तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर हमला: 'किसके कहने पर धांधली की?' — CEC ज्ञानेश कुमार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने 13 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में कथित तौर पर जनादेश के साथ खिलवाड़ किया गया और लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाया गया। उनकी इस तीखी टिप्पणी ने चुनावी पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस को हवा दे दी है।
तेजस्वी के आरोप और सवाल
तेजस्वी यादव ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'चुनाव आयोग ने किसके कहने पर चुनावों में धांधली की, बेईमानी की, डकैती की?' उन्होंने आगे यह भी पूछा कि आयोग अब अपने पहले के नियमों और फैसलों में बदलाव क्यों कर रहा है। राजद नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव लूटे गए हैं, जनविश्वास का कत्ल और लोकतंत्र की हत्या की गई है।
यह ध्यान देने योग्य है कि ये आरोप अभी तक किसी न्यायिक या स्वतंत्र जाँच एजेंसी द्वारा सत्यापित नहीं हुए हैं। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना
तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे संबोधित करते हुए पूछा कि यदि उनके पूर्व के फैसले सही थे, तो अब उन्हीं नियमों में बदलाव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि या तो पहले के फैसले सही थे या फिर अब लिए जा रहे फैसले — दोनों एक साथ सही नहीं हो सकते। गौरतलब है कि तेजस्वी ने अपनी पोस्ट में CEC के लिए अत्यंत आपत्तिजनक भाषा का भी प्रयोग किया।
SIR और विपक्षी मार्च की पृष्ठभूमि
तेजस्वी यादव स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) को लेकर लगातार सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते रहे हैं। 12 अक्टूबर 2026 को उन्होंने नई दिल्ली में विपक्ष की ओर से सर्वोच्च न्यायालय तक निकाले गए मार्च में भाग लिया था। यह मार्च SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में था और इसमें कई विपक्षी दलों के नेता शामिल थे।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज होती जा रही हैं और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता विपक्ष के लिए एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
राजनीतिक संदर्भ और असर
तेजस्वी यादव की यह टिप्पणी विपक्षी दलों की उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें चुनाव आयोग की भूमिका और स्वायत्तता पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह के आरोप लोकतांत्रिक संवाद को कमज़ोर करते हैं, जबकि तेजस्वी का पक्ष यह है कि जवाबदेही सुनिश्चित करना विपक्ष का संवैधानिक दायित्व है।
इस बयान के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है, खासकर SIR प्रक्रिया और आगामी चुनावों के मद्देनज़र।