विश्व नेत्रदान दिवस 2026: बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने नेत्रदान का आह्वान किया
सारांश
मुख्य बातें
विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर 10 जून 2026 को बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र के शीर्ष नेताओं ने नागरिकों से नेत्रदान का संकल्प लेने और इस महादान के लिए दूसरों को प्रेरित करने की अपील की। इन नेताओं ने एकमत होकर कहा कि मृत्यु के पश्चात नेत्रदान किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति के जीवन में स्थायी रोशनी ला सकता है।
बिहार के नेताओं की अपील
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "विश्व नेत्रदान दिवस पर आइए संकल्प लें कि नेत्रदान कर किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी और नई उम्मीद का संचार करेंगे। आपके द्वारा किया गया एक छोटा सा संकल्प किसी की अंधेरी दुनिया को उजाला दे सकता है।"
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जयसवाल ने कहा कि एक फॉर्म भरने का निर्णय किसी नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा वरदान बन सकता है। उन्होंने लिखा, "मृत्यु के पश्चात भी अपनी आँखों को इस दुनिया में जीवित रखने और किसी को नई जिंदगी देने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है।" बिहार सरकार के मंत्री विजय सिन्हा ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा, "इतना सुंदर संसार आंखों के बिना निर्रथक है।"
राजस्थान के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का संदेश
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, "नेत्रदान महादान है। विश्व नेत्रदान दिवस पर आइए, हम सब संकल्प लें कि अपने नेत्रों से किसी के जीवन को रोशन करेंगे।" राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने भी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि एक निर्णय किसी की अंधेरी दुनिया में नई रोशनी और नई उम्मीद बन सकता है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का आह्वान
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक्स पर लिखा, "आइए, हम यह पक्का करें कि हमारे बाद दूसरों को भी यह अनुभव हो कि दुनिया कितनी खूबसूरत है। इसके लिए, आइए हम अपनी आंखें दान करने का संकल्प लें और इसके साथ ही दूसरों को भी आंखें दान करने के लिए प्रेरित करें।"
नेत्रदान का महत्व और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत में नेत्रहीनता एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। नेत्र बैंकों में कॉर्निया की उपलब्धता और जागरूकता की कमी इस समस्या को और गहरा करती है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर नेत्रदान के प्रति जागरूकता अभियान तेज किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मृत्यु के बाद दान की गई एक जोड़ी आँखें दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को दृष्टि प्रदान कर सकती हैं। नेत्रदान के लिए निकटतम नेत्र बैंक या सरकारी अस्पताल में संपर्क किया जा सकता है। इस दिशा में राजनीतिक नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी जन-जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।