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पश्चिम बंगाल कैबिनेट विभाग बंटवारा टला, 5 जून को संभावित ऐलान; सुवेंदु रख सकते हैं वित्त

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पश्चिम बंगाल कैबिनेट विभाग बंटवारा टला, 5 जून को संभावित ऐलान; सुवेंदु रख सकते हैं वित्त

सारांश

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सुवेंदु अधिकारी सरकार का पहला बड़ा प्रशासनिक इम्तिहान — 41 सदस्यीय मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा बुधवार को टल गया, अब 5 जून को संभावित। वित्त विभाग सीएम के पास रहने और दिल्ली के एक बंगाली अर्थशास्त्री को नंदीग्राम उपचुनाव के रास्ते कैबिनेट में लाने की चर्चा।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल कैबिनेट में विभागों के बंटवारे की घोषणा बुधवार से टलकर अब 5 जून को संभावित।
1 जून को 35 भाजपा विधायकों ने शपथ ली; मंत्रिपरिषद की कुल संख्या अब 41 ।
294 सदस्यीय विधानसभा में अधिकतम 44 मंत्री संभव, यानी तीन और पदों की गुंजाइश।
सूत्रों के अनुसार सीएम सुवेंदु अधिकारी वित्त विभाग अपने पास रख सकते हैं।
अधिकारी ने भवानीपुर में पूर्व सीएम ममता बनर्जी को 15,000+ मतों से हराया; नंदीग्राम सीट खाली होने से वहाँ उपचुनाव तय।

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार के विस्तारित मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे की घोषणा फिलहाल टाल दी गई है। पहले यह फैसला बुधवार को होने की संभावना थी, लेकिन सूत्रों के अनुसार अब इसके 5 जून को घोषित किए जाने की उम्मीद है। यह नवगठित भाजपा सरकार की तीसरी कैबिनेट बैठक में लिया गया निर्णय है।

मुख्य घटनाक्रम

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों के बीच विभागों के आवंटन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया बुधवार को आयोजित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में पूरी नहीं हो सकी। कथित तौर पर कुछ तकनीकी कारणों से विभागों के बंटवारे पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया, जिसके बाद इसे दो दिन के लिए टाल दिया गया।

शपथ ग्रहण और मंत्रिपरिषद का आकार

गौरतलब है कि 1 जून को कोलकाता स्थित लोक भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी। इनमें 13 कैबिनेट मंत्री, तीन स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 19 राज्य मंत्री शामिल थे।

इन 35 मंत्रियों के शपथ लेने के बाद पश्चिम बंगाल मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 41 हो गई है। इससे पहले 9 मई को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सहित छह मंत्रियों ने शपथ ली थी। 13 नए कैबिनेट मंत्रियों के शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट रैंक के मंत्रियों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 44 हो सकती है। ऐसे में अभी तीन और मंत्रियों को शामिल किए जाने की गुंजाइश बनी हुई है।

वित्त और उद्योग विभाग पर नज़र

अब सबकी नज़र इस बात पर है कि वित्त और उद्योग एवं वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग किसे सौंपे जाएँगे। मुख्यमंत्री अधिकारी ने 9 मई को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद स्पष्ट किया था कि उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में कर्ज़ के बोझ से दबे राज्य के खजाने को मजबूत करना और बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए नीतिगत सुधार करना शामिल होगा।

भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री फिलहाल वित्त विभाग अपने पास रख सकते हैं। पार्टी के भीतर चर्चा है कि दिल्ली के एक प्रतिष्ठित बंगाली अर्थशास्त्री को नंदीग्राम विधानसभा सीट से उपचुनाव जिताकर मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, और बाद में उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

नंदीग्राम सीट और उपचुनाव की पृष्ठभूमि

हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। भवानीपुर सीट पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया था। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट बरकरार रखने का फैसला किया, जिसके चलते नंदीग्राम विधानसभा सीट खाली हो गई और वहाँ उपचुनाव होना तय है।

क्या होगा आगे

विभागों के औपचारिक बंटवारे का ऐलान 5 जून को संभावित है, जिसके बाद ही नई सरकार के नीतिगत प्राथमिकताओं — वित्तीय अनुशासन और निवेश आकर्षण — पर अमल की दिशा साफ़ होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नई भाजपा सरकार के भीतर शक्ति-संतुलन साधने की कसरत का संकेत है — खासकर जब 13 कैबिनेट मंत्रियों में से किसे वित्त और उद्योग जैसे भारी विभाग मिलेंगे। दिल्ली के बंगाली अर्थशास्त्री को नंदीग्राम के रास्ते लाने की चर्चा बताती है कि सुवेंदु अधिकारी टेक्नोक्रेट-नेतृत्व वाला आर्थिक चेहरा गढ़ना चाहते हैं, ममता-युग की लोकलुभावन छवि से उलट। असली परीक्षा यह होगी कि कर्ज़ में डूबे राज्य के खजाने और निवेश-आकर्षण के दोहरे वादे को कैबिनेट संरचना कितना सहारा दे पाती है। मुख्यधारा की कवरेज जिस बात पर कम ध्यान दे रही है वह यह — 44 की सीमा में सिर्फ़ 3 जगहें खाली हैं, यानी क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के लिए जगह बेहद सीमित है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल कैबिनेट में विभागों का बंटवारा क्यों टला?
सूत्रों के अनुसार बुधवार को हुई कैबिनेट की तीसरी बैठक में कुछ तकनीकी कारणों से मंत्रियों के बीच विभागों के आवंटन को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इसके बाद घोषणा को दो दिन के लिए टाल दिया गया और अब इसके 5 जून को होने की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल मंत्रिपरिषद में अभी कुल कितने मंत्री हैं?
वर्तमान में मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 41 है, जिसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सहित 19 कैबिनेट रैंक के मंत्री शामिल हैं। 294 सदस्यीय विधानसभा में संवैधानिक रूप से अधिकतम 44 मंत्री हो सकते हैं, यानी अभी तीन और पदों की गुंजाइश है।
क्या सुवेंदु अधिकारी वित्त मंत्रालय अपने पास रखेंगे?
भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री फिलहाल वित्त विभाग अपने पास रख सकते हैं। पार्टी के भीतर चर्चा है कि दिल्ली के एक प्रतिष्ठित बंगाली अर्थशास्त्री को बाद में नंदीग्राम उपचुनाव जिताकर वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
नंदीग्राम विधानसभा सीट खाली क्यों हुई?
सुवेंदु अधिकारी ने हालिया विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी, जिसमें भवानीपुर में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखने का फैसला किया, जिसके चलते नंदीग्राम सीट खाली हो गई और वहाँ उपचुनाव होना तय है।
नई बंगाल सरकार की आर्थिक प्राथमिकताएँ क्या हैं?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 9 मई को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद कहा था कि उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में कर्ज़ के बोझ से दबे राज्य के खजाने को मजबूत करना और बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए नीतिगत सुधार करना शामिल होगा।
राष्ट्र प्रेस
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