4 अक्टूबर 2026
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तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर हमला: 'वोट की चोरी हो रही है', ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार को घेरा

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तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर हमला: 'वोट की चोरी हो रही है', ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार को घेरा

सारांश

तेजस्वी यादव ने पटना में चुनाव आयोग को BJP का 'एजेंट' बताया, वोट रिकॉर्ड 45 दिन करने और चयन पैनल से मुख्य न्यायाधीश हटाने पर सवाल उठाए। साथ ही 50 लाख बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़े की मांग की और बिहार सरकार पर दीया आयोजन में ₹100 करोड़ से अधिक खर्च का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव ने 4 अक्टूबर 2026 को पटना में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर BJP का एजेंट होने का आरोप लगाया।
वोट रिकॉर्ड रखने की अवधि एक साल से घटाकर 45 दिन करने और चयन पैनल से मुख्य न्यायाधीश को हटाने पर कड़ा विरोध।
बिहार में करीब 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में; फसल नुकसान के बावजूद किसानों को कोई मुआवज़ा नहीं।
बिहार सरकार पर दीया जलाने के आयोजन में ₹100 करोड़ से अधिक खर्च करने का आरोप।
तेजस्वी ने चेतावनी दी कि विपक्ष इन मुद्दों पर जनता के बीच अभियान चलाएगा और लड़ाई जारी रखेगा।

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने 4 अक्टूबर 2026 को पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग वही करता है जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) चाहती है, और कथित तौर पर वोट की चोरी के ज़रिए लोकतंत्र को कमज़ोर किया जा रहा है।

चुनाव आयोग पर आरोप

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का काम कथित फर्जीवाड़े के ज़रिए BJP को चुनाव जिताना रह गया है। उनके अनुसार, इसी कारण मुख्य चुनाव आयुक्त को विशेष कानूनी संरक्षण दिया गया है, जबकि राष्ट्रपति तक पद छोड़ने के बाद कार्रवाई का सामना कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, 'ज्ञानेश कुमार जैसे लोग आते-जाते रहेंगे, लेकिन असली लड़ाई BJP और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ है।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

चुनावी नियमों में बदलाव पर विरोध

तेजस्वी ने दो प्रमुख बदलावों पर कड़ी आपत्ति जताई। पहला — वोट के रिकॉर्ड रखने की अवधि एक साल से घटाकर 45 दिन कर दी गई है। दूसरा — मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के चयन पैनल से मुख्य न्यायाधीश को हटाकर एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष इन बदलावों के खिलाफ जनता के बीच जाएगा और संघर्ष जारी रखेगा। गौरतलब है कि यह चयन पैनल में परिवर्तन सर्वोच्च न्यायालय के एक पहले के फैसले को पलटने वाला माना जाता है, जिसे तब विपक्ष ने संस्थागत स्वायत्तता पर चोट बताया था।

बिहार में बाढ़ और किसानों की दुर्दशा

तेजस्वी यादव ने बिहार में बाढ़ और सूखे की एक साथ मार झेल रहे किसानों का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, बीच में हुई बारिश से किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुँचा, लेकिन अब तक कोई मुआवज़ा नहीं मिला है। उन्होंने दावा किया कि करीब 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने दीया जलाने के आयोजन पर ₹100 करोड़ से अधिक खर्च कर दिए, जबकि यही राशि बाढ़ पीड़ितों और किसानों को राहत देने में इस्तेमाल हो सकती थी। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को कई पत्र लिखे जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने का उन्होंने आरोप लगाया।

आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरा

राजद नेता ने महंगाई, बेरोज़गारी, गरीबी और बढ़ते अपराध को लेकर भी राज्य एवं केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार का खजाना खाली हो चुका है और राज्य कर्ज़ पर चल रहा है। उनके अनुसार, बेरोज़गारी के कारण आने वाले समय में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर कटाक्ष करते हुए तेजस्वी ने कहा कि 'डबल इंजन' सरकार विकास का दावा करती है, लेकिन सरकार बनने के बाद एक भी ऐसा काम नहीं दिखाया जा सका जिससे आम लोगों को वास्तविक लाभ मिला हो।

आगे की रणनीति

तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि विपक्ष इन मुद्दों पर जनता के बीच जाकर अभियान चलाएगा। उनके शब्दों में, 'हम लोग जनता के बीच जाएंगे, लड़ाई लड़ेंगे और अन्याय के खिलाफ मरते दम तक लड़ेंगे।' बिहार में आगामी चुनावी माहौल के मद्देनज़र यह टकराव और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुआवज़े की माँग और चुनावी प्रक्रिया की आलोचना को एक ही प्रेस वार्ता में मिलाने से संदेश कमज़ोर पड़ता है। असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष इन मुद्दों को संसद या अदालत की बहस तक ले जा पाता है — या ये सिर्फ चुनावी ज़मीन गर्म करने तक सीमित रहेंगे।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग BJP के एजेंडे पर काम करता है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कानूनी संरक्षण देकर जवाबदेही से बचाया गया है। उन्होंने कथित 'वोट की चोरी' को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।
वोट रिकॉर्ड की अवधि 45 दिन क्यों विवादास्पद है?
पहले चुनाव-संबंधी रिकॉर्ड एक साल तक रखने का प्रावधान था, जिसे घटाकर 45 दिन कर दिया गया है। विपक्ष का तर्क है कि इससे चुनावी गड़बड़ियों की जाँच करना मुश्किल हो जाता है और पारदर्शिता घटती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त चयन पैनल में क्या बदलाव हुआ?
तेजस्वी यादव के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए बने चयन पैनल से मुख्य न्यायाधीश को हटाकर एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया है। विपक्ष इसे संस्थागत स्वायत्तता पर सीधा हमला मानता है।
बिहार में बाढ़ की स्थिति कितनी गंभीर है?
तेजस्वी यादव के दावे के अनुसार, करीब 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं और बिहार का बड़ा हिस्सा प्रभावित है। फसल को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन किसानों को अब तक कोई मुआवज़ा नहीं मिला।
तेजस्वी ने बिहार सरकार पर दीया आयोजन को लेकर क्या कहा?
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने दीया जलाने के एक आयोजन पर ₹100 करोड़ से अधिक खर्च कर दिए। उनका कहना था कि यह राशि बाढ़ पीड़ितों और किसानों को राहत देने में लगाई जाती तो कहीं बेहतर होता।
राष्ट्र प्रेस
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