बिहार: लौरिया विधायक विनय बिहारी अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर, बाढ़ राहत में लापरवाही का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिमी चंपारण जिले के लौरिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनय बिहारी ने 29 सितंबर को बेतिया स्थित समाहरणालय परिसर में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना दिया। बाढ़ राहत कार्यों में कथित लापरवाही से नाराज विधायक ने आरोप लगाया कि करीब एक महीने से बाढ़ की चपेट में आए इस क्षेत्र के पीड़ितों को अब तक पर्याप्त सहायता नहीं मिली है।
मुख्य घटनाक्रम
विधायक विनय बिहारी के अनुसार, वे दोपहर 12 बजे से जिलाधिकारी से मुलाकात की प्रतीक्षा में थे, लेकिन भेंट न हो सकी। इसके बाद उन्होंने समाहरणालय परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धरना सरकार-विरोध के लिए नहीं, बल्कि बाढ़पीड़ित जनता की माँगें मनवाने के लिए है।
विधायक ने बताया कि इस मुद्दे पर वे मुख्यमंत्री से चार बार और संबंधित मंत्री से दो बार मिल चुके हैं। इसके अलावा जिलाधिकारी से दर्जनों बार बात हो चुकी है, फिर भी जमीनी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया।
बाढ़ की विकराल स्थिति
लौरिया क्षेत्र में सिकराहना, पंडई और गंडक समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि से व्यापक तबाही हुई है। योगापट्टी इलाका गंडक नदी से और मरिया, मटरिया, साठी तथा परसौनी सहित कई गाँव पंडई नदी के कारण जलमग्न हैं। विधायक ने बताया कि फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है और बड़े पैमाने पर खेत पानी में डूबे हुए हैं।
राहत में लापरवाही के आरोप
विधायक विनय बिहारी ने आरोप लगाया कि प्रशासन बार-बार यह कहकर टाल रहा है कि बाढ़पीड़ितों को दी जाने वाली ₹7,000 की सहायता राशि वितरित करने की स्थिति अभी नहीं बनी है और क्षेत्र में उस स्तर की बाढ़ नहीं आई है। उन्होंने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे स्वयं प्रभावित इलाकों में मौजूद हैं और हालात बेहद गंभीर हैं।
विधायक के मुताबिक, राहत के नाम पर अब तक मुख्य रूप से प्लास्टिक शीट ही वितरित की गई है, जो इस आपदा की तुलना में बेहद अपर्याप्त है। उन्होंने कहा, 'जनता बाढ़ से बहुत परेशान है और जो व्यवस्था है, उससे मैं संतुष्ट नहीं हूँ। जैसी आपदा है, वैसी व्यवस्था नहीं है। मेरे पास भी इसके सिवा कोई रास्ता नहीं है।'
मुख्यमंत्री के दौरे की माँग
विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री ने संभवतः कई अन्य जिलों का दौरा किया है, लेकिन लौरिया और पश्चिमी चंपारण के बाढ़प्रभावित क्षेत्रों में अब तक नहीं पहुँचे हैं। उन्होंने आग्रह किया कि मुख्यमंत्री स्वयं इन इलाकों में आकर जमीनी हकीकत देखें और पीड़ितों को उचित मुआवजा व राहत दिलाएँ।
विधायक ने कहा, 'मुझे लगा कि शायद मेरे बैठने से हमारी देवतुल्य जनता को कुछ मिल जाएगा।' यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में बाढ़ प्रबंधन और राहत वितरण को लेकर सरकार पर विपक्ष का दबाव पहले से बना हुआ है। गौरतलब है कि पश्चिमी चंपारण जैसे सीमावर्ती जिले हर साल नेपाल से आने वाली नदियों के कारण बाढ़ की चपेट में आते हैं, फिर भी दीर्घकालिक समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
आगे की उम्मीद
विधायक विनय बिहारी ने कहा कि अब उन्हें मुख्यमंत्री के आने का इंतजार है और उम्मीद है कि बाढ़पीड़ितों की समस्याओं का जल्द समाधान होगा। यदि प्रशासन ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो यह मामला बिहार की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।