योग नगरी मुंगेर में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उत्साह, बिहार योग विद्यालय की अनूठी पहल रही केंद्र में
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुंगेर — जिसे 'योग नगरी' के नाम से जाना जाता है — में 21 जून 2025 को 12वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस श्रद्धा, उत्साह और व्यापक सहभागिता के साथ मनाया गया। बिहार योग विद्यालय, मुंगेर की बहुचर्चित पहल 'आश्रम के प्रांगण से लेकर घर के छत-आंगन तक योग' के अंतर्गत इस वर्ष भी नागरिकों को अपने परिवार और समुदाय के साथ घरों, आंगनों तथा खुले स्थानों पर सामूहिक योगाभ्यास के लिए प्रेरित किया गया।
मुख्य कार्यक्रम और योगाभ्यास
योग दिवस का केंद्रीय आयोजन बिहार योग विद्यालय के पादुका दर्शन परिसर में हुआ, जहाँ वरिष्ठ संन्यासी स्वामी कैवल्यानंद के मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में साधकों ने योगाभ्यास में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र तथा देवी दुर्गा के 32 नामों के सामूहिक पाठ से हुई।
इसके उपरांत प्रतिभागियों ने आकर्ण धनुरासन, समकोणासन, द्विकोणासन, एकपाद प्रणामासन, अर्द्ध उष्ट्रासन, शशांकासन, मार्जरी आसन, सर्पासन, कंधरासन, विपरीतकरणी आसन, मत्स्यासन और शवासन सहित अनेक योगासनों का अभ्यास किया। साथ ही नाड़ी शोधन एवं भ्रामरी प्राणायाम तथा प्रत्याहार की विधियों का भी सामूहिक अभ्यास कराया गया।
स्वामी कैवल्यानंद का संदेश
स्वामी कैवल्यानंद ने इस अवसर पर कहा, 'योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, समरस और जागरूक बनाने वाली दिव्य साधना है। इन अभ्यासों से व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का समग्र विकास होता है।' साधकों को दयालुता और सद्भावना को अपने जीवन, संबंधों और कार्यों का आधार बनाने का आह्वान भी किया गया।
यौगिक जीवनशैली पर विशेष बल
परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती की प्रेरणा से इस वर्ष 'दयालुता' को यम और 'संतोष' को नियम के रूप में अपनाने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन सिद्धांतों के निष्ठापूर्वक पालन से न केवल व्यक्ति की मनोदशा में सकारात्मक परिवर्तन आता है, बल्कि आसपास का सामाजिक वातावरण भी बेहतर बनता है।
कार्यक्रम में स्वामी सत्यानंद सरस्वती के उस दूरदर्शी विचार को भी स्मरण किया गया, जिसमें उन्होंने लगभग छह दशक पूर्व ही कहा था कि योग एक वैश्विक संस्कृति के रूप में उभरेगा और विश्व की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। आज विश्वभर में योग को मिली व्यापक मान्यता उनकी इस दूरदृष्टि का प्रमाण मानी जा रही है।
बिहार योग विद्यालय की पहल की पृष्ठभूमि
बिहार योग विद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की वैश्विक घोषणा के साथ ही यह पहल प्रारंभ की थी। प्रत्येक वर्ष एक विशेष योग कार्यक्रम तैयार कर लोगों को एक निर्धारित समय पर एकजुट होकर योगाभ्यास के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। विद्यालय ने 2013 के विश्व योग सम्मेलन के बाद शुरू हुए 'योग के दूसरे अध्याय' का भी उल्लेख किया, जिसके तहत योग को केवल एक घंटे के अभ्यास तक सीमित न रखकर संपूर्ण 'यौगिक जीवनशैली' के रूप में अपनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
समापन और सामूहिक प्रार्थना
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक प्रार्थना की कि योग की प्रेरणा प्रत्येक जीवन में निरंतर बनी रहे और विश्व में शांति, सद्भाव तथा स्वास्थ्य का विस्तार हो। आने वाले वर्षों में भी यह पहल और अधिक व्यापक स्वरूप लेती रहे, इसकी उम्मीद व्यक्त की गई।