विश्व दुग्ध दिवस 2026: बिहार डेयरी सेक्टर में सरकारी योजनाओं से किसानों की आय और महिला भागीदारी बढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
पटना में विश्व दुग्ध दिवस 2026 के अवसर पर 1 जून को बिहार के डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर विशेष विमर्श हुआ। बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (कंफेड) के अध्यक्ष एवं आईएएस अधिकारी शीर्षत कपिल अशोक ने पशुपालकों के साथ मिलकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभाव का आकलन किया। अधिकारियों के अनुसार, दूध उत्पादन, ग्रामीण आय और महिलाओं की भागीदारी तीनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
शीर्षत कपिल अशोक ने कहा, 'केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के प्रभाव से डेयरी क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। इन योजनाओं का सीधा लाभ पशुपालकों तक पहुँचा है, जिससे दूध उत्पादन, ग्रामीण आय और महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।' उन्होंने यह भी बताया कि उन्नत नस्लों और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों के प्रसार से उन क्षेत्रों में भी सुधार आया है जहाँ पहले दूध उत्पादन काफी कम था।
नस्ल सुधार और तकनीकी बदलाव
अशोक के अनुसार, हाइब्रिड जर्सी और होल्स्टीन फ्रिजियन के साथ-साथ साहीवाल, गिर और रेड सिंधी जैसी देशी नस्लों को प्रोत्साहन देने के प्रयास सफल रहे हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में डेयरी सहकारिता आंदोलन की नींव ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम से पड़ी थी — गुजरात के आनंद से शुरू हुए इस मॉडल ने देशभर में सहकारी समितियों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। इसी क्रम में बिहार में सुधा, कर्नाटक में नंदिनी, पंजाब में वेरका, हरियाणा में वीटा, उत्तर प्रदेश में पराग और झारखंड में मेघा जैसे ब्रांड विकसित हुए।
पशुपालकों की आवाज़
पशुपालक कुंदन कुमार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को बेहद लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि पशुओं के चारे, दवाइयों और डेयरी संचालन की तत्काल ज़रूरतों में यह योजना आर्थिक सहारा देती है, जिससे साहूकारों पर निर्भरता खत्म हुई है और व्यवसाय सुचारू रूप से चलता है। एक अन्य पशुपालक रविशंकर शर्मा ने बताया कि रियायती दरों पर ऋण और सहायता कार्यक्रमों से कई परिवारों ने डेयरी व्यवसाय का विस्तार किया है और महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरकारी योजनाओं का असर
पशुपालकों के अनुसार, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, ई-गोपाला ऐप, पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF), किसान क्रेडिट कार्ड, पशु बीमा योजना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने डेयरी क्षेत्र को अधिक संगठित, पारदर्शी और लाभकारी बनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल से दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय दोनों में सुधार दर्ज किया गया है।
आगे की राह
गौरतलब है कि भारत विश्व में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है, और बिहार जैसे राज्यों में सहकारी ढाँचे को मजबूत करना इस स्थिति को और सुदृढ़ कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल एकीकरण और नस्ल सुधार कार्यक्रमों की निरंतरता से ग्रामीण डेयरी अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और महिला उद्यमिता को नई गति मिलेगी।