29 सितंबर 2026
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बिहार: लौरिया विधायक विनय बिहारी अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर, बाढ़ राहत में लापरवाही का आरोप

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बिहार: लौरिया विधायक विनय बिहारी अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर, बाढ़ राहत में लापरवाही का आरोप

सारांश

अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे लौरिया विधायक विनय बिहारी ने पश्चिमी चंपारण में बाढ़ राहत की बदहाली उजागर की — एक महीने से जलमग्न गाँव, ₹7,000 की सहायता राशि अटकी, और राहत के नाम पर सिर्फ प्लास्टिक शीट।

मुख्य बातें

लौरिया विधायक विनय बिहारी ने 29 सितंबर को बेतिया समाहरणालय परिसर में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना दिया।
पश्चिमी चंपारण में सिकराहना , पंडई और गंडक नदियों से करीब एक महीने से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन पर आरोप — बाढ़पीड़ितों को ₹7,000 की सहायता राशि नहीं दी जा रही, राहत में केवल प्लास्टिक शीट वितरित।
विधायक मुख्यमंत्री से चार बार और संबंधित मंत्री से दो बार मिल चुके हैं, फिर भी राहत नहीं।
विधायक ने मुख्यमंत्री से लौरिया और बाढ़प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की माँग की।

पश्चिमी चंपारण जिले के लौरिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनय बिहारी ने 29 सितंबर को बेतिया स्थित समाहरणालय परिसर में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना दिया। बाढ़ राहत कार्यों में कथित लापरवाही से नाराज विधायक ने आरोप लगाया कि करीब एक महीने से बाढ़ की चपेट में आए इस क्षेत्र के पीड़ितों को अब तक पर्याप्त सहायता नहीं मिली है।

मुख्य घटनाक्रम

विधायक विनय बिहारी के अनुसार, वे दोपहर 12 बजे से जिलाधिकारी से मुलाकात की प्रतीक्षा में थे, लेकिन भेंट न हो सकी। इसके बाद उन्होंने समाहरणालय परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धरना सरकार-विरोध के लिए नहीं, बल्कि बाढ़पीड़ित जनता की माँगें मनवाने के लिए है।

विधायक ने बताया कि इस मुद्दे पर वे मुख्यमंत्री से चार बार और संबंधित मंत्री से दो बार मिल चुके हैं। इसके अलावा जिलाधिकारी से दर्जनों बार बात हो चुकी है, फिर भी जमीनी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया।

बाढ़ की विकराल स्थिति

लौरिया क्षेत्र में सिकराहना, पंडई और गंडक समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि से व्यापक तबाही हुई है। योगापट्टी इलाका गंडक नदी से और मरिया, मटरिया, साठी तथा परसौनी सहित कई गाँव पंडई नदी के कारण जलमग्न हैं। विधायक ने बताया कि फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है और बड़े पैमाने पर खेत पानी में डूबे हुए हैं।

राहत में लापरवाही के आरोप

विधायक विनय बिहारी ने आरोप लगाया कि प्रशासन बार-बार यह कहकर टाल रहा है कि बाढ़पीड़ितों को दी जाने वाली ₹7,000 की सहायता राशि वितरित करने की स्थिति अभी नहीं बनी है और क्षेत्र में उस स्तर की बाढ़ नहीं आई है। उन्होंने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे स्वयं प्रभावित इलाकों में मौजूद हैं और हालात बेहद गंभीर हैं।

विधायक के मुताबिक, राहत के नाम पर अब तक मुख्य रूप से प्लास्टिक शीट ही वितरित की गई है, जो इस आपदा की तुलना में बेहद अपर्याप्त है। उन्होंने कहा, 'जनता बाढ़ से बहुत परेशान है और जो व्यवस्था है, उससे मैं संतुष्ट नहीं हूँ। जैसी आपदा है, वैसी व्यवस्था नहीं है। मेरे पास भी इसके सिवा कोई रास्ता नहीं है।'

मुख्यमंत्री के दौरे की माँग

विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री ने संभवतः कई अन्य जिलों का दौरा किया है, लेकिन लौरिया और पश्चिमी चंपारण के बाढ़प्रभावित क्षेत्रों में अब तक नहीं पहुँचे हैं। उन्होंने आग्रह किया कि मुख्यमंत्री स्वयं इन इलाकों में आकर जमीनी हकीकत देखें और पीड़ितों को उचित मुआवजा व राहत दिलाएँ।

विधायक ने कहा, 'मुझे लगा कि शायद मेरे बैठने से हमारी देवतुल्य जनता को कुछ मिल जाएगा।' यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में बाढ़ प्रबंधन और राहत वितरण को लेकर सरकार पर विपक्ष का दबाव पहले से बना हुआ है। गौरतलब है कि पश्चिमी चंपारण जैसे सीमावर्ती जिले हर साल नेपाल से आने वाली नदियों के कारण बाढ़ की चपेट में आते हैं, फिर भी दीर्घकालिक समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।

आगे की उम्मीद

विधायक विनय बिहारी ने कहा कि अब उन्हें मुख्यमंत्री के आने का इंतजार है और उम्मीद है कि बाढ़पीड़ितों की समस्याओं का जल्द समाधान होगा। यदि प्रशासन ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो यह मामला बिहार की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राहत तंत्र हर बार उसी लालफीताशाही में उलझा मिलता है। ₹7,000 की मामूली सहायता राशि भी समय पर न पहुँचना और 'उस स्तर की बाढ़ नहीं' जैसे प्रशासनिक तर्क दर्शाते हैं कि ज़मीनी हकीकत और सरकारी आकलन के बीच की खाई कितनी गहरी है। सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के दौरे और विधायक के धरने के बाद भी यदि राहत वितरण में पारदर्शिता नहीं आई, तो जवाबदेही का तंत्र कहाँ है?
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विधायक विनय बिहारी ने धरना क्यों दिया?
लौरिया विधायक विनय बिहारी ने 29 सितंबर को बेतिया समाहरणालय में धरना दिया क्योंकि पश्चिमी चंपारण के बाढ़प्रभावित इलाकों में एक महीने बाद भी पर्याप्त राहत नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ₹7,000 की सहायता राशि देने से इनकार कर रहा है और राहत के नाम पर केवल प्लास्टिक शीट दी जा रही है।
पश्चिमी चंपारण में किन नदियों से बाढ़ आई है?
पश्चिमी चंपारण में सिकराहना, पंडई और गंडक नदियों के कारण व्यापक बाढ़ आई है। लौरिया क्षेत्र सिकराहना से, योगापट्टी गंडक से और मरिया, मटरिया, साठी, परसौनी सहित कई गाँव पंडई नदी से प्रभावित हैं।
बाढ़पीड़ितों को कितनी सहायता राशि मिलनी चाहिए और क्यों नहीं मिली?
बाढ़पीड़ितों को ₹7,000 की सहायता राशि मिलनी चाहिए, लेकिन विधायक के अनुसार प्रशासन यह कहकर राशि रोक रहा है कि क्षेत्र में उस स्तर की बाढ़ नहीं आई। विधायक ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वे स्वयं प्रभावित इलाकों में मौजूद हैं।
विधायक ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से कितनी बार संपर्क किया?
विधायक विनय बिहारी ने बताया कि वे मुख्यमंत्री से चार बार और संबंधित मंत्री से दो बार मिल चुके हैं। इसके अलावा जिलाधिकारी से दर्जनों बार इस मुद्दे पर बात हो चुकी है, लेकिन जमीनी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया।
क्या विधायक का धरना सरकार-विरोधी है?
विधायक विनय बिहारी ने स्पष्ट किया कि उनका धरना सरकार के विरोध के लिए नहीं, बल्कि बाढ़पीड़ित जनता की माँगें मनवाने के लिए है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के लौरिया दौरे के बाद समस्याओं का समाधान होगा।
राष्ट्र प्रेस
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