नारी शक्ति को कैनवस पर जीवंत किया शाइनी शर्मा ने, दिल्ली के बीकानेर हाउस में 'या देवी सर्वभूतेषु' प्रदर्शनी
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली के बीकानेर हाउस की कलमकार गैलरी में 25-26 अप्रैल 2025 को दो दिवसीय 'या देवी सर्वभूतेषु' कला प्रदर्शनी आयोजित हुई।
- प्रदर्शनी की कलाकार शाइनी शर्मा सेना के नॉर्दर्न आर्मी कमांड की AWWA की अध्यक्ष हैं।
- हर पेंटिंग 'चित शक्ति' — हर प्राणी में विद्यमान जीवनी ऊर्जा — को समर्पित है, न कि किसी एक देवी को।
- शाइनी शर्मा एक्रिलिक, ऑयल, मिट्टी, चावल और लकड़ी जैसे प्राकृतिक माध्यमों से कला रचती हैं।
- सेना की वीर नारियों की अदम्य शक्ति और जिजीविषा इन चित्रों की मुख्य प्रेरणा रही।
- AWWA के तहत सद्भावना स्कूलों में आर्ट क्लब संचालित किए जाते हैं जो बच्चों को कला के माध्यम से आत्मअभिव्यक्ति का अवसर देते हैं।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के प्रतिष्ठित बीकानेर हाउस की कलमकार गैलरी में 25 और 26 अप्रैल 2025 को दो दिवसीय कला प्रदर्शनी 'या देवी सर्वभूतेषु' का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में शाइनी शर्मा ने अपनी तूलिका के माध्यम से नारी शक्ति और हर प्राणी में विद्यमान ऊर्जा को कैनवस पर जीवंत रूप दिया। यह प्रदर्शनी उस दिव्य 'चित शक्ति' को समर्पित है जो भारतीय दर्शन और संस्कृति में सृष्टि का आधार मानी जाती है।
प्रदर्शनी का विषय और प्रेरणा
प्रदर्शनी का शीर्षक 'या देवी सर्वभूतेषु' संस्कृत के उस प्रसिद्ध श्लोक से लिया गया है जो देवी की सर्वव्यापक शक्ति का वर्णन करता है। भारतीय शास्त्रों में नारी की भूमिका और शक्ति का विस्तृत वर्णन मिलता है, और इसी परंपरा को शाइनी शर्मा ने अपनी कला के माध्यम से आधुनिक दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
शाइनी ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि ये पेंटिंग्स किसी एकल थीम पर नहीं, बल्कि लंबे समय से नारी शक्ति और जीव-मात्र में विद्यमान ऊर्जा को देखने-समझने की उनकी अपनी दृष्टि का सामूहिक अभिव्यक्ति हैं। उनके अनुसार, इस समस्त अनुभव का सार अंततः 'या देवी सर्वभूतेषु' के रूप में उभरकर सामने आया।
चित शक्ति — हर प्राणी में बसी ऊर्जा
शाइनी शर्मा के अनुसार, इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित देवी किसी एक धार्मिक देवी का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, बल्कि यह 'चित शक्ति' है — वह जीवनी ऊर्जा जो हर प्राणी में वास करती है और जिसके अभाव में जीवन की कल्पना असंभव है।
उन्होंने भारतीय दर्शन का हवाला देते हुए कहा कि शक्ति के बिना शिव भी निष्प्राण हैं। यही शक्ति सृजन का स्रोत है, ऊर्जा का केंद्र है, और यह प्रदर्शनी उसी शाश्वत नारी शक्ति को श्रद्धांजलि है।
माध्यम और कला शैली
शाइनी शर्मा के अधिकांश चित्र कैनवस पर एक्रिलिक और ऑयल माध्यम में तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने मल्टीमीडिया का भी रचनात्मक उपयोग किया है। वे प्रकृति को अपना सबसे बड़ा कैनवस मानती हैं।
उन्होंने बताया कि वे मिट्टी, चावल को पीसकर अल्पना और लकड़ी के टुकड़ों तक को अपनी कला में शामिल करती हैं। प्रकृति ने जो भी दिया है, उसका सृजनात्मक उपयोग ही उनकी विशेषता है।
सेना की महिलाओं से मिली प्रेरणा
शाइनी शर्मा वर्तमान में सेना के नॉर्दर्न आर्मी कमांड की आर्मी वुमेन वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) की अध्यक्ष हैं। उनके कार्यक्षेत्र में सेना की महिलाओं, वीर नारियों और उनके बच्चों के कल्याण की जिम्मेदारी शामिल है।
उन्होंने बताया कि जो महिलाएं अपने पतियों की सीमाओं पर तैनाती के दौरान अकेले घर-परिवार संभालती हैं, उनकी अदम्य शक्ति उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। वीर नारियां — जो अपने प्रियजनों को खोने के बाद भी टूटती हैं लेकिन हार नहीं मानतीं — उनकी जिजीविषा ने इन चित्रों को आत्मा दी है।
शाइनी ने सद्भावना स्कूल और हॉस्टलों में पल रहे उन बच्चों का भी उल्लेख किया जो कठिन परिस्थितियों में बड़े हो रहे हैं। AWWA की सदस्य महिलाएं मिलकर उनके संपूर्ण विकास पर काम करती हैं। इन हॉस्टलों में आर्ट क्लब भी संचालित किए जाते हैं ताकि बच्चे कला के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त कर सकें।
कला और जिम्मेदारी का संगम
शाइनी शर्मा का मानना है कि कला केवल एकांत में नहीं जन्म लेती — समाज, परिवेश, जिम्मेदारियां और मिलने वाले लोग सभी कलाकार की आत्मा पर गहरी छाप छोड़ते हैं। उनके लिए कला और सामाजिक दायित्व एक-दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने संगीत और कला को महज कौशल नहीं, बल्कि आत्मा और व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति का माध्यम बताया। यह प्रदर्शनी उस विश्वास का जीवंत प्रमाण है कि कला सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उपकरण हो सकती है।
इस प्रदर्शनी की सफलता के बाद यह देखना रोचक होगा कि शाइनी शर्मा अपनी अगली कला यात्रा किस दिशा में ले जाती हैं और क्या देश के अन्य शहरों में भी इस प्रदर्शनी का आयोजन होगा।