर मौजूद है।
प्रियांक कानूनगो ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
NHRC सदस्य कानूनगो ने एक्स पर रेलिंग की तस्वीर साझा कर पुलिस से पूछा कि क्या उन्होंने पर्यटन विभाग से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि करदाताओं के पैसे से बनी संपत्ति की जवाबदेही होनी चाहिए और पुलिस को वास्तविक जाँच करनी चाहिए।
विदिशा पुलिस ने जाँच में क्या पाया?
सीएसपी अतुल कुमार सिंह के अनुसार 30 जुलाई को की गई जाँच में मंदिर की रेलिंग अपनी जगह पर लगी हुई मिली। पुजारी का बयान लिया गया और अन्य लोगों से पूछताछ के बाद जाँच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी गई।
इस मामले में पर्यटन विभाग की क्या भूमिका है?
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने ही जनता के पैसे से गणेश मंदिर में रेलिंग लगवाई थी। कानूनगो ने पुलिस से पूछा है कि क्या उन्होंने विभाग से संपर्क किया, लेकिन अब तक पर्यटन विभाग का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
NHRC सदस्य का इस मामले में हस्तक्षेप क्यों महत्वपूर्ण है?
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य का सीधे सोशल मीडिया पर पुलिस को जवाबदेह ठहराना सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता का व्यापक सवाल उठाता है। यह मामला अब केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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