विजय लक्ष्मी पंडित जयंती 2025: खड़गे समेत कांग्रेस नेताओं ने UN महासभा की पहली महिला अध्यक्ष को किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष विजय लक्ष्मी पंडित की जयंती पर मंगलवार, 18 अगस्त को कांग्रेस नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर युवा नेताओं तक, पार्टी ने एकजुट होकर इस ऐतिहासिक विभूति की विरासत को याद किया।
खड़गे की श्रद्धांजलि
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'स्वतंत्रता सेनानी और प्रतिष्ठित राजनयिक विजय लक्ष्मी पंडित को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं।' उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन की अग्रदूत के रूप में वह स्वतंत्रता से पहले भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री बनीं और बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष बनने वाली विश्व की पहली महिला के रूप में इतिहास रचा। खड़गे के अनुसार, 'सार्वजनिक सेवा, साहस और नेतृत्व से भरा उनका जीवन आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।'
युवा कांग्रेस और वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया
भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि विजय लक्ष्मी पंडित ने वैश्विक मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया और भारतीय महिलाओं की नेतृत्व क्षमता का ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने अपने एक्स पोस्ट में उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित किया। तन्खा ने लिखा कि वह 'सिर्फ पंडित नेहरू की बहन होने से कहीं आगे थीं' और 1977 में आपातकाल के बाद वह इंदिरा गांधी और कांग्रेस के विरुद्ध विपक्षी अभियान दल का हिस्सा बनी थीं।
विजय लक्ष्मी पंडित: एक ऐतिहासिक विरासत
विजय लक्ष्मी पंडित का जन्म 1900 में हुआ था और 1990 में उनका निधन हुआ। वह स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ — तीनों भूमिकाओं में अग्रणी रहीं। 1953 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष बनकर वैश्विक इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। यह ऐसे समय में आया जब अंतरराष्ट्रीय राजनय में महिलाओं की उपस्थिति नगण्य थी। वह पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहन और नेहरू-गांधी परिवार की सदस्य थीं।
व्यक्तिगत स्मृतियाँ
राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उन्होंने विजय लक्ष्मी पंडित को दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर (CLC) में छात्र के रूप में सुना था और मसूरी के पास उनके सेवानिवृत्ति कॉटेज में अपने माता-पिता के साथ उनसे भेंट भी की थी। यह व्यक्तिगत स्मरण इस बात का प्रमाण है कि उनका प्रभाव केवल राजनीतिक इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रहा।
आगे का संदर्भ
विजय लक्ष्मी पंडित की जयंती हर वर्ष उन महिलाओं की याद दिलाती है जिन्होंने स्वतंत्रता-पूर्व और स्वतंत्रता-पश्चात भारत में सार्वजनिक जीवन की राह खोली। उनकी विरासत आज भी भारतीय कूटनीति और महिला नेतृत्व की चर्चा में प्रासंगिक बनी हुई है।