सेंगोल शिल्पकार वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन, PM मोदी ने एक्स पर जताया गहरा दुख
सारांश
मुख्य बातें
वुम्मिदी एथिराजुलु, जिन्होंने 1947 में मात्र 20 वर्ष की आयु में भारत की स्वतंत्रता के प्रतीक ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी, का निधन हो गया है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
PM मोदी की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु के निधन से गहरा दुख हुआ। तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित परिवार से आने वाले एथिराजुलु को उनके द्वारा पूर्व पीएम नेहरू को भेंट किए गए ऐतिहासिक सेंगोल के लिए याद किया जाएगा।' उन्होंने आगे लिखा कि 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल को गौरव का स्थान देते समय उन्हें तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु से मिलने और राष्ट्र एवं संस्कृति के प्रति उनके योगदान के लिए आभार जताने का सम्मान प्राप्त हुआ था।
मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'उनका जीवन और शिल्प कौशल भारत की गौरवशाली परंपराओं और हमारी राष्ट्रीय यात्रा के बीच एक उल्लेखनीय संबंध का प्रतिनिधित्व करता है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदना। ओम शांति।'
राज्यपाल आर्लेकर का शोक संदेश
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने तमिलनाडु राजभवन की ओर से शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि एथिराजुलु ने 1947 में 20 साल की छोटी उम्र में पवित्र सेंगोल के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि सेंगोल के निर्माण में उनका योगदान — जो भारत की सभ्यतागत विरासत, धर्मपूर्ण शासन और स्वतंत्रता की दहलीज पर सत्ता हस्तांतरण का एक कालातीत प्रतीक है — हमेशा श्रद्धा और गर्व के साथ याद किया जाएगा।
आर्लेकर ने अपने संदेश में कहा, 'उनका जीवन और शिल्प कौशल हमारे राष्ट्र के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का हिस्सा बन गया है।' उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शाश्वत शांति की प्रार्थना की।
सेंगोल का ऐतिहासिक महत्व
सेंगोल तमिल परंपरा में न्यायपूर्ण एवं धर्मसम्मत शासन का प्रतीक रहा है। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के अवसर पर इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किया गया था, जो सत्ता के औपचारिक हस्तांतरण का प्रतीक था। यह ऐसे समय में आया है जब सेंगोल एक बार फिर राष्ट्रीय चेतना में केंद्रीय स्थान पर है — 2023 में नए संसद भवन में इसकी स्थापना के बाद से इस ऐतिहासिक वस्तु और इसके शिल्पकारों को नई पहचान मिली थी।
गौरतलब है कि वुम्मिदी परिवार तमिलनाडु के प्रतिष्ठित स्वर्णकार परिवारों में गिना जाता है, और एथिराजुलु इस शिल्प परंपरा के जीवित प्रतीक थे। उनका निधन न केवल एक कुशल शिल्पकार की विदाई है, बल्कि स्वतंत्रता के उस ऐतिहासिक क्षण के एक प्रत्यक्षदर्शी साक्षी का भी जाना है।
राष्ट्र की प्रतिक्रिया
देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक एवं राजनीतिक हस्तियों ने एथिराजुलु के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उनके निधन की खबर के बाद सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी रहा। उनके जाने से भारत ने स्वतंत्रता काल की एक अमूल्य जीवित धरोहर खो दी है, जिनकी कृति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।