17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

विश्व दुग्ध दिवस 2026: बिहार डेयरी सेक्टर में सरकारी योजनाओं से किसानों की आय और महिला भागीदारी बढ़ी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
विश्व दुग्ध दिवस 2026: बिहार डेयरी सेक्टर में सरकारी योजनाओं से किसानों की आय और महिला भागीदारी बढ़ी

सारांश

विश्व दुग्ध दिवस 2026 पर पटना में बिहार के डेयरी क्षेत्र का जायज़ा लिया गया। कंफेड अध्यक्ष शीर्षत कपिल अशोक के अनुसार, सरकारी योजनाओं ने दूध उत्पादन, किसानों की आय और महिला भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार किया है — ऑपरेशन फ्लड की विरासत को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से जोड़ते हुए।

मुख्य बातें

विश्व दुग्ध दिवस 2026 पर पटना में बिहार के डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियों पर 1 जून को विशेष विमर्श हुआ।
कंफेड अध्यक्ष शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि सरकारी योजनाओं से दूध उत्पादन, ग्रामीण आय और महिला भागीदारी में लगातार वृद्धि हो रही है।
साहीवाल, गिर, रेड सिंधी जैसी देशी नस्लों के साथ हाइब्रिड जर्सी और होल्स्टीन फ्रिजियन को बढ़ावा देने से उत्पादन में सुधार आया।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ने पशुपालकों को साहूकारों पर निर्भरता से मुक्त किया।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन, ई-गोपाला ऐप, AHIDF, पशु बीमा योजना और DBT ने सेक्टर को अधिक संगठित और पारदर्शी बनाया।

पटना में विश्व दुग्ध दिवस 2026 के अवसर पर 1 जून को बिहार के डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर विशेष विमर्श हुआ। बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (कंफेड) के अध्यक्ष एवं आईएएस अधिकारी शीर्षत कपिल अशोक ने पशुपालकों के साथ मिलकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभाव का आकलन किया। अधिकारियों के अनुसार, दूध उत्पादन, ग्रामीण आय और महिलाओं की भागीदारी तीनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

शीर्षत कपिल अशोक ने कहा, 'केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के प्रभाव से डेयरी क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। इन योजनाओं का सीधा लाभ पशुपालकों तक पहुँचा है, जिससे दूध उत्पादन, ग्रामीण आय और महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।' उन्होंने यह भी बताया कि उन्नत नस्लों और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों के प्रसार से उन क्षेत्रों में भी सुधार आया है जहाँ पहले दूध उत्पादन काफी कम था।

नस्ल सुधार और तकनीकी बदलाव

अशोक के अनुसार, हाइब्रिड जर्सी और होल्स्टीन फ्रिजियन के साथ-साथ साहीवाल, गिर और रेड सिंधी जैसी देशी नस्लों को प्रोत्साहन देने के प्रयास सफल रहे हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में डेयरी सहकारिता आंदोलन की नींव ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम से पड़ी थी — गुजरात के आनंद से शुरू हुए इस मॉडल ने देशभर में सहकारी समितियों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। इसी क्रम में बिहार में सुधा, कर्नाटक में नंदिनी, पंजाब में वेरका, हरियाणा में वीटा, उत्तर प्रदेश में पराग और झारखंड में मेघा जैसे ब्रांड विकसित हुए।

पशुपालकों की आवाज़

पशुपालक कुंदन कुमार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को बेहद लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि पशुओं के चारे, दवाइयों और डेयरी संचालन की तत्काल ज़रूरतों में यह योजना आर्थिक सहारा देती है, जिससे साहूकारों पर निर्भरता खत्म हुई है और व्यवसाय सुचारू रूप से चलता है। एक अन्य पशुपालक रविशंकर शर्मा ने बताया कि रियायती दरों पर ऋण और सहायता कार्यक्रमों से कई परिवारों ने डेयरी व्यवसाय का विस्तार किया है और महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सरकारी योजनाओं का असर

पशुपालकों के अनुसार, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, ई-गोपाला ऐप, पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF), किसान क्रेडिट कार्ड, पशु बीमा योजना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने डेयरी क्षेत्र को अधिक संगठित, पारदर्शी और लाभकारी बनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल से दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय दोनों में सुधार दर्ज किया गया है।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत विश्व में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है, और बिहार जैसे राज्यों में सहकारी ढाँचे को मजबूत करना इस स्थिति को और सुदृढ़ कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल एकीकरण और नस्ल सुधार कार्यक्रमों की निरंतरता से ग्रामीण डेयरी अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और महिला उद्यमिता को नई गति मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें सत्यापन-योग्य संख्याओं का अभाव खटकता है — दूध उत्पादन में कितने प्रतिशत वृद्धि हुई, महिला भागीदारी का ठोस आँकड़ा क्या है, यह स्पष्ट नहीं किया गया। ऑपरेशन फ्लड से लेकर आज तक की सहकारी यात्रा प्रेरणादायक है, परंतु सुधा जैसे ब्रांड अभी भी अमूल की तुलना में बाज़ार हिस्सेदारी में काफी पीछे हैं। KCC और DBT जैसी योजनाओं का लाभ वास्तव में सीमांत पशुपालकों तक पहुँच रहा है या नहीं, इसकी स्वतंत्र जाँच ज़रूरी है — सरकारी मंचों पर पशुपालकों के बयान नीतिगत सफलता का पर्याप्त प्रमाण नहीं होते।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व दुग्ध दिवस 2026 पर बिहार में क्या हुआ?
1 जून 2026 को पटना में बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (कंफेड) के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियों और सरकारी योजनाओं के प्रभाव पर चर्चा की गई। कंफेड अध्यक्ष शीर्षत कपिल अशोक और पशुपालकों ने अपने अनुभव साझा किए।
बिहार के डेयरी सेक्टर में किन सरकारी योजनाओं का सबसे अधिक असर पड़ा?
पशुपालकों के अनुसार राष्ट्रीय गोकुल मिशन, ई-गोपाला ऐप, पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), पशु बीमा योजना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ने सबसे अधिक प्रभाव डाला है। इन योजनाओं ने सेक्टर को संगठित, पारदर्शी और लाभकारी बनाया है।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से पशुपालकों को क्या फायदा मिला?
KCC से पशुपालकों को चारे, दवाइयों और डेयरी संचालन की तत्काल ज़रूरतों के लिए आसान ऋण मिलता है। इससे वे साहूकारों पर निर्भरता से मुक्त हुए हैं और उनका व्यवसाय सुचारू रूप से चलता रहता है।
बिहार में डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़ी?
रियायती ऋण और सहायता कार्यक्रमों के कारण कई परिवारों ने डेयरी व्यवसाय का विस्तार किया, जिसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ी है। पशुपालक रविशंकर शर्मा के अनुसार, इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
ऑपरेशन फ्लड और बिहार के सुधा ब्रांड का क्या संबंध है?
गुजरात के आनंद से शुरू हुए ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम ने देशभर में डेयरी सहकारी समितियों के गठन की नींव रखी। इसी मॉडल पर बिहार में सुधा ब्रांड विकसित हुआ, जिसने किसानों को बाज़ार से जोड़ने और बेहतर मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले