13 अक्टूबर 2026
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तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर हमला: 'किसके कहने पर धांधली की?' — CEC ज्ञानेश कुमार से माँगा जवाब

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तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर हमला: 'किसके कहने पर धांधली की?' — CEC ज्ञानेश कुमार से माँगा जवाब

सारांश

तेजस्वी यादव ने एक्स पर चुनाव आयोग को 'धांधलेबाज़' बताते हुए CEC ज्ञानेश कुमार से सीधा सवाल पूछा — अगर पुराने फैसले सही थे, तो बदलाव क्यों? एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट मार्च में हिस्सा ले चुके तेजस्वी का यह हमला बिहार में चुनावी सियासत को नया मोड़ दे रहा है।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव ने 13 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग (ECI) पर कथित धांधली के गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पूछा कि पूर्व के नियमों और फैसलों में बदलाव क्यों किया जा रहा है।
राजद नेता ने आरोप लगाया कि 'चुनाव लूटे गए, जनविश्वास का कत्ल और लोकतंत्र की हत्या की गई।' तेजस्वी 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में SIR के विरोध में विपक्ष के सर्वोच्च न्यायालय मार्च में शामिल हुए थे।
चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने 13 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में कथित तौर पर जनादेश के साथ खिलवाड़ किया गया और लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाया गया। उनकी इस तीखी टिप्पणी ने चुनावी पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस को हवा दे दी है।

तेजस्वी के आरोप और सवाल

तेजस्वी यादव ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'चुनाव आयोग ने किसके कहने पर चुनावों में धांधली की, बेईमानी की, डकैती की?' उन्होंने आगे यह भी पूछा कि आयोग अब अपने पहले के नियमों और फैसलों में बदलाव क्यों कर रहा है। राजद नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव लूटे गए हैं, जनविश्वास का कत्ल और लोकतंत्र की हत्या की गई है।

यह ध्यान देने योग्य है कि ये आरोप अभी तक किसी न्यायिक या स्वतंत्र जाँच एजेंसी द्वारा सत्यापित नहीं हुए हैं। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना

तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे संबोधित करते हुए पूछा कि यदि उनके पूर्व के फैसले सही थे, तो अब उन्हीं नियमों में बदलाव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि या तो पहले के फैसले सही थे या फिर अब लिए जा रहे फैसले — दोनों एक साथ सही नहीं हो सकते। गौरतलब है कि तेजस्वी ने अपनी पोस्ट में CEC के लिए अत्यंत आपत्तिजनक भाषा का भी प्रयोग किया।

SIR और विपक्षी मार्च की पृष्ठभूमि

तेजस्वी यादव स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) को लेकर लगातार सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते रहे हैं। 12 अक्टूबर 2026 को उन्होंने नई दिल्ली में विपक्ष की ओर से सर्वोच्च न्यायालय तक निकाले गए मार्च में भाग लिया था। यह मार्च SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में था और इसमें कई विपक्षी दलों के नेता शामिल थे।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज होती जा रही हैं और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता विपक्ष के लिए एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

राजनीतिक संदर्भ और असर

तेजस्वी यादव की यह टिप्पणी विपक्षी दलों की उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें चुनाव आयोग की भूमिका और स्वायत्तता पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह के आरोप लोकतांत्रिक संवाद को कमज़ोर करते हैं, जबकि तेजस्वी का पक्ष यह है कि जवाबदेही सुनिश्चित करना विपक्ष का संवैधानिक दायित्व है।

इस बयान के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है, खासकर SIR प्रक्रिया और आगामी चुनावों के मद्देनज़र।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे महज़ बयानबाज़ी से परे एक रणनीतिक राजनीतिक कदम बनाता है। हालाँकि, संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह के अप्रमाणित और तीखे व्यक्तिगत आरोप — बिना किसी ठोस साक्ष्य के — विपक्षी जवाबदेही की माँग और संस्थागत अवमानना के बीच की रेखा को धुँधला करते हैं। असली सवाल यह है कि क्या ये आरोप किसी न्यायिक या स्वतंत्र जाँच की ओर ले जाएँगे, या फिर चुनावी मौसम में राजनीतिक शोर बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
तेजस्वी यादव ने 13 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग पर कथित धांधली, बेईमानी और जनादेश से खिलवाड़ के आरोप लगाए। उन्होंने पूछा कि आयोग किसके निर्देश पर अपने पुराने नियमों और फैसलों में बदलाव कर रहा है।
तेजस्वी यादव ने CEC ज्ञानेश कुमार पर क्या सवाल उठाए?
तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से सवाल किया कि यदि उनके पहले के फैसले सही थे, तो अब उन्हीं नियमों में बदलाव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि दोनों फैसले एक साथ सही नहीं हो सकते।
SIR प्रक्रिया क्या है और तेजस्वी इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न चुनावी मतदाता सूची की एक विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया है। तेजस्वी यादव और विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताएँ हैं, जिसके विरोध में 12 अक्टूबर को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला गया।
चुनाव आयोग ने तेजस्वी के आरोपों पर क्या कहा?
13 अक्टूबर 2026 तक चुनाव आयोग की ओर से तेजस्वी यादव के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ये आरोप अभी तक किसी स्वतंत्र जाँच एजेंसी द्वारा सत्यापित भी नहीं हुए हैं।
इस विवाद का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह बयान चुनावी पारदर्शिता को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में स्थापित कर सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, इससे चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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