8 अक्टूबर 2026
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वोटर लिस्ट से नाम हटने पर कानूनी उपाय मौजूद हैं, सड़क आंदोलन नहीं: केरल HC के पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन

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वोटर लिस्ट से नाम हटने पर कानूनी उपाय मौजूद हैं, सड़क आंदोलन नहीं: केरल HC के पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन

सारांश

केरल हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन ने 'वोट चोरी' के शोर को दोहरे मापदंड का नाम दिया — और सीधे कहा कि एसआईआर एक संवैधानिक, सुप्रीम कोर्ट-मान्य प्रक्रिया है। उनका संदेश साफ है: आंदोलन नहीं, अदालत का रास्ता अपनाएं।

मुख्य बातें

केरल HC के पूर्व जस्टिस पी.
रवींद्रन ने 8 अक्टूबर 2026 को कहा कि एसआईआर प्रक्रिया संवैधानिक रूप से वैध है और सर्वोच्च न्यायालय ने इसे सही ठहराया है।
यह नौवीं बार है जब भारत निर्वाचन आयोग यह प्रक्रिया कर रहा है; इससे पहले आठ बार ऐसा हो चुका है।
पूर्व जस्टिस ने कहा — वोटर लिस्ट से नाम हटने पर कानूनी समाधान उपलब्ध है; प्रभावित व्यक्ति दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
'वोट चोरी' के आरोपों को उन्होंने 'दोहरे मापदंड' बताया — केरल में कांग्रेस ने खुद एसआईआर का स्वागत किया था।
राहुल गांधी की CEC से मुलाकात की माँग पर कहा — तय प्रक्रिया से अपॉइंटमेंट लें, यही उचित रास्ता है।
सड़क पर आंदोलन को उन्होंने 'लोकतंत्र विरोधी' बताते हुए कहा कि असली लड़ाई बैलेट बॉक्स पर लड़ी जाती है।

केरल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पी. एन. रवींद्रन ने 8 अक्टूबर 2026 को 'वोट चोरी' के आरोपों और चुनाव आयोग पर बढ़ते हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी वोटर का नाम एसआईआर (विशेष सारांश पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान गलती से हटा दिया गया है, तो उसके पास पूर्ण कानूनी समाधान मौजूद है — और सड़क पर उतरकर हंगामा करना न तो लोकतांत्रिक है, न ही प्रभावी।

एसआईआर प्रक्रिया क्या है और क्यों होती है

पूर्व जस्टिस रवींद्रन ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा की जाने वाली एसआईआर प्रक्रिया कानूनी रूप से अधिकृत है और सर्वोच्च न्यायालय ने इसे संवैधानिक रूप से सही ठहराया है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को सटीक और अद्यतन बनाए रखने के लिए चलाई जाती है — जिसमें निधन हो चुके मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत व्यक्तियों और अयोग्य व्यक्तियों के नाम हटाना शामिल है।

उन्होंने कहा, 'यह नौवीं बार है जब यह प्रक्रिया हो रही है — इससे पहले आठ बार ऐसा हो चुका है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2013 में तत्कालीन कानून मंत्री ने लोकसभा में यह स्पष्ट किया था कि असहमति की स्थिति में कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

विपक्ष के आरोपों पर सीधा जवाब

रवींद्रन ने विपक्ष की 'वोट चोरी' की शब्दावली को 'दोहरे मापदंड' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि केरल में कांग्रेस खुद सत्ता में है और वहाँ उसी एसआईआर प्रक्रिया का स्वागत किया गया था। उन्होंने कहा, 'किसी ने उनके वोट नहीं चुराए। असल में केरल में उन्होंने कहा कि एसआईआर ने उनकी सफलता में योगदान दिया।'

उनके अनुसार, पहले विपक्ष CBI, ED और अन्य जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता था — अब वही निशाना चुनाव आयोग पर है। उन्होंने इसे संस्थाओं को कमज़ोर करने की एक सुनियोजित कोशिश बताया।

राहुल गांधी और सीईसी से मुलाकात का मुद्दा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से मुलाकात की माँग पर पूर्व जस्टिस ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में वे निश्चित रूप से CEC से मिल सकते हैं — लेकिन इसके लिए एक तय प्रक्रिया है। 'वे पत्र लिख सकते हैं, अपॉइंटमेंट माँग सकते हैं। यदि जवाब न मिले, तो वे शिकायत कर सकते हैं।' उन्होंने कहा कि बिना निर्धारित प्रक्रिया के मिलने पर जोर देना उचित नहीं है।

कानूनी उपाय और राजनीतिक जिम्मेदारी

पूर्व न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सही मतदाता का नाम गलती से हटाया गया है, तो वह संबंधित अधिकारियों या अदालतों के माध्यम से न केवल शिकायत दर्ज करा सकता है, बल्कि दोबारा पंजीकरण भी करा सकता है। उन्होंने कहा, 'कानून में इसका पूरा प्रावधान है, लेकिन आम आदमी इसे नहीं पढ़ता।'

उन्होंने विरोध कर रही राजनीतिक पार्टियों से सवाल किया कि वे प्रभावित मतदाताओं को अपील करने या पुनः पंजीकरण के लिए प्रेरित क्यों नहीं कर रहीं, बजाय सड़कों पर हंगामा करने के। उन्होंने कहा, 'लड़ाई सड़कों पर नहीं, बैलेट बॉक्स और वोटिंग बूथ पर लड़ी जाती है।'

आम नागरिकों के अधिकारों की चिंता

रवींद्रन ने यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन स्थलों के आसपास रहते हैं, उनके मौलिक अधिकारों पर भी विचार होना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने स्वयं केरल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान परेशानी का सामना किया है — लेकिन उनके अनुसार इसका समाधान विरोध नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया है। उनका मानना है कि आने वाले चुनावों में जनता खुद इसका जवाब देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संस्थागत पारदर्शिता की माँग को 'विदेशी साजिश' कहकर खारिज करना विमर्श को सरलीकृत करता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर प्रक्रिया क्या है और इसे सुप्रीम कोर्ट ने क्यों सही माना है?
एसआईआर यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत भारत निर्वाचन आयोग वोटर लिस्ट को अद्यतन करता है — निधन हो चुके, अयोग्य या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है।
अगर वोटर लिस्ट से नाम गलती से हट जाए तो क्या करें?
पूर्व जस्टिस रवींद्रन के अनुसार प्रभावित मतदाता संबंधित निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, या कानूनी प्रावधान के तहत दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। कानून में इसका पूरा प्रावधान है।
पूर्व जस्टिस रवींद्रन ने 'वोट चोरी' के आरोपों को दोहरे मापदंड क्यों कहा?
उनका तर्क है कि केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने खुद एसआईआर प्रक्रिया का स्वागत किया और कहा कि इससे उनकी सफलता में योगदान मिला। जब वही प्रक्रिया अन्य राज्यों में 'वोट चोरी' कही जाती है, तो यह दोहरा मापदंड है।
राहुल गांधी को CEC से कैसे मिलना चाहिए — पूर्व जस्टिस का क्या कहना है?
रवींद्रन ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त से मिल सकते हैं, लेकिन इसके लिए पत्र लिखकर और अपॉइंटमेंट माँगकर तय प्रक्रिया का पालन करना ज़रूरी है। यदि जवाब न मिले तो वे औपचारिक शिकायत कर सकते हैं।
क्या यह पहली बार है जब एसआईआर प्रक्रिया चल रही है?
नहीं। पूर्व जस्टिस रवींद्रन के अनुसार यह नौवीं बार है जब भारत निर्वाचन आयोग यह प्रक्रिया कर रहा है — इससे पहले आठ बार यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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