वोटर लिस्ट से नाम हटने पर कानूनी उपाय मौजूद हैं, सड़क आंदोलन नहीं: केरल HC के पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पी. एन. रवींद्रन ने 8 अक्टूबर 2026 को 'वोट चोरी' के आरोपों और चुनाव आयोग पर बढ़ते हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी वोटर का नाम एसआईआर (विशेष सारांश पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान गलती से हटा दिया गया है, तो उसके पास पूर्ण कानूनी समाधान मौजूद है — और सड़क पर उतरकर हंगामा करना न तो लोकतांत्रिक है, न ही प्रभावी।
एसआईआर प्रक्रिया क्या है और क्यों होती है
पूर्व जस्टिस रवींद्रन ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा की जाने वाली एसआईआर प्रक्रिया कानूनी रूप से अधिकृत है और सर्वोच्च न्यायालय ने इसे संवैधानिक रूप से सही ठहराया है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को सटीक और अद्यतन बनाए रखने के लिए चलाई जाती है — जिसमें निधन हो चुके मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत व्यक्तियों और अयोग्य व्यक्तियों के नाम हटाना शामिल है।
उन्होंने कहा, 'यह नौवीं बार है जब यह प्रक्रिया हो रही है — इससे पहले आठ बार ऐसा हो चुका है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2013 में तत्कालीन कानून मंत्री ने लोकसभा में यह स्पष्ट किया था कि असहमति की स्थिति में कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।
विपक्ष के आरोपों पर सीधा जवाब
रवींद्रन ने विपक्ष की 'वोट चोरी' की शब्दावली को 'दोहरे मापदंड' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि केरल में कांग्रेस खुद सत्ता में है और वहाँ उसी एसआईआर प्रक्रिया का स्वागत किया गया था। उन्होंने कहा, 'किसी ने उनके वोट नहीं चुराए। असल में केरल में उन्होंने कहा कि एसआईआर ने उनकी सफलता में योगदान दिया।'
उनके अनुसार, पहले विपक्ष CBI, ED और अन्य जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता था — अब वही निशाना चुनाव आयोग पर है। उन्होंने इसे संस्थाओं को कमज़ोर करने की एक सुनियोजित कोशिश बताया।
राहुल गांधी और सीईसी से मुलाकात का मुद्दा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से मुलाकात की माँग पर पूर्व जस्टिस ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में वे निश्चित रूप से CEC से मिल सकते हैं — लेकिन इसके लिए एक तय प्रक्रिया है। 'वे पत्र लिख सकते हैं, अपॉइंटमेंट माँग सकते हैं। यदि जवाब न मिले, तो वे शिकायत कर सकते हैं।' उन्होंने कहा कि बिना निर्धारित प्रक्रिया के मिलने पर जोर देना उचित नहीं है।
कानूनी उपाय और राजनीतिक जिम्मेदारी
पूर्व न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सही मतदाता का नाम गलती से हटाया गया है, तो वह संबंधित अधिकारियों या अदालतों के माध्यम से न केवल शिकायत दर्ज करा सकता है, बल्कि दोबारा पंजीकरण भी करा सकता है। उन्होंने कहा, 'कानून में इसका पूरा प्रावधान है, लेकिन आम आदमी इसे नहीं पढ़ता।'
उन्होंने विरोध कर रही राजनीतिक पार्टियों से सवाल किया कि वे प्रभावित मतदाताओं को अपील करने या पुनः पंजीकरण के लिए प्रेरित क्यों नहीं कर रहीं, बजाय सड़कों पर हंगामा करने के। उन्होंने कहा, 'लड़ाई सड़कों पर नहीं, बैलेट बॉक्स और वोटिंग बूथ पर लड़ी जाती है।'
आम नागरिकों के अधिकारों की चिंता
रवींद्रन ने यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन स्थलों के आसपास रहते हैं, उनके मौलिक अधिकारों पर भी विचार होना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने स्वयं केरल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान परेशानी का सामना किया है — लेकिन उनके अनुसार इसका समाधान विरोध नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया है। उनका मानना है कि आने वाले चुनावों में जनता खुद इसका जवाब देगी।